Friday, 8 March 2019

*अंतर्राष्ट्रीय_महिला_दिवस :इतिहास और वर्तमान*
 *(InternationalWomensDay2019)WomensDay
(Theme: Think equal, build smart, innovate for change)*
महिलाओं के लिए सबसे अहम दिन के तौर पर इंटरनेशनल वूमेन्स डे मनाया जाता है। इस दिन उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए विशेष तरह के आयोजन होते हैं।इस साल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2019 की थीम "Think equal, build smart, innovate for change" रखी गई है।

दुनिया भर में बढ़ती महिलाओं की भागीदारी और उन्हें प्रेरित करने के लिए इसका आयोजन वैश्विक स्तर पर किया जाता है। नारी अब अपने फैसलों को लेकर पुरुषों पर निर्भर नहीं हैं। वहीं, दूसरी तरफ पुरुष भी महिलाओं को लेकर संवेदनशील हो रहे हैं। महिला दिवस पर पुरुषों का उत्साह भी देखते ही बनता है। त्याग का दूसरा नाम कहलाने वाली महिलाएं अब इस दिन का बेसब्री से इंतजार करती हैं।

 *कब_शुरू_हुआ_महिला_दिवस* ?

दरअसल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एक मज़दूर आंदोलन से उपजा है. इसका बीजारोपण साल 1908 में हुआ था जब 15 हज़ार औरतों ने न्यूयॉर्क शहर में मार्च निकालकर नौकरी में कम घंटों की मांग की थी.

इसके अलावा उनकी मांग थी कि उन्हें बेहतर वेतन दिया जाए और मतदान करने का अधिकार भी दिया जाए. एक साल बाद सोशलिस्ट पार्टी ऑफ़ अमरीका ने इस दिन को पहला राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित कर दिया.

 *इसे_अंतरराष्ट्रीय_बनाने_का_आइडिया_आया_कहां_से* ?

ये आइडिया एक औरत का ही था. क्लारा ज़ेटकिन ने 1910 में कोपेनहेगन में कामकाजी औरतों की एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के दौरान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सुझाव दिया. उस वक़्त कॉन्फ़्रेंस में 17 देशों की 100 औरतें मौजूद थीं. उन सभी ने इस सुझाव का समर्थन किया.

सबसे पहले साल 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया था. लेकिन तकनीकी तौर पर इस साल हम 107वां अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहे हैं.

1975 में महिला दिवस को आधिकारिक मान्यता उस वक्त दी गई थी जब संयुक्त राष्ट्र ने इसे वार्षिक तौर पर एक थीम के साथ मनाना शुरू किया. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पहली थीम थी 'सेलीब्रेटिंग द पास्ट, प्लानिंग फ़ॉर द फ्यूचर.'

 *लेकिन_8_मार्च_ही_क्यों* ?

ये सवाल तो आपके मन में भी उठता ही होगा कि आख़िर 8 मार्च को ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस क्यों मनाया जाता है? दरअसल, क्लारा ज़ेटकिन ने महिला दिवस मनाने के लिए कोई तारीख़ पक्की नहीं की थी.

1917 में युद्ध के दौरान रूस की महिलाओं ने 'ब्रेड एंड पीस' (यानी खाना और शांति) की मांग की. महिलाओं की हड़ताल ने वहां के सम्राट निकोलस को पद छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया और अंतरिम सरकार ने महिलाओं को मतदान का अधिकार दे दिया.

उस समय रूस में जूलियन कैलेंडर का प्रयोग होता था. जिस दिन महिलाओं ने यह हड़ताल शुरू की थी वो तारीख़ 23 फरवरी थी. ग्रेगेरियन कैलेंडर में यह दिन 8 मार्च था और उसी के बाद से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाने लगा.

 *क्या_कोई_अंतरराष्ट्रीय_पुरुष_दिवस_भी_है* ?

बिल्कुल है. अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस 19 नवंबर को है. साल 1990 से इसे मनाया जा रहा है लेकिन संयुक्त राष्ट्र की ओर से इसे मान्यता नहीं मिली है.

60 से ज़्यादा देशों में अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता है. इसका मकसद पुरुषों की सेहत, जेंडर रिलेशन को बढ़ाने, लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और उनमें सकारात्मकता बढ़ाना है. 2017 में इसकी थीम 'सेलीब्रेट मेन एंड ब्वॉएज़' थी.

 *दुनियाभर_में_कैसे_मनाया_जाता_है_यह_दिवस* .?

कई देशों में इस दिन राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा की जाती है. रूस और दूसरे कई देशों में इस दिन के आस-पास फूलों की कीमत काफी बढ़ जाती है. इस दौरान महिला और पुरुष एक-दूसरे को फूल देते हैं.

चीन में ज्यादातर दफ़्तरों में महिलाओं को आधे दिन की छुट्टी दी जाती है. वहीं अमरीका में मार्च का महीना 'विमेन्स हिस्ट्री मंथ' के तौर पर मनाया जाता है l

Friday, 1 March 2019

[28/02, *जानिए_जब_कोई_सैनिक_किसी_दूसरे_देश_की_सीमा_में_पकड़ा_जाता_है*
 **तो_क्या_होता_है,
युद्ध_मे_बंदियों_के_नियम*
*
अंतरराष्ट्रीय_जिनेवा_संधि_के_तहत युद्धबंदियों को लेकर क्या नियम हैं।
जिनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों को डराया-धमकाया नहीं जा सकता।

 उन्हें अपमानित नहीं किया जा सकता। इतना ही नहीं कोई भी देश युद्धबंदियों को लेकर जनता में उत्सुकता पैदा नहीं कर सकता।

इस संधि के मुताबिक युद्धबंदियों पर या तो मुकदमा चलाया जा सकता है या फिर युद्ध के बाद उन्हें लैटाना होता है। हालांकि पकड़ गए युद्धबंदियों को अपना नाम, सैन्य पद और नंबर बताने होते हैं।

 *इस_संधि_की_मुख्य_बातें*

सन 1949 से लागू हुई संधि का मकसद ऐसे सैनिकों की रक्षा करना है जिसे दुश्मन देश की सेना ने पकड़ लिया हो।

इस संधि के मुताबिक पकड़े गए सैनिक के साथ मानवीय बर्ताव किया जाएगा।

जैसे ही किसी देश के सैनिक, चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, उसे पकड़ा जाता है, संधि उसी समय लागू हो जाती है।

 *इस संधि के तहत किसी भी युद्धबंदी को प्रताड़ित करना गैर-कानूनी है।*

सैनिक के पकड़ते समय उसकी जाति, उसका रंग, धर्म, जन्म या पैसा और इस तरह की बातों के बारे में नहीं पूछा जाएगा।

संधि में साफ कहा गया है कि अगर जरूरत पड़ी तो कैदी सिर्फ अपना नाम, जन्मतिथि, रैंक और सर्विस नंबर को ही बताएगा।

 *वर्ष_1947_से_अब_तक_भारत_के_कितने_पायलटों_को_पाकिस्तान_ने_पकड़ा_कैसा_हुआ_सलूक*

ये पहला मौका नहीं है जब युद्ध के दौरान किसी भारतीय पायलट को पाकिस्तानी सेना ने बंदी बनाया हो. करीब सभी भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय पायलटों को पाकिस्तानी सेना ने बंदी बनाया है.

 *भारत_पाक_युद्ध_1965_एयर_मार्शल (रिटा.) बृजपाल सिंह सिकंद*

भारत-पाक युद्ध 1965 के दौरान तत्कालीन स्क्वाड्रन लीडर बृजपाल सिंह सिकंद को पाक सीमा में पकड़ लिया गया. युद्ध के दौरान वो एक जीनाट विमान उड़ा रहे थे. हवा में अपना पूरा कर वो सुरक्षित जमीन पर उतर चुके थे. लेकिन विमान उतारने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने गलती से दुश्मन देश की सीमा के पसरूर में विमान उतार दिया.

जब उन्होंने उड़ान भरनी चाहिए तब तक रनवे पर पाकिस्तानी सेना की जीप पहुंच गई, जिसने उड़ान में बाधा पहुंचाई. उन्हें घेरकर विमान से नीचे उतरने पर मजबूर कर दिया गया.

हालांकि बाद में जेनेवा संधि के तहत उन्हें पाकिस्तान ने रिहा कर दिया. वे एयर मार्शल के पद से रिटायर हुए.

 उन्होंने साल 1950 में एक फाइटर पायलट के पद से इंडियन एयरफोर्स में शुरुआत की थी. बृजपाल सिंह सिकंद के अनुसार, तब उन्हें पाकिस्तानी सेना ने प्रताड़ित किया था.

 *भारत_पाक_युद्ध_1971_एयर_वाइस_मार्शल (रिटा.) आदित्य विक्रम पेठिया*

भोपाल में रह रहे वायुसेना के रिटायर्ड एयर वाइस मार्शल आदित्य विक्रम पेठिया 1971 में युद्ध के दौरान पाकिस्तान में युद्ध बंदी रह चुके हैं.

रिटायर्ड एयर वाइस मार्शल आदित्य विक्रम पेठिया भारतीय वायुसेना की उस कमान में शामिल थे, जिसने 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पाकिस्तान पर एयर अटैक किया. आदित्य विक्रम पेठिया पाकिस्तान की सीमा में युध्द बंदी बना लिए गए. वो पांच महीने वहां युद्ध बंदी रहे. उन्हें जो यातनाएं दी गयीं, उसे बयां करते हुए आज भी उनकी आंखों में गुस्सा उतर आता है. जिनेवा संधि के ज़रिए पांच महीने बाद उनकी रिहाई हुई.

 *भारत_पाक_युद्ध_1971_विंग कमांडर हरसरन सिंह गिल*

भारत-पाक युद्ध 1971 के दौरान 3 दिसंबर से 13 दिसंबर तक विंग कमांडर हरसरन सिंह ने वेस्‍टर्न विंग का नेतृत्व किया. वे एक जांबाज सेनानी थे. उन्होंने कई दुश्मन विमानों को धूल चटाई. 13 दिसंबर को हवा में युद्ध के दौरान उन्होंने चार दुश्मन विमानों के छक्के छुड़ा दिए. लेकिन जब चारों दुश्मन जहाज वापस भागने लगे तो उन्होंने अकेले ही अपने मिग 21 विमान से चारों को खदेड़ लिया.

लेकिन इसी दौरान पाकिस्तान ने जमीन से हमला कर उनके विमान को गिरा दिया. इसमें वे शहीद हो गए. उनके इस असाधारण वीरता के लिए उन्हें वीर चक्र से नवाजा गया.

 *कारगिल_युद्ध_1999_लेफ्टिनेंट_नचिकेता*

कारगिल ऑपरेशन के दौरान सीमाई इलाके में पहाड़ियों पर बैठे घुसपैठियों को भगाने की कार्रवाई में एक मिग दुर्घटना का शिकार हो गया था. पायलट के विमान को छोड़ने के दौरान पैराशूट अनियंत्रित हो गया, जिसकी वजह से पायलट फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता को पाकिस्तान के इलाके में उतरना पड़ा.
ये जानकारी होते ही भारत ने रेडक्रॉस और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नचिकेता को छुड़ाने की कोशिशें तेज कर दी थीं.

विंग कमांडर रिटायर्ड एके सिंह से बात की तो उन्होंने बताया, “27 मई 1999 के दिन, नचिकेता अपने मिग-27 विमान से दुश्मनों के ठिकानों पर हमला कर रहे थे. उन्होंने जैसे ही एक ठिकाने को निशाना बनाकर उसपर 30 एमएम की एक मिसाइल चलाई, उनके मिग-27 विमान का इंजन बंद हो गया. इंजन से चिंगारी और धुआं निकलने लगा.

एक कुशल पायलट की तरह उन्होंने हवा में ही विमान के इंजन को फिर से चालू करने की कोशिश की, लेकिन इंजन शुरू नहीं हुआ. विमान से निकलकर वह पैराशूट द्वारा जिस जगह पर उतरे वह बर्फ से ढका दुश्मन का पहाड़ी इलाका था.

नचिकेता को पाकिस्तानी सेना ने पकड़ लिया. उन्हें रावलपिंडी की कालकोठरी में बंद कर दिया गया. भारतीय कोशिश, रेडक्रॉस और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दखल के चलते पाकिस्तान को झुकना. उसे नचिकेता को रिहा करने पर मजबूर होना पड़ा

नचिकेता को आठ दिन बाद 3 जून 1999 को पाकिस्तान ने रिहा कर दिया था. नचिकेता 26 मई से पाकिस्तानी हिरासत में थे.
हालांकि नचिकेता भारत लौटने के तीन साल बाद तक इलाज चलता रहा. वे दोबारा साल 2003 में फिर से उड़ान भरने के काबिल हुए. इसकी वजह उन्होंने खुद ही भारत लौटने के बाद कई मीडिया संस्‍थानों को दिए अपने इंटरव्यू में बताई है.

 *कारगिल_युद्ध_1999_स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा*

कारगिल युद्ध में जिस दिन लेफ्टिनेंट के नचिकेता पाकिस्तानी चपेट में आए थे, ठीक उसी दिन अजय आहूजा भी एक मिग-21 में हवा में मोर्चा संभाले हुए थे. युद्ध के दौरान एक पाकिस्तानी मिसाइल उनके विमान से आ टकराई. उनका विमान गिर गया. लेकिन इसमें उनकी जान नहीं गई.

एक रिपोर्ट के अनुसार जब स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा पाकिस्तान में गिरे तो वे जिंदा थे. लेकिन वहां गिरने के बाद उन्हें गोली मार दी गई. भारत के एयर वाइस-मार्शल एसके मलिक के अनुसार, "आहूजा की हत्या की गई थी. उनके सिर और सीने में गोली लगने के पुख्ता सबूत थे." भारत ने तब पाकिस्तान पर जेनेवा संधि के उल्लंघन का आरोप भी लगाया था.

अजय आहूजा राजस्‍थान के कोटा के रहने वाले थे. साल 1985 में उनका चयन फाइटर पायलट के तौर पर भारतीय वायुसेना में हुआ था.
[28/02, 1:23 PM‬: अंतर्देशीय जल प्राधिकरण और इंडियन ऑयल ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्‍ल्‍यूएआई) और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) ने 26 फरवरी 2019 को राष्ट्रीय जलमार्गों की आवश्यकता पूरा करने में संयुक्त रूप से ईंधन, ल्यूब्रिकेटिंग ऑयल, एलपीजी, प्राकृतिक गैस तथा अन्य संबंधित ईंधन और गैस के लिए संयुक्त रूप से आधारभूत ढांचा विकसित करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।

समझौता ज्ञापन से संबंधित मुख्य तथ्य:
•  यह समझौता ज्ञापन अंतर्देशीय जलमार्गों तथा संबंधित सेवाओं के लिए किसी तरह की ऊर्जा मांग को पूरा करने में परस्पर सहयोग के तौर-तरीकों की समझदारी बढ़ाएगा।
•  इस समझौता ज्ञापन में ईंधनों, ल्यूब्रिकेटिंग ऑयल, एलपीजी (घरेलू और वाणिज्यिक उपयोग) प्राकृतिक गैस तथा अन्य संबंधित ईंधन और गैस की प्राप्ति, भंडारण, वितरण और आपूर्ति के लिए आधारभूत संरचना विकसित करने का प्रावधान है।
•  इसके अतिरिक्त इस समझौता ज्ञापन में उपभोक्ता पम्प (वाहनों, ईंजनों, मशीनरी तथा उपकरण के लिए ईंधन सप्लाई) तथा खुदरा तथा टर्मिनलों/मल्टी मॉडलों टर्मिनलों पर रिटेल आउटलेट (ईंधन और गैस के लिए) स्थापना के लिए आधारभूत संरचना विकास शामिल हैं।
•  आईडब्ल्यूएआई तथा आईओसीएल विस्तृत भूमि आवश्यकता, भंडारण सुविधाओं तथा अन्य सहयोगी ढांचा की तैयारी के लिए लागत विवरण के साथ तकनीकी आर्थिक सम्भावना अध्ययन करेंगे।
•  यह अध्ययन यातायात क्षमता, स्थानीय उद्योगों तथा जलमार्गों की निकटता और रेल से इसके संपर्क पर आधारित होंगे।

अन्य जानकारी:
•  आईडब्ल्यूएआई सूचना साझा करने, आवश्यक इनपुट उपलब्ध कराने तथा राष्ट्रीय जलमार्गों और आईओसीएल के साथ इसके टर्मिनलों के बारे में आवश्यक सहायता देगा, ताकि परियोजनाएं लागू की जा सकें।

•  आईडब्ल्यूएआई लंबी अवधि के पट्टे पर आईओसीएल को जमीन उपलब्ध कराएगा, ताकि वर्तमान टर्मिनलों पर सुविधाएं विकसित की जा सकें. यह काम सरकार की जमीन को पट्टे पर देने की नीति के स्वीकृति दिशा-निर्देशों के अंतर्गत होगा।

पृष्ठभूमि:

राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम 2016 के अनुसार वर्तमान पांच राष्ट्रीय जलमार्गों के अतिरिक्त 106 नये राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किए गए हैं. नये राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास का काम संभावना रिपोर्ट और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के आधार पर चरणबद्ध तरीके से किए जा रहे हैं।

विश्व बैंक की तकनीकी और वित्तीय सहायता के साथ जलमार्ग विकास परियोजना (जेएमवीपी) के अंतर्गत राष्ट्रीय जलमार्ग-1 की क्षमता को मजबूत बनाने का काम हाथ में लिया गया है. जेएमवीपी के अंतर्गत हल्दिया, साहिबगंज और वाराणसी में मल्टी मॉडल टर्मिनल विकसित किए जा रहे हैं और गाजीपुर तथा कालूघाट में अंतर-मॉडल टर्मिनल विकसित किए जा रहे हैं।
[28/02,

वैज्ञानिक अनुप्रयोगों के महत्व के बारे में संदेश फैलाने, मानव कल्याण के लिये विज्ञान के क्षेत्र में सभी गतिविधियों, प्रयासों और उपलब्धियों को प्रदर्शित करने और विज्ञान के विकास के लिये नई तकनीकों को लागू कर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 28 फरवरी को 'राष्ट्रीय विज्ञान दिवस' मनाया जाता है।

इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर पटना वीमेंस कॉलेज के विज्ञान ब्लॉक द्वारा दो दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

प्रमुख बिंदु

देश में हर साल 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इसमें देश भर के वैज्ञानिक संगठन और संस्थान शामिल हुए।

इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम है: साइंस फॉर द पीपल, एंड पीपल फॉर द साइंस ।

इस अवसर पर वर्ष 2016, 2017 और 2018 के लिये शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार भी प्रदान किये गए।

पृष्ठभूमि

28 फरवरी, 1928 को देश के प्रसिद्द भौतिक विज्ञानी सर चंद्रशेखर वेंकट रमन ने ‘रमन प्रभाव’ की खोज की थी जिसके लिये वर्ष 1930 में उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसी के उपलक्ष्य में 28 फरवरी, 1986 से प्रत्येक वर्ष इस दिन को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

1954 में भौतिकी के क्षेत्र में योगदान के लिये सीवी रमन को भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

 *रमन प्रभाव (Raman Effect)*

रमन प्रभाव के अनुसार, प्रकाश की प्रकृति और स्वभाव में तब परिवर्तन होता है जब वह किसी पारदर्शी माध्यम से निकलता है। यह माध्यम ठोस, द्रव और गैस कुछ भी हो सकता है।

अनुप्रयोग

यह एक अद्भुत प्रभाव है, इसकी खोज के एक दशक बाद ही 2000 रासायनिक यौगिकों की आंतरिक संरचना का पता लगाया गया। इसके पश्चात् ही क्रिस्टल की आंतरिक रचना का भी पता लगाया गया।

फोटोन की ऊर्जा या प्रकाश की प्रकृति में होने वाले अतिसूक्ष्म परिवर्तनों से माध्यम की आंतरिक अणु संरचना का पता लगाया जा सकता है। रमन प्रभाव रासायनिक यौगिकों की आंतरिक संरचना समझने के लिये भी महत्वपूर्ण है।

प्रत्येक रासायनिक पदार्थ का अपना एक विशिष्ट रमन स्पेक्ट्रम होता है और किसी पदार्थ के रमन स्पेक्ट्रम को देखकर उन पदार्थों की पहचान की जा सकती है। इस तरह रमन स्पेक्ट्रम पदार्थों को पहचानने और उनकी आतंरिक परमाणु संयोजन का ज्ञान प्राप्त करने का महत्त्वपूर्ण साधन भी है।

शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार- 2018

अपने स्थापना दिवस के अवसर पर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (Council of Scientific and Industrial Research- CSIR) ने वर्ष 2018 के लिये शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार प्राप्त करने वाले विजेताओं की सूची जारी की है।

हर साल 45 वर्ष से कम आयु के कई वैज्ञानिकों को देश भर के विभिन्न संस्थानों से चुना जाता है और पिछले पाँच वर्षों में उनके उत्कृष्ट वैज्ञानिक कार्य के लिये सम्मानित किया जाता है।

विभिन्न श्रेणियों में इस वर्ष के विजेताओं की सूची इस प्रकार है :

जीव विज्ञान - डॉ. गणेश नागाराजू (भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलूरू) और डॉ. थॉमस पुकाडिल (भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान –IISER पुणे)।

रसायन विज्ञान – डॉ. राहुल बनर्जी तथा डॉ. स्वाधीन कुमार मंडल (IISER कोलकाता)।

पृथ्वी, वातावरण, सामुद्रिक एवं ग्रहीय विज्ञान - डॉ. मेदिनेनी वेंकट रत्न (राष्ट्रीय वातावरण अनुसंधान प्रयोगशाला, तिरूपति) और डॉ. पार्थसारथी चक्रवर्ती (CSIR-राष्ट्रीय सामुद्रिक संस्थान)।

अभियांत्रिकी विज्ञान – डॉ. अमित अग्रवाल और डॉ. अश्विन अनिल गुमास्ते (IIT बॉम्बे)।

गणितीय विज्ञान - डॉ. अमित कुमार (IIT दिल्ली) और डॉ. नितिन सक्सेना (IIT कानपुर)।

चिकित्सा विज्ञान - डॉ. गणेशन वेंकट सुब्रमण्यम (राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान, बंगलूरू)।

भौतिक विज्ञान - डॉ. अदिति सेन डे (हरीशचंद्र अनुसंधान संस्थान, इलाहाबाद) और डॉ. अंबरीश घोष (भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलूरू)।

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद
( *Council of Scientific and Industrial Research CSIR)*

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विविध क्षेत्रों में अपने अग्रणी अनुसंधान एवं विकास ज्ञानाधार के लिये ज्ञात एक समसामयिक अनुसंधान एवं विकास संगठन है।

 *CSIR की स्थापना वर्ष 1942 में की गई थी* । यह एक स्वायत्त संस्था है तथा भारत का प्रधानमंत्री इसका अध्यक्ष होता है।

शिमागो इंस्टीट्यूशन्‍स रैंकिंग वर्ल्‍ड रिपोर्ट 2014 के अनुसार, विश्‍व भर के 4851 संस्‍थानों में CSIR का स्‍थान 84वाँ है और यह शीर्षस्‍थ 100 अंतर्राष्ट्रीय संस्‍थानों में अकेला भारतीय संगठन है। CSIR एशिया में 17वें और देश में पहले स्‍थान पर है।
[01/03, 12‬: IAS उम्मीदवारों के लिए हमने करंट अफेयर्स की एक छोटी और उपयोगी सूची तैयार की है। यदि IAS के उम्मीदवार इस लेख में सूचीबद्ध टॉपिक्स को अच्छे से पढता है तो IAS प्रारंभिक परीक्षा 2019 की 60% से अधिक तैयारी प्रभावी ढंग से की जा सकती है। इसके अलावा IAS मुख्य परीक्षा 2019 की तैयारी के दौरान भी यह सूची उपयोगी होगी।

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योजनाएँ और नीतियाँ

न्यू इंडिया @ 75
SDG इंडिया इंडेक्स बेसलाइन रिपोर्ट
न्यू इंडिया के लिए हेल्थ सिस्टम
Move समिट रिपोर्ट्स
तीन साल का एक्शन एजेंडा
IAS परीक्षा के लिए यंग इंडिया-वाइब्रेंट इंडिया पहल
सबसे महत्वपूर्ण सरकारी योजनाएं II
सबसे महत्वपूर्ण सरकारी योजनाएँ I
राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) के प्रोविजन
राष्ट्रीय मिनरल एक्सप्लोरेशन पॉलिसी
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति
मोदी सरकार की योजनाएं और नीतियाँ
NITI Aayog की ड्राफ्ट राष्ट्रीय ऊर्जा नीति
राष्ट्रीय विंड सोलर हाइब्रिड पॉलिसी
नई विमानन नीति
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना
नॉर्थ-ईस्ट के लिए हाइड्रोकार्बन विजन 2030
हाइड्रोकार्बन अन्वेषण और लाइसेंसिंग नीति
बिल और एक्ट

ट्रिपल तलाक बिल
Fugitive Economic Offenders Bill 2018
मॉडल कृषि उपज और पशुधन विपणन (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम 2017
Geospatial Information Regulation Bill
भूमि अधिग्रहण अधिनियम और सुधार
GST विधेयक
मुस्लिम महिला (विवाह अधिकारों का संरक्षण) विधेयक 2017
नेशनल वाटर फ्रेमवर्क बिल
रियल एस्टेट बिल
Enemy Property Amendment Bill 2016
कैरिज बाय एयर (संशोधन) विधेयक 2015
Juvenile Justice Act, 2015
एंटी हाइजैकिंग बिल
Compensatory Afforestation Fund Bill 2015
खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2015
रीजनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी बिल 2016
उद्योग (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2015
आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवा का लक्षित वितरण) विधेयक, 2016
SC और ST (अत्याचार निवारण) संशोधन नियम 2016
रिप्रजेंटेशन ऑफ़ पीपल एक्ट 1950
ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का अधिकार विधेयक 2015
मॉडल दुकान और प्रतिष्ठान (रोजगार और सेवा की शर्तें) विधेयक 2016
दिवाला और दिवालियापन संहिता विधेयक 2016
चीनी उपकर (संशोधन) विधेयक 2015
स्कीम्स और प्रोजेक्ट्स

PMJAY
आयुष्मान भारत - राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन
बैंकों के लिए इन्द्रधनुष योजना
पंडित दीनदयाल उपाध्याय श्रमेव जयते कर्यक्रम
सेतु भारतम परियोजना
प्रधानमंत्री आवास बीमा योजना
ग्राम उदय से भारत उदय अभियान
स्मार्ट सिटीज मिशन
भारत में कृषि विपणन
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना
बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना
Rurban मिशन
प्रोजेक्ट सनराइज
गंगा ग्राम योजना
भारतीय अर्थव्यवस्था

RBI की स्वायत्तता
भारत में क्रिप्टो- फाइनेंसिंग का भविष्य
यूनिवर्सल बेसिक इनकम
भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत और स्मार्ट सिटीज मिशन
एशिया अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडोर
EPF टैक्स इश्यूज
आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 पर आधारित प्रश्न
Demonetisation
कैशलेस इकोनॉमी
आर्थिक सर्वेक्षण 2015-16
केंद्रीय बजट 2016-17: मुख्य विशेषताएं
केंद्रीय बजट 2016-17: वित्तीय क्षेत्र में सुधार
भारत में पेमेंट और सेटलमेंट प्रणाली: विजन-2018
इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक
FDI नीति में सुधार
नेशनल कैपिटल गुड्स पॉलिसी 2016
मुद्रास्फीति और इसकी गतिशीलता
CRR, SLR, रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, बैंक रेट
चौथी औद्योगिक क्रांति
न्यू सिल्क रूट
14 वें वित्त आयोग की सिफारिशें
स्टैंड अप इंडिया स्कीम
कृषि योजनाएँ
NBFC दिशानिर्देश
अन्य देशों के साथ दोहरे कराधान से बचाव की संधियाँ
आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18: विश्लेषण और प्रश्न
अंतरराष्ट्रीय

यूरोपीय शरणार्थी संकट
मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम एंड इंडिया
ब्रेक्सिट इशू
भारत और NSG सदस्यता
परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन
परमाणु क्षति के लिए अनुपूरक मुआवजे पर कन्वेंशन
सीरिया और क्षेत्रीय सहयोग सम्मेलन 2016
अंतर्राष्ट्रीय सोलर अलायन्स
विज्ञान और प्रौद्योगिकी

पोटैशियम ब्रोमेट
जीका वायरस
IRNSS
3 डी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी
सोलर सेल्स
GPS
रक्त
मानव विकास के लिए महत्वपूर्ण खनिज
भारतीय राजव्यवस्था

राष्ट्रीय मुनाफाखोरी-रोधी प्राधिकरण
भारतीय विदेश नीति
राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) प्रोविजन
आधार और निजता का अधिकार
नगा शांति समझौते
The Enemy Property (Amendment and Validation) Ordinance
भारत में पुलिस सुधार
धार्मिक स्वतंत्रता और महिला अधिकार
सहकारी संघवाद
रिप्रजेंटेशन ऑफ़ पीपल एक्ट 1950
मौलिक अधिकार
DPSP-यूनिफॉर्म सिविल कोड, पशुपालन, बाल श्रम
केंद्रीय कार्यकारी- प्रधान मंत्री और केंद्रीय मंत्रिपरिषद
विधेयकों के प्रकार- धन विधेयक, वित्त विधेयक, निजी सदस्य विधेयक
राष्ट्रपति के वीटो पॉवर्स
केंद्रीय न्यायपालिका और संबंधित प्रावधान
संघ और राज्य - प्रशासनिक संबंध
संघ और राज्य - वित्तीय संबंध
राज्य न्यायपालिका
व्यावसायिक लेन-देन का नियम
दिल्ली के NCT की संवैधानिक स्थिति
भूगोल + पर्यावरण

भारत में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की उपयोगिता
गंगा नदी की सफाई: कार्यक्रम और उपलब्धि
ग्रीन क्लाइमेट फंड
भारत में NDMA की उपयोगिता
भारत का राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण
जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा
GM सरसों फसल की मंजूरी और अन्य मुद्दे
बाढ़ रोकथाम में सरकारों की भूमिका
सिंधु जल संधि और विश्लेषण
कावेरी जल विवाद और विश्लेषण
भारत में श्रम सुधार
धरती का आंतरिक हिस्सा और भूकंप
Geological Time scale of Evolution
भारत में हिमालय
भू-आकृतियां
जलवायु और इसके प्रकार
2011 की जनगणना
मानव विकास से संबंधित विभिन्न इंडेक्स
मानसून, ITCZ
भारत में वन
भारत के जल संसाधन-नदी, झरने
भारत में मिट्टी
जलवायु परिवर्तन और संबंधित सम्मेलन - पेरिस शिखर सम्मेलन
वर्ष की प्रमुख आपदाएं
नवीकरणीय ऊर्जा
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वायु प्रदुषण
फ़ूड चेन और फ़ूड वेब
CoP24 शिखर सम्मेलन 2018
आधुनिक इतिहास

1857 का विद्रोह और संबद्ध नेता
भारतीय समाज में सामाजिक सुधारऔर संबंधित अधिनियम
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
महात्मा गांधी के आगमन के बाद भारत
महात्मा गांधी का जीवन और आंदोलन
HSRA और संबंधित नेता
बंगाल विभाजन और दिल्ली दरबार
गवर्नर जनरल और एसोसिएटेड वर्क्स की सूची
मुस्लिम लीग
ब्रिटिश शासन के तहत शिक्षा
अंग्रेजों के शासन के तहत कृषि कर संरचना
Agrarion Revolts
भारत का इतिहास

सिंधु घाटी सभ्यता- हड़प्पा, मोहनजोदड़ो
गौतम बुद्ध, बौद्ध परिषद और बौद्ध धर्म के सिद्धांत
जैन धर्म, इसके सिद्धांत और 24 जैन तीर्थंकर
मंदिर की वास्तुकला
मौर्य शासन का अवलोकन
अशोक के समय के शिलालेख
गुप्त शासक और उसका अवलोकन
विदेशी पर्यटक
कुतुब-उद-दीन ऐबक का परिग्रहण
सल्तनत काल
तुगलक शासक
विजय नगर साम्राज्य-हरिहर और बुक्का
मुगल शासक, कला, वास्तुकला और मुगल शासकों की प्रमुख उपलब्धि
अकबर और उनका धार्मिक दर्शन
औरंगजेब और उसकी नीतियां
हैदर अली, टीपू सुल्तान और उनके द्वारा लड़े गए युद्ध
पेशवा
Miscellaneous (विविध)

भारत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल और अपीलीय ट्रिब्यूनल
भारत में पशुपालन
राष्ट्रीय कृषि बाजार
‬: *जेनेवा_समझौता_क्या_है_और_यह_युद्धबंदियों_को_क्या_अधिकार_देता_है* ?

भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की तनातनी की स्थिति में 27 फरवरी को भारत का एक जेट विमान जब क्रेश हो गया तो उसमें सवार विंग कमांडर ‘ *अभिनंदन_वर्तमान’ ने* पैराशूट से छलांग लगा दी और पाकिस्तान की सीमा में पकडे गए. ऐसी हालत में कई लोगों के दिमाग में यह प्रश्न उठ रहा है कि अब पाकिस्तान जैसा क्रूर देश उनके साथ किस तरह का बर्ताव करेगा.

 *आइये_इस_बारे_में_विस्तार_से_जानते_हैं*

युद्धबंधियों के मानव अधिकारों की रक्षा के लिए जेनेवा समझौते में चार संधियां हुई हैं जो कि यह नियम बतातीं हैं कि युद्ध में पकडे गए सैनिकों के साथ किस तरह का व्यवहार किया जाना चाहिए.

 *जेनेवा_समझौता_क्या_है?*

जेनेवा समझौता मुख्य रूप से युद्धबंदियों के मानवाधिकारों को बनाये रखने के लिए बनाया था ताकि युद्ध के दौरान शत्रु देश द्वारा बंदी बनाये गये सैनिकों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाये.

दरअसल युद्धबंदियों (Prisoner of war) के अधिकारों को बरकरार रखने के जेनेवा समझौते (Geneva Convention) में कई नियम दिए गए हैं.

#जेनेवा_समझौते_में_चार_संधियां_और_तीन_अतिरिक्त_प्रोटोकॉल (मसौदे) शामिल हैं. यह संधि युद्ध बंदियों के मानवाधिकारों का संरक्षण करती है. मानवता को बरकरार रखने के लिए पहली संधि 1864 में हुई थी. इसके बाद दूसरी संधि 1906 में और तीसरी संधि 1929 में हुई थी. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1949 में 194 देशों ने मिलकर चौथी संधि की थी जो कि अब तक लागू है.

जिनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों को किसी भी तरह से डराया-धमकाया या उनका अपमान नहीं किया जा सकता है. पकड़े जाने पर युद्धबंदियों को अपना नाम, सैन्य पद और नंबर बताने का प्रावधान किया गया है और युद्धबंदी की जाति, धर्म, जन्‍म आदि बातों के बारे में नहीं पूछा जाता है.

युद्धबंदियों पर या तो मुकदमा चलाया जा सकता है या युद्ध के बाद उन्हें उनके देश को लौटा दिया जाता है.

हालांकि कुछ देशों ने जिनेवा संधि का उल्लंघन किया है. पूर्व एयर चीफ मार्शल अरुप राहा ने कहा है पाकिस्तान हर समय जिनेवा संधि का पालन नहीं करता है, हालाँकि ऐसे समय में जब पूरे विश्व का पाकिस्तान के ऊपर दबाव है तो पाकिस्तान एक और इंटरनेशनल ट्रीटी का उल्लंघन नहीं करना चाहेगा. अगर पाकिस्तान ऐसा करता है तो उसे इसका खामियाजा भुगतना होगा.

 *जेनेवा_संधि_के_मुख्य_नियम_इस_प्रकार_हैं* ;

1. युद्धबंदियों से उनका नाम, सैन्य पद और नंबर पूछा जा सकता है और युद्धबंदी की जाति, धर्म, जन्‍म आदि बातों के बारे में नहीं पूछा जा सकता है साथ ही उसे डराया धमकाया या मारा_पीटा_नहीं जा सकता है.

2. घायल सैनिक की उचित देखरेख की जाती है यदि कोई घाव_या_चोट लगी है तो उसका उपचार भी किया जाता है.

3. युद्धबंदियों को खाना_पीना_और_जरूरत की सभी चीजें दी जाती है.

4. किसी भी युद्धबंदी के साथ अमानवीय बर्ताव नहीं किया जा सकता है.

5. किसी देश का सैनिक (स्त्री या पुरुष) जैसे ही पकड़ा जाता है उस पर ये संधि लागू होती है.

6. युद्धबंदी के साथ अमानवीय बर्ताव नहीं किया जा सकता है.

पाकिस्तान ने जिस तरह के वीडियो सोशल मीडिया पर डाले हैं उससे तो यह बात स्पष्ट हो जाती है कि उसने जेनेवा संधि का उल्लंघन कर दिया है क्योंकि अभिनंदन वर्तमान को जनता ने पीटा है और उनके मुंह और चेहरे से खून भी निकलता दिख रहा है.

हालाँकि भारत सरकार ने साफ़ कर दिया है कि उसके सैनिक को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुँचाया जाना चाहिए यदि ऐसा हुआ तो अंजाम भुगतने के लिए भी पाकिस्तान तैयार रहे.

अंत में एक भारतीय के रूप में हम सभी कामना करते हैं कि पाकिस्तान को सद्बुद्धि आये और वह जेनेवा संधि का पालन करते हुए #अभिनंदन वर्तमान को सही सलामत भारत सरकार को सौंपे.
[01/03*LOC_LAC_और_अंतरराष्ट्रीय_बॉर्डर_क्या_है_इसका_मतलब*

 *अंतराष्ट्रीय_सीमा_या_इंटरनेशनल_बॉर्डर (आईबी)*

इंटरनेशनल बॉर्डर उस लाइन को कहा है जाता है जो दोनों को अलग करती है और जिसे दुनिया ने स्वीकृति दी है।
आईबी रेडक्लिफ लाइन पर स्थित है और यह भारत को पाकिस्तान के चार प्रांतों से अलग करता है।

बॉर्डर_जिन_चार_प्रांतों से भारत-पाक अलग हैं वह हैं
कश्मीर,      वाघा,     पाकिस्तान का पंजाब और भारत का पंजाब।

एक_जीरो_प्वाइंट भी है जो भारत के गुजरात और राजस्थान और पाकिस्तान के सिंध को अलग करता है।

 *दोनों देशों के बीच 2,900 किमी का बॉर्डर है और इसे दुनिया सबसे ज्यादा संघर्ष वाली सीमा मानती है।*

भारत, पाक के अलावा म्यांमार, बांग्लादेश और भूटान के साथ भी इंटरनेशनल बॉर्डर साझा करता है।

 *एलओसी_यानी_लाइन_ऑफ_कंट्रोल*

एलओसी यानी लाइन ऑफ कंट्रोल वह लाइन है जिसे अंतराष्ट्रीय समुदाय नहीं मानता है लेकिन दोनों देश इसे स्वीकारते हैं।

दोनों देशों के बीच संघर्ष के बाद एलओसी को शुरू किया गया।

वर्ष 1947 में दोनों देशों के विभाजन के बाद लगातार सीजफायर हुआ और फिर एलओसी अस्तित्व में आई।

इस वर्ष पाक सेना की ओर से समर्थित आतंकी कश्मीर घाटी में दाखिल हुए और इन्हें इंडियन आर्मी ने खदेड़ा।

इसके बाद 1948 में एलओसी यानी एक लाइन ऑफ कंट्रोल को शुरू किया गया।

वर्ष 1971 में दोनों देशों के बीच जंग हुई और फिर 1972 में भारत और पाक के बीच शिमला समझौता हुआ।

इस समझौते में ही दोनों देशों ने एलओसी को औपचारिक तौर पर स्वीकार किया।

एलओसी कोई भी आधिकारिक सीमा नहीं है लेकिन सैन्य नियंत्रण वाला वह हिस्सा होता है जो विवादित हिस्सों से दूर रहता है।

 *LAC* *(लाइन_ऑफ_एक्चुअल_कंट्रोल या वास्तविक नियंत्रण रेखा)*
*
नियंत्रण रेखा से अलग, वास्तविक नियंत्रण रेखा भारत और चीन के बीच की वास्तविक सीमा रेखा है।

 4,057 किलोमीटर लंबी यह सीमा रेखा जम्मू-कश्मीर में भारत अधिकृत क्षेत्र और चीन अधिकृत क्षेत्र अक्साई चीन को पृथक करती है।

यह लद्दाख, कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरती है। यह भी एक प्रकार की सीज फायर (युद्धविराम) रेखा ही है क्योंकि 1962 के भारत-चीन युद्घ के बाद दोनों देशों की सेनाएं जहां तैनात थी, उसे वास्तविक नियंत्रण रेखा मान लिया गया।
है

*2.- NRC Draft और नागरिकता संशोधन विधेयक*

*3.- UGC अधिनियम निरसन विधेयक*

*4.- तीन तलाक और सुप्रीम कोर्ट*

*5.- दहेज उत्पीड़न कानून, धारा - 498/A*

*6.- संविधान के प्रमुख आयोग और समिति*

*7.- भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक 2018*

*8.- भारत का निगरानी तंत्र*

*9.- भ्रष्टाचार निरोधक संशोधन अधिनियम 2018*

*10.- मणिपुर जन सुरक्षा विधेयक*

*11.- राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक*

*12.- सरोगेसी विनियमन विधेयक 2018*

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