Friday, 8 March 2019

*अंतर्राष्ट्रीय_महिला_दिवस :इतिहास और वर्तमान*
 *(InternationalWomensDay2019)WomensDay
(Theme: Think equal, build smart, innovate for change)*
महिलाओं के लिए सबसे अहम दिन के तौर पर इंटरनेशनल वूमेन्स डे मनाया जाता है। इस दिन उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए विशेष तरह के आयोजन होते हैं।इस साल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2019 की थीम "Think equal, build smart, innovate for change" रखी गई है।

दुनिया भर में बढ़ती महिलाओं की भागीदारी और उन्हें प्रेरित करने के लिए इसका आयोजन वैश्विक स्तर पर किया जाता है। नारी अब अपने फैसलों को लेकर पुरुषों पर निर्भर नहीं हैं। वहीं, दूसरी तरफ पुरुष भी महिलाओं को लेकर संवेदनशील हो रहे हैं। महिला दिवस पर पुरुषों का उत्साह भी देखते ही बनता है। त्याग का दूसरा नाम कहलाने वाली महिलाएं अब इस दिन का बेसब्री से इंतजार करती हैं।

 *कब_शुरू_हुआ_महिला_दिवस* ?

दरअसल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एक मज़दूर आंदोलन से उपजा है. इसका बीजारोपण साल 1908 में हुआ था जब 15 हज़ार औरतों ने न्यूयॉर्क शहर में मार्च निकालकर नौकरी में कम घंटों की मांग की थी.

इसके अलावा उनकी मांग थी कि उन्हें बेहतर वेतन दिया जाए और मतदान करने का अधिकार भी दिया जाए. एक साल बाद सोशलिस्ट पार्टी ऑफ़ अमरीका ने इस दिन को पहला राष्ट्रीय महिला दिवस घोषित कर दिया.

 *इसे_अंतरराष्ट्रीय_बनाने_का_आइडिया_आया_कहां_से* ?

ये आइडिया एक औरत का ही था. क्लारा ज़ेटकिन ने 1910 में कोपेनहेगन में कामकाजी औरतों की एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस के दौरान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सुझाव दिया. उस वक़्त कॉन्फ़्रेंस में 17 देशों की 100 औरतें मौजूद थीं. उन सभी ने इस सुझाव का समर्थन किया.

सबसे पहले साल 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया था. लेकिन तकनीकी तौर पर इस साल हम 107वां अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मना रहे हैं.

1975 में महिला दिवस को आधिकारिक मान्यता उस वक्त दी गई थी जब संयुक्त राष्ट्र ने इसे वार्षिक तौर पर एक थीम के साथ मनाना शुरू किया. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पहली थीम थी 'सेलीब्रेटिंग द पास्ट, प्लानिंग फ़ॉर द फ्यूचर.'

 *लेकिन_8_मार्च_ही_क्यों* ?

ये सवाल तो आपके मन में भी उठता ही होगा कि आख़िर 8 मार्च को ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस क्यों मनाया जाता है? दरअसल, क्लारा ज़ेटकिन ने महिला दिवस मनाने के लिए कोई तारीख़ पक्की नहीं की थी.

1917 में युद्ध के दौरान रूस की महिलाओं ने 'ब्रेड एंड पीस' (यानी खाना और शांति) की मांग की. महिलाओं की हड़ताल ने वहां के सम्राट निकोलस को पद छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया और अंतरिम सरकार ने महिलाओं को मतदान का अधिकार दे दिया.

उस समय रूस में जूलियन कैलेंडर का प्रयोग होता था. जिस दिन महिलाओं ने यह हड़ताल शुरू की थी वो तारीख़ 23 फरवरी थी. ग्रेगेरियन कैलेंडर में यह दिन 8 मार्च था और उसी के बाद से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाने लगा.

 *क्या_कोई_अंतरराष्ट्रीय_पुरुष_दिवस_भी_है* ?

बिल्कुल है. अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस 19 नवंबर को है. साल 1990 से इसे मनाया जा रहा है लेकिन संयुक्त राष्ट्र की ओर से इसे मान्यता नहीं मिली है.

60 से ज़्यादा देशों में अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता है. इसका मकसद पुरुषों की सेहत, जेंडर रिलेशन को बढ़ाने, लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और उनमें सकारात्मकता बढ़ाना है. 2017 में इसकी थीम 'सेलीब्रेट मेन एंड ब्वॉएज़' थी.

 *दुनियाभर_में_कैसे_मनाया_जाता_है_यह_दिवस* .?

कई देशों में इस दिन राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा की जाती है. रूस और दूसरे कई देशों में इस दिन के आस-पास फूलों की कीमत काफी बढ़ जाती है. इस दौरान महिला और पुरुष एक-दूसरे को फूल देते हैं.

चीन में ज्यादातर दफ़्तरों में महिलाओं को आधे दिन की छुट्टी दी जाती है. वहीं अमरीका में मार्च का महीना 'विमेन्स हिस्ट्री मंथ' के तौर पर मनाया जाता है l

Friday, 1 March 2019

[28/02, *जानिए_जब_कोई_सैनिक_किसी_दूसरे_देश_की_सीमा_में_पकड़ा_जाता_है*
 **तो_क्या_होता_है,
युद्ध_मे_बंदियों_के_नियम*
*
अंतरराष्ट्रीय_जिनेवा_संधि_के_तहत युद्धबंदियों को लेकर क्या नियम हैं।
जिनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों को डराया-धमकाया नहीं जा सकता।

 उन्हें अपमानित नहीं किया जा सकता। इतना ही नहीं कोई भी देश युद्धबंदियों को लेकर जनता में उत्सुकता पैदा नहीं कर सकता।

इस संधि के मुताबिक युद्धबंदियों पर या तो मुकदमा चलाया जा सकता है या फिर युद्ध के बाद उन्हें लैटाना होता है। हालांकि पकड़ गए युद्धबंदियों को अपना नाम, सैन्य पद और नंबर बताने होते हैं।

 *इस_संधि_की_मुख्य_बातें*

सन 1949 से लागू हुई संधि का मकसद ऐसे सैनिकों की रक्षा करना है जिसे दुश्मन देश की सेना ने पकड़ लिया हो।

इस संधि के मुताबिक पकड़े गए सैनिक के साथ मानवीय बर्ताव किया जाएगा।

जैसे ही किसी देश के सैनिक, चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, उसे पकड़ा जाता है, संधि उसी समय लागू हो जाती है।

 *इस संधि के तहत किसी भी युद्धबंदी को प्रताड़ित करना गैर-कानूनी है।*

सैनिक के पकड़ते समय उसकी जाति, उसका रंग, धर्म, जन्म या पैसा और इस तरह की बातों के बारे में नहीं पूछा जाएगा।

संधि में साफ कहा गया है कि अगर जरूरत पड़ी तो कैदी सिर्फ अपना नाम, जन्मतिथि, रैंक और सर्विस नंबर को ही बताएगा।

 *वर्ष_1947_से_अब_तक_भारत_के_कितने_पायलटों_को_पाकिस्तान_ने_पकड़ा_कैसा_हुआ_सलूक*

ये पहला मौका नहीं है जब युद्ध के दौरान किसी भारतीय पायलट को पाकिस्तानी सेना ने बंदी बनाया हो. करीब सभी भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय पायलटों को पाकिस्तानी सेना ने बंदी बनाया है.

 *भारत_पाक_युद्ध_1965_एयर_मार्शल (रिटा.) बृजपाल सिंह सिकंद*

भारत-पाक युद्ध 1965 के दौरान तत्कालीन स्क्वाड्रन लीडर बृजपाल सिंह सिकंद को पाक सीमा में पकड़ लिया गया. युद्ध के दौरान वो एक जीनाट विमान उड़ा रहे थे. हवा में अपना पूरा कर वो सुरक्षित जमीन पर उतर चुके थे. लेकिन विमान उतारने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने गलती से दुश्मन देश की सीमा के पसरूर में विमान उतार दिया.

जब उन्होंने उड़ान भरनी चाहिए तब तक रनवे पर पाकिस्तानी सेना की जीप पहुंच गई, जिसने उड़ान में बाधा पहुंचाई. उन्हें घेरकर विमान से नीचे उतरने पर मजबूर कर दिया गया.

हालांकि बाद में जेनेवा संधि के तहत उन्हें पाकिस्तान ने रिहा कर दिया. वे एयर मार्शल के पद से रिटायर हुए.

 उन्होंने साल 1950 में एक फाइटर पायलट के पद से इंडियन एयरफोर्स में शुरुआत की थी. बृजपाल सिंह सिकंद के अनुसार, तब उन्हें पाकिस्तानी सेना ने प्रताड़ित किया था.

 *भारत_पाक_युद्ध_1971_एयर_वाइस_मार्शल (रिटा.) आदित्य विक्रम पेठिया*

भोपाल में रह रहे वायुसेना के रिटायर्ड एयर वाइस मार्शल आदित्य विक्रम पेठिया 1971 में युद्ध के दौरान पाकिस्तान में युद्ध बंदी रह चुके हैं.

रिटायर्ड एयर वाइस मार्शल आदित्य विक्रम पेठिया भारतीय वायुसेना की उस कमान में शामिल थे, जिसने 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पाकिस्तान पर एयर अटैक किया. आदित्य विक्रम पेठिया पाकिस्तान की सीमा में युध्द बंदी बना लिए गए. वो पांच महीने वहां युद्ध बंदी रहे. उन्हें जो यातनाएं दी गयीं, उसे बयां करते हुए आज भी उनकी आंखों में गुस्सा उतर आता है. जिनेवा संधि के ज़रिए पांच महीने बाद उनकी रिहाई हुई.

 *भारत_पाक_युद्ध_1971_विंग कमांडर हरसरन सिंह गिल*

भारत-पाक युद्ध 1971 के दौरान 3 दिसंबर से 13 दिसंबर तक विंग कमांडर हरसरन सिंह ने वेस्‍टर्न विंग का नेतृत्व किया. वे एक जांबाज सेनानी थे. उन्होंने कई दुश्मन विमानों को धूल चटाई. 13 दिसंबर को हवा में युद्ध के दौरान उन्होंने चार दुश्मन विमानों के छक्के छुड़ा दिए. लेकिन जब चारों दुश्मन जहाज वापस भागने लगे तो उन्होंने अकेले ही अपने मिग 21 विमान से चारों को खदेड़ लिया.

लेकिन इसी दौरान पाकिस्तान ने जमीन से हमला कर उनके विमान को गिरा दिया. इसमें वे शहीद हो गए. उनके इस असाधारण वीरता के लिए उन्हें वीर चक्र से नवाजा गया.

 *कारगिल_युद्ध_1999_लेफ्टिनेंट_नचिकेता*

कारगिल ऑपरेशन के दौरान सीमाई इलाके में पहाड़ियों पर बैठे घुसपैठियों को भगाने की कार्रवाई में एक मिग दुर्घटना का शिकार हो गया था. पायलट के विमान को छोड़ने के दौरान पैराशूट अनियंत्रित हो गया, जिसकी वजह से पायलट फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता को पाकिस्तान के इलाके में उतरना पड़ा.
ये जानकारी होते ही भारत ने रेडक्रॉस और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नचिकेता को छुड़ाने की कोशिशें तेज कर दी थीं.

विंग कमांडर रिटायर्ड एके सिंह से बात की तो उन्होंने बताया, “27 मई 1999 के दिन, नचिकेता अपने मिग-27 विमान से दुश्मनों के ठिकानों पर हमला कर रहे थे. उन्होंने जैसे ही एक ठिकाने को निशाना बनाकर उसपर 30 एमएम की एक मिसाइल चलाई, उनके मिग-27 विमान का इंजन बंद हो गया. इंजन से चिंगारी और धुआं निकलने लगा.

एक कुशल पायलट की तरह उन्होंने हवा में ही विमान के इंजन को फिर से चालू करने की कोशिश की, लेकिन इंजन शुरू नहीं हुआ. विमान से निकलकर वह पैराशूट द्वारा जिस जगह पर उतरे वह बर्फ से ढका दुश्मन का पहाड़ी इलाका था.

नचिकेता को पाकिस्तानी सेना ने पकड़ लिया. उन्हें रावलपिंडी की कालकोठरी में बंद कर दिया गया. भारतीय कोशिश, रेडक्रॉस और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दखल के चलते पाकिस्तान को झुकना. उसे नचिकेता को रिहा करने पर मजबूर होना पड़ा

नचिकेता को आठ दिन बाद 3 जून 1999 को पाकिस्तान ने रिहा कर दिया था. नचिकेता 26 मई से पाकिस्तानी हिरासत में थे.
हालांकि नचिकेता भारत लौटने के तीन साल बाद तक इलाज चलता रहा. वे दोबारा साल 2003 में फिर से उड़ान भरने के काबिल हुए. इसकी वजह उन्होंने खुद ही भारत लौटने के बाद कई मीडिया संस्‍थानों को दिए अपने इंटरव्यू में बताई है.

 *कारगिल_युद्ध_1999_स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा*

कारगिल युद्ध में जिस दिन लेफ्टिनेंट के नचिकेता पाकिस्तानी चपेट में आए थे, ठीक उसी दिन अजय आहूजा भी एक मिग-21 में हवा में मोर्चा संभाले हुए थे. युद्ध के दौरान एक पाकिस्तानी मिसाइल उनके विमान से आ टकराई. उनका विमान गिर गया. लेकिन इसमें उनकी जान नहीं गई.

एक रिपोर्ट के अनुसार जब स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा पाकिस्तान में गिरे तो वे जिंदा थे. लेकिन वहां गिरने के बाद उन्हें गोली मार दी गई. भारत के एयर वाइस-मार्शल एसके मलिक के अनुसार, "आहूजा की हत्या की गई थी. उनके सिर और सीने में गोली लगने के पुख्ता सबूत थे." भारत ने तब पाकिस्तान पर जेनेवा संधि के उल्लंघन का आरोप भी लगाया था.

अजय आहूजा राजस्‍थान के कोटा के रहने वाले थे. साल 1985 में उनका चयन फाइटर पायलट के तौर पर भारतीय वायुसेना में हुआ था.
[28/02, 1:23 PM‬: अंतर्देशीय जल प्राधिकरण और इंडियन ऑयल ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्‍ल्‍यूएआई) और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) ने 26 फरवरी 2019 को राष्ट्रीय जलमार्गों की आवश्यकता पूरा करने में संयुक्त रूप से ईंधन, ल्यूब्रिकेटिंग ऑयल, एलपीजी, प्राकृतिक गैस तथा अन्य संबंधित ईंधन और गैस के लिए संयुक्त रूप से आधारभूत ढांचा विकसित करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया।

समझौता ज्ञापन से संबंधित मुख्य तथ्य:
•  यह समझौता ज्ञापन अंतर्देशीय जलमार्गों तथा संबंधित सेवाओं के लिए किसी तरह की ऊर्जा मांग को पूरा करने में परस्पर सहयोग के तौर-तरीकों की समझदारी बढ़ाएगा।
•  इस समझौता ज्ञापन में ईंधनों, ल्यूब्रिकेटिंग ऑयल, एलपीजी (घरेलू और वाणिज्यिक उपयोग) प्राकृतिक गैस तथा अन्य संबंधित ईंधन और गैस की प्राप्ति, भंडारण, वितरण और आपूर्ति के लिए आधारभूत संरचना विकसित करने का प्रावधान है।
•  इसके अतिरिक्त इस समझौता ज्ञापन में उपभोक्ता पम्प (वाहनों, ईंजनों, मशीनरी तथा उपकरण के लिए ईंधन सप्लाई) तथा खुदरा तथा टर्मिनलों/मल्टी मॉडलों टर्मिनलों पर रिटेल आउटलेट (ईंधन और गैस के लिए) स्थापना के लिए आधारभूत संरचना विकास शामिल हैं।
•  आईडब्ल्यूएआई तथा आईओसीएल विस्तृत भूमि आवश्यकता, भंडारण सुविधाओं तथा अन्य सहयोगी ढांचा की तैयारी के लिए लागत विवरण के साथ तकनीकी आर्थिक सम्भावना अध्ययन करेंगे।
•  यह अध्ययन यातायात क्षमता, स्थानीय उद्योगों तथा जलमार्गों की निकटता और रेल से इसके संपर्क पर आधारित होंगे।

अन्य जानकारी:
•  आईडब्ल्यूएआई सूचना साझा करने, आवश्यक इनपुट उपलब्ध कराने तथा राष्ट्रीय जलमार्गों और आईओसीएल के साथ इसके टर्मिनलों के बारे में आवश्यक सहायता देगा, ताकि परियोजनाएं लागू की जा सकें।

•  आईडब्ल्यूएआई लंबी अवधि के पट्टे पर आईओसीएल को जमीन उपलब्ध कराएगा, ताकि वर्तमान टर्मिनलों पर सुविधाएं विकसित की जा सकें. यह काम सरकार की जमीन को पट्टे पर देने की नीति के स्वीकृति दिशा-निर्देशों के अंतर्गत होगा।

पृष्ठभूमि:

राष्ट्रीय जलमार्ग अधिनियम 2016 के अनुसार वर्तमान पांच राष्ट्रीय जलमार्गों के अतिरिक्त 106 नये राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किए गए हैं. नये राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास का काम संभावना रिपोर्ट और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के आधार पर चरणबद्ध तरीके से किए जा रहे हैं।

विश्व बैंक की तकनीकी और वित्तीय सहायता के साथ जलमार्ग विकास परियोजना (जेएमवीपी) के अंतर्गत राष्ट्रीय जलमार्ग-1 की क्षमता को मजबूत बनाने का काम हाथ में लिया गया है. जेएमवीपी के अंतर्गत हल्दिया, साहिबगंज और वाराणसी में मल्टी मॉडल टर्मिनल विकसित किए जा रहे हैं और गाजीपुर तथा कालूघाट में अंतर-मॉडल टर्मिनल विकसित किए जा रहे हैं।
[28/02,

वैज्ञानिक अनुप्रयोगों के महत्व के बारे में संदेश फैलाने, मानव कल्याण के लिये विज्ञान के क्षेत्र में सभी गतिविधियों, प्रयासों और उपलब्धियों को प्रदर्शित करने और विज्ञान के विकास के लिये नई तकनीकों को लागू कर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 28 फरवरी को 'राष्ट्रीय विज्ञान दिवस' मनाया जाता है।

इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर पटना वीमेंस कॉलेज के विज्ञान ब्लॉक द्वारा दो दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

प्रमुख बिंदु

देश में हर साल 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इसमें देश भर के वैज्ञानिक संगठन और संस्थान शामिल हुए।

इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम है: साइंस फॉर द पीपल, एंड पीपल फॉर द साइंस ।

इस अवसर पर वर्ष 2016, 2017 और 2018 के लिये शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार भी प्रदान किये गए।

पृष्ठभूमि

28 फरवरी, 1928 को देश के प्रसिद्द भौतिक विज्ञानी सर चंद्रशेखर वेंकट रमन ने ‘रमन प्रभाव’ की खोज की थी जिसके लिये वर्ष 1930 में उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसी के उपलक्ष्य में 28 फरवरी, 1986 से प्रत्येक वर्ष इस दिन को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

1954 में भौतिकी के क्षेत्र में योगदान के लिये सीवी रमन को भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

 *रमन प्रभाव (Raman Effect)*

रमन प्रभाव के अनुसार, प्रकाश की प्रकृति और स्वभाव में तब परिवर्तन होता है जब वह किसी पारदर्शी माध्यम से निकलता है। यह माध्यम ठोस, द्रव और गैस कुछ भी हो सकता है।

अनुप्रयोग

यह एक अद्भुत प्रभाव है, इसकी खोज के एक दशक बाद ही 2000 रासायनिक यौगिकों की आंतरिक संरचना का पता लगाया गया। इसके पश्चात् ही क्रिस्टल की आंतरिक रचना का भी पता लगाया गया।

फोटोन की ऊर्जा या प्रकाश की प्रकृति में होने वाले अतिसूक्ष्म परिवर्तनों से माध्यम की आंतरिक अणु संरचना का पता लगाया जा सकता है। रमन प्रभाव रासायनिक यौगिकों की आंतरिक संरचना समझने के लिये भी महत्वपूर्ण है।

प्रत्येक रासायनिक पदार्थ का अपना एक विशिष्ट रमन स्पेक्ट्रम होता है और किसी पदार्थ के रमन स्पेक्ट्रम को देखकर उन पदार्थों की पहचान की जा सकती है। इस तरह रमन स्पेक्ट्रम पदार्थों को पहचानने और उनकी आतंरिक परमाणु संयोजन का ज्ञान प्राप्त करने का महत्त्वपूर्ण साधन भी है।

शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार- 2018

अपने स्थापना दिवस के अवसर पर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (Council of Scientific and Industrial Research- CSIR) ने वर्ष 2018 के लिये शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार प्राप्त करने वाले विजेताओं की सूची जारी की है।

हर साल 45 वर्ष से कम आयु के कई वैज्ञानिकों को देश भर के विभिन्न संस्थानों से चुना जाता है और पिछले पाँच वर्षों में उनके उत्कृष्ट वैज्ञानिक कार्य के लिये सम्मानित किया जाता है।

विभिन्न श्रेणियों में इस वर्ष के विजेताओं की सूची इस प्रकार है :

जीव विज्ञान - डॉ. गणेश नागाराजू (भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलूरू) और डॉ. थॉमस पुकाडिल (भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान –IISER पुणे)।

रसायन विज्ञान – डॉ. राहुल बनर्जी तथा डॉ. स्वाधीन कुमार मंडल (IISER कोलकाता)।

पृथ्वी, वातावरण, सामुद्रिक एवं ग्रहीय विज्ञान - डॉ. मेदिनेनी वेंकट रत्न (राष्ट्रीय वातावरण अनुसंधान प्रयोगशाला, तिरूपति) और डॉ. पार्थसारथी चक्रवर्ती (CSIR-राष्ट्रीय सामुद्रिक संस्थान)।

अभियांत्रिकी विज्ञान – डॉ. अमित अग्रवाल और डॉ. अश्विन अनिल गुमास्ते (IIT बॉम्बे)।

गणितीय विज्ञान - डॉ. अमित कुमार (IIT दिल्ली) और डॉ. नितिन सक्सेना (IIT कानपुर)।

चिकित्सा विज्ञान - डॉ. गणेशन वेंकट सुब्रमण्यम (राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान, बंगलूरू)।

भौतिक विज्ञान - डॉ. अदिति सेन डे (हरीशचंद्र अनुसंधान संस्थान, इलाहाबाद) और डॉ. अंबरीश घोष (भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलूरू)।

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद
( *Council of Scientific and Industrial Research CSIR)*

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विविध क्षेत्रों में अपने अग्रणी अनुसंधान एवं विकास ज्ञानाधार के लिये ज्ञात एक समसामयिक अनुसंधान एवं विकास संगठन है।

 *CSIR की स्थापना वर्ष 1942 में की गई थी* । यह एक स्वायत्त संस्था है तथा भारत का प्रधानमंत्री इसका अध्यक्ष होता है।

शिमागो इंस्टीट्यूशन्‍स रैंकिंग वर्ल्‍ड रिपोर्ट 2014 के अनुसार, विश्‍व भर के 4851 संस्‍थानों में CSIR का स्‍थान 84वाँ है और यह शीर्षस्‍थ 100 अंतर्राष्ट्रीय संस्‍थानों में अकेला भारतीय संगठन है। CSIR एशिया में 17वें और देश में पहले स्‍थान पर है।
[01/03, 12‬: IAS उम्मीदवारों के लिए हमने करंट अफेयर्स की एक छोटी और उपयोगी सूची तैयार की है। यदि IAS के उम्मीदवार इस लेख में सूचीबद्ध टॉपिक्स को अच्छे से पढता है तो IAS प्रारंभिक परीक्षा 2019 की 60% से अधिक तैयारी प्रभावी ढंग से की जा सकती है। इसके अलावा IAS मुख्य परीक्षा 2019 की तैयारी के दौरान भी यह सूची उपयोगी होगी।

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योजनाएँ और नीतियाँ

न्यू इंडिया @ 75
SDG इंडिया इंडेक्स बेसलाइन रिपोर्ट
न्यू इंडिया के लिए हेल्थ सिस्टम
Move समिट रिपोर्ट्स
तीन साल का एक्शन एजेंडा
IAS परीक्षा के लिए यंग इंडिया-वाइब्रेंट इंडिया पहल
सबसे महत्वपूर्ण सरकारी योजनाएं II
सबसे महत्वपूर्ण सरकारी योजनाएँ I
राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) के प्रोविजन
राष्ट्रीय मिनरल एक्सप्लोरेशन पॉलिसी
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति
मोदी सरकार की योजनाएं और नीतियाँ
NITI Aayog की ड्राफ्ट राष्ट्रीय ऊर्जा नीति
राष्ट्रीय विंड सोलर हाइब्रिड पॉलिसी
नई विमानन नीति
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना
नॉर्थ-ईस्ट के लिए हाइड्रोकार्बन विजन 2030
हाइड्रोकार्बन अन्वेषण और लाइसेंसिंग नीति
बिल और एक्ट

ट्रिपल तलाक बिल
Fugitive Economic Offenders Bill 2018
मॉडल कृषि उपज और पशुधन विपणन (संवर्धन और सुविधा) अधिनियम 2017
Geospatial Information Regulation Bill
भूमि अधिग्रहण अधिनियम और सुधार
GST विधेयक
मुस्लिम महिला (विवाह अधिकारों का संरक्षण) विधेयक 2017
नेशनल वाटर फ्रेमवर्क बिल
रियल एस्टेट बिल
Enemy Property Amendment Bill 2016
कैरिज बाय एयर (संशोधन) विधेयक 2015
Juvenile Justice Act, 2015
एंटी हाइजैकिंग बिल
Compensatory Afforestation Fund Bill 2015
खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2015
रीजनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी बिल 2016
उद्योग (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक 2015
आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवा का लक्षित वितरण) विधेयक, 2016
SC और ST (अत्याचार निवारण) संशोधन नियम 2016
रिप्रजेंटेशन ऑफ़ पीपल एक्ट 1950
ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का अधिकार विधेयक 2015
मॉडल दुकान और प्रतिष्ठान (रोजगार और सेवा की शर्तें) विधेयक 2016
दिवाला और दिवालियापन संहिता विधेयक 2016
चीनी उपकर (संशोधन) विधेयक 2015
स्कीम्स और प्रोजेक्ट्स

PMJAY
आयुष्मान भारत - राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन
बैंकों के लिए इन्द्रधनुष योजना
पंडित दीनदयाल उपाध्याय श्रमेव जयते कर्यक्रम
सेतु भारतम परियोजना
प्रधानमंत्री आवास बीमा योजना
ग्राम उदय से भारत उदय अभियान
स्मार्ट सिटीज मिशन
भारत में कृषि विपणन
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना
बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना
Rurban मिशन
प्रोजेक्ट सनराइज
गंगा ग्राम योजना
भारतीय अर्थव्यवस्था

RBI की स्वायत्तता
भारत में क्रिप्टो- फाइनेंसिंग का भविष्य
यूनिवर्सल बेसिक इनकम
भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत और स्मार्ट सिटीज मिशन
एशिया अफ्रीका ग्रोथ कॉरिडोर
EPF टैक्स इश्यूज
आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 पर आधारित प्रश्न
Demonetisation
कैशलेस इकोनॉमी
आर्थिक सर्वेक्षण 2015-16
केंद्रीय बजट 2016-17: मुख्य विशेषताएं
केंद्रीय बजट 2016-17: वित्तीय क्षेत्र में सुधार
भारत में पेमेंट और सेटलमेंट प्रणाली: विजन-2018
इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक
FDI नीति में सुधार
नेशनल कैपिटल गुड्स पॉलिसी 2016
मुद्रास्फीति और इसकी गतिशीलता
CRR, SLR, रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट, बैंक रेट
चौथी औद्योगिक क्रांति
न्यू सिल्क रूट
14 वें वित्त आयोग की सिफारिशें
स्टैंड अप इंडिया स्कीम
कृषि योजनाएँ
NBFC दिशानिर्देश
अन्य देशों के साथ दोहरे कराधान से बचाव की संधियाँ
आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18: विश्लेषण और प्रश्न
अंतरराष्ट्रीय

यूरोपीय शरणार्थी संकट
मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम एंड इंडिया
ब्रेक्सिट इशू
भारत और NSG सदस्यता
परमाणु सुरक्षा शिखर सम्मेलन
परमाणु क्षति के लिए अनुपूरक मुआवजे पर कन्वेंशन
सीरिया और क्षेत्रीय सहयोग सम्मेलन 2016
अंतर्राष्ट्रीय सोलर अलायन्स
विज्ञान और प्रौद्योगिकी

पोटैशियम ब्रोमेट
जीका वायरस
IRNSS
3 डी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी
सोलर सेल्स
GPS
रक्त
मानव विकास के लिए महत्वपूर्ण खनिज
भारतीय राजव्यवस्था

राष्ट्रीय मुनाफाखोरी-रोधी प्राधिकरण
भारतीय विदेश नीति
राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) प्रोविजन
आधार और निजता का अधिकार
नगा शांति समझौते
The Enemy Property (Amendment and Validation) Ordinance
भारत में पुलिस सुधार
धार्मिक स्वतंत्रता और महिला अधिकार
सहकारी संघवाद
रिप्रजेंटेशन ऑफ़ पीपल एक्ट 1950
मौलिक अधिकार
DPSP-यूनिफॉर्म सिविल कोड, पशुपालन, बाल श्रम
केंद्रीय कार्यकारी- प्रधान मंत्री और केंद्रीय मंत्रिपरिषद
विधेयकों के प्रकार- धन विधेयक, वित्त विधेयक, निजी सदस्य विधेयक
राष्ट्रपति के वीटो पॉवर्स
केंद्रीय न्यायपालिका और संबंधित प्रावधान
संघ और राज्य - प्रशासनिक संबंध
संघ और राज्य - वित्तीय संबंध
राज्य न्यायपालिका
व्यावसायिक लेन-देन का नियम
दिल्ली के NCT की संवैधानिक स्थिति
भूगोल + पर्यावरण

भारत में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की उपयोगिता
गंगा नदी की सफाई: कार्यक्रम और उपलब्धि
ग्रीन क्लाइमेट फंड
भारत में NDMA की उपयोगिता
भारत का राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण
जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा
GM सरसों फसल की मंजूरी और अन्य मुद्दे
बाढ़ रोकथाम में सरकारों की भूमिका
सिंधु जल संधि और विश्लेषण
कावेरी जल विवाद और विश्लेषण
भारत में श्रम सुधार
धरती का आंतरिक हिस्सा और भूकंप
Geological Time scale of Evolution
भारत में हिमालय
भू-आकृतियां
जलवायु और इसके प्रकार
2011 की जनगणना
मानव विकास से संबंधित विभिन्न इंडेक्स
मानसून, ITCZ
भारत में वन
भारत के जल संसाधन-नदी, झरने
भारत में मिट्टी
जलवायु परिवर्तन और संबंधित सम्मेलन - पेरिस शिखर सम्मेलन
वर्ष की प्रमुख आपदाएं
नवीकरणीय ऊर्जा
ध्वनि प्रदूषण
वायु प्रदुषण
फ़ूड चेन और फ़ूड वेब
CoP24 शिखर सम्मेलन 2018
आधुनिक इतिहास

1857 का विद्रोह और संबद्ध नेता
भारतीय समाज में सामाजिक सुधारऔर संबंधित अधिनियम
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
महात्मा गांधी के आगमन के बाद भारत
महात्मा गांधी का जीवन और आंदोलन
HSRA और संबंधित नेता
बंगाल विभाजन और दिल्ली दरबार
गवर्नर जनरल और एसोसिएटेड वर्क्स की सूची
मुस्लिम लीग
ब्रिटिश शासन के तहत शिक्षा
अंग्रेजों के शासन के तहत कृषि कर संरचना
Agrarion Revolts
भारत का इतिहास

सिंधु घाटी सभ्यता- हड़प्पा, मोहनजोदड़ो
गौतम बुद्ध, बौद्ध परिषद और बौद्ध धर्म के सिद्धांत
जैन धर्म, इसके सिद्धांत और 24 जैन तीर्थंकर
मंदिर की वास्तुकला
मौर्य शासन का अवलोकन
अशोक के समय के शिलालेख
गुप्त शासक और उसका अवलोकन
विदेशी पर्यटक
कुतुब-उद-दीन ऐबक का परिग्रहण
सल्तनत काल
तुगलक शासक
विजय नगर साम्राज्य-हरिहर और बुक्का
मुगल शासक, कला, वास्तुकला और मुगल शासकों की प्रमुख उपलब्धि
अकबर और उनका धार्मिक दर्शन
औरंगजेब और उसकी नीतियां
हैदर अली, टीपू सुल्तान और उनके द्वारा लड़े गए युद्ध
पेशवा
Miscellaneous (विविध)

भारत में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल और अपीलीय ट्रिब्यूनल
भारत में पशुपालन
राष्ट्रीय कृषि बाजार
‬: *जेनेवा_समझौता_क्या_है_और_यह_युद्धबंदियों_को_क्या_अधिकार_देता_है* ?

भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की तनातनी की स्थिति में 27 फरवरी को भारत का एक जेट विमान जब क्रेश हो गया तो उसमें सवार विंग कमांडर ‘ *अभिनंदन_वर्तमान’ ने* पैराशूट से छलांग लगा दी और पाकिस्तान की सीमा में पकडे गए. ऐसी हालत में कई लोगों के दिमाग में यह प्रश्न उठ रहा है कि अब पाकिस्तान जैसा क्रूर देश उनके साथ किस तरह का बर्ताव करेगा.

 *आइये_इस_बारे_में_विस्तार_से_जानते_हैं*

युद्धबंधियों के मानव अधिकारों की रक्षा के लिए जेनेवा समझौते में चार संधियां हुई हैं जो कि यह नियम बतातीं हैं कि युद्ध में पकडे गए सैनिकों के साथ किस तरह का व्यवहार किया जाना चाहिए.

 *जेनेवा_समझौता_क्या_है?*

जेनेवा समझौता मुख्य रूप से युद्धबंदियों के मानवाधिकारों को बनाये रखने के लिए बनाया था ताकि युद्ध के दौरान शत्रु देश द्वारा बंदी बनाये गये सैनिकों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाये.

दरअसल युद्धबंदियों (Prisoner of war) के अधिकारों को बरकरार रखने के जेनेवा समझौते (Geneva Convention) में कई नियम दिए गए हैं.

#जेनेवा_समझौते_में_चार_संधियां_और_तीन_अतिरिक्त_प्रोटोकॉल (मसौदे) शामिल हैं. यह संधि युद्ध बंदियों के मानवाधिकारों का संरक्षण करती है. मानवता को बरकरार रखने के लिए पहली संधि 1864 में हुई थी. इसके बाद दूसरी संधि 1906 में और तीसरी संधि 1929 में हुई थी. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1949 में 194 देशों ने मिलकर चौथी संधि की थी जो कि अब तक लागू है.

जिनेवा संधि के तहत युद्धबंदियों को किसी भी तरह से डराया-धमकाया या उनका अपमान नहीं किया जा सकता है. पकड़े जाने पर युद्धबंदियों को अपना नाम, सैन्य पद और नंबर बताने का प्रावधान किया गया है और युद्धबंदी की जाति, धर्म, जन्‍म आदि बातों के बारे में नहीं पूछा जाता है.

युद्धबंदियों पर या तो मुकदमा चलाया जा सकता है या युद्ध के बाद उन्हें उनके देश को लौटा दिया जाता है.

हालांकि कुछ देशों ने जिनेवा संधि का उल्लंघन किया है. पूर्व एयर चीफ मार्शल अरुप राहा ने कहा है पाकिस्तान हर समय जिनेवा संधि का पालन नहीं करता है, हालाँकि ऐसे समय में जब पूरे विश्व का पाकिस्तान के ऊपर दबाव है तो पाकिस्तान एक और इंटरनेशनल ट्रीटी का उल्लंघन नहीं करना चाहेगा. अगर पाकिस्तान ऐसा करता है तो उसे इसका खामियाजा भुगतना होगा.

 *जेनेवा_संधि_के_मुख्य_नियम_इस_प्रकार_हैं* ;

1. युद्धबंदियों से उनका नाम, सैन्य पद और नंबर पूछा जा सकता है और युद्धबंदी की जाति, धर्म, जन्‍म आदि बातों के बारे में नहीं पूछा जा सकता है साथ ही उसे डराया धमकाया या मारा_पीटा_नहीं जा सकता है.

2. घायल सैनिक की उचित देखरेख की जाती है यदि कोई घाव_या_चोट लगी है तो उसका उपचार भी किया जाता है.

3. युद्धबंदियों को खाना_पीना_और_जरूरत की सभी चीजें दी जाती है.

4. किसी भी युद्धबंदी के साथ अमानवीय बर्ताव नहीं किया जा सकता है.

5. किसी देश का सैनिक (स्त्री या पुरुष) जैसे ही पकड़ा जाता है उस पर ये संधि लागू होती है.

6. युद्धबंदी के साथ अमानवीय बर्ताव नहीं किया जा सकता है.

पाकिस्तान ने जिस तरह के वीडियो सोशल मीडिया पर डाले हैं उससे तो यह बात स्पष्ट हो जाती है कि उसने जेनेवा संधि का उल्लंघन कर दिया है क्योंकि अभिनंदन वर्तमान को जनता ने पीटा है और उनके मुंह और चेहरे से खून भी निकलता दिख रहा है.

हालाँकि भारत सरकार ने साफ़ कर दिया है कि उसके सैनिक को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुँचाया जाना चाहिए यदि ऐसा हुआ तो अंजाम भुगतने के लिए भी पाकिस्तान तैयार रहे.

अंत में एक भारतीय के रूप में हम सभी कामना करते हैं कि पाकिस्तान को सद्बुद्धि आये और वह जेनेवा संधि का पालन करते हुए #अभिनंदन वर्तमान को सही सलामत भारत सरकार को सौंपे.
[01/03*LOC_LAC_और_अंतरराष्ट्रीय_बॉर्डर_क्या_है_इसका_मतलब*

 *अंतराष्ट्रीय_सीमा_या_इंटरनेशनल_बॉर्डर (आईबी)*

इंटरनेशनल बॉर्डर उस लाइन को कहा है जाता है जो दोनों को अलग करती है और जिसे दुनिया ने स्वीकृति दी है।
आईबी रेडक्लिफ लाइन पर स्थित है और यह भारत को पाकिस्तान के चार प्रांतों से अलग करता है।

बॉर्डर_जिन_चार_प्रांतों से भारत-पाक अलग हैं वह हैं
कश्मीर,      वाघा,     पाकिस्तान का पंजाब और भारत का पंजाब।

एक_जीरो_प्वाइंट भी है जो भारत के गुजरात और राजस्थान और पाकिस्तान के सिंध को अलग करता है।

 *दोनों देशों के बीच 2,900 किमी का बॉर्डर है और इसे दुनिया सबसे ज्यादा संघर्ष वाली सीमा मानती है।*

भारत, पाक के अलावा म्यांमार, बांग्लादेश और भूटान के साथ भी इंटरनेशनल बॉर्डर साझा करता है।

 *एलओसी_यानी_लाइन_ऑफ_कंट्रोल*

एलओसी यानी लाइन ऑफ कंट्रोल वह लाइन है जिसे अंतराष्ट्रीय समुदाय नहीं मानता है लेकिन दोनों देश इसे स्वीकारते हैं।

दोनों देशों के बीच संघर्ष के बाद एलओसी को शुरू किया गया।

वर्ष 1947 में दोनों देशों के विभाजन के बाद लगातार सीजफायर हुआ और फिर एलओसी अस्तित्व में आई।

इस वर्ष पाक सेना की ओर से समर्थित आतंकी कश्मीर घाटी में दाखिल हुए और इन्हें इंडियन आर्मी ने खदेड़ा।

इसके बाद 1948 में एलओसी यानी एक लाइन ऑफ कंट्रोल को शुरू किया गया।

वर्ष 1971 में दोनों देशों के बीच जंग हुई और फिर 1972 में भारत और पाक के बीच शिमला समझौता हुआ।

इस समझौते में ही दोनों देशों ने एलओसी को औपचारिक तौर पर स्वीकार किया।

एलओसी कोई भी आधिकारिक सीमा नहीं है लेकिन सैन्य नियंत्रण वाला वह हिस्सा होता है जो विवादित हिस्सों से दूर रहता है।

 *LAC* *(लाइन_ऑफ_एक्चुअल_कंट्रोल या वास्तविक नियंत्रण रेखा)*
*
नियंत्रण रेखा से अलग, वास्तविक नियंत्रण रेखा भारत और चीन के बीच की वास्तविक सीमा रेखा है।

 4,057 किलोमीटर लंबी यह सीमा रेखा जम्मू-कश्मीर में भारत अधिकृत क्षेत्र और चीन अधिकृत क्षेत्र अक्साई चीन को पृथक करती है।

यह लद्दाख, कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश से होकर गुजरती है। यह भी एक प्रकार की सीज फायर (युद्धविराम) रेखा ही है क्योंकि 1962 के भारत-चीन युद्घ के बाद दोनों देशों की सेनाएं जहां तैनात थी, उसे वास्तविक नियंत्रण रेखा मान लिया गया।
है

*2.- NRC Draft और नागरिकता संशोधन विधेयक*

*3.- UGC अधिनियम निरसन विधेयक*

*4.- तीन तलाक और सुप्रीम कोर्ट*

*5.- दहेज उत्पीड़न कानून, धारा - 498/A*

*6.- संविधान के प्रमुख आयोग और समिति*

*7.- भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक 2018*

*8.- भारत का निगरानी तंत्र*

*9.- भ्रष्टाचार निरोधक संशोधन अधिनियम 2018*

*10.- मणिपुर जन सुरक्षा विधेयक*

*11.- राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक*

*12.- सरोगेसी विनियमन विधेयक 2018*

.

Wednesday, 27 February 2019

*भारत_के_29_राज्यों_के_नाम_कैसे_रखे_गए*

भारत एक ऐसा देश है, जहां पर लगभग हर तरह के धर्म समुदाय और सम्प्रदाय के लोग रहते है. यही वजह है कि यहाँ की सांस्कृतिक इतिहास बहुत ही अधिक समृद्ध है. यहाँ पर विभिन्न स्थानों के नाम के साथ विभिन्न तरह की सांस्कृतिक इतिहास जुड़ा हुआ है

 *भारत_के_29_राज्य*

1. *जम्मू_और_कश्मीर*
जम्मू और कश्मीर राज्य अपने नाम की ही तरह एक सुन्दर राज्य है. जम्मू और कश्मीर के इतिहास की माने तो यह राज्य प्राचीन समय में ऋषि कश्यप की घाटी के नाम से प्रसिद्द था. इन ऋषि के नाम से ही इस शब्द ‘कश्मीर’ का आविर्भाव हुआ. ध्यान देने वाली बात है कि संस्कृत में शब्द ‘क’ से पानी को और ‘शीमिरा’ से ‘सूख जाने’ का अर्थ प्राप्त होता है. इस वजह से इस स्थान को कश्मीर कहा जाने लगा. इस स्थान के शासक का नाम जम्बू की वजह से शब्द जम्बू का आविर्भाव हुआ.

2. *हिमाचल_प्रदेश*
 इस शब्द से यह अर्थ प्राप्त होता है कि कोई प्रदेश हिम से आच्छादित है. हिम का अर्थ बर्फ होता है और अचल का अर्थ स्थापित. इस तरह यह एक ऐसा प्रदेश हैं, जहां पर सदा बर्फ जमा रहता है. इसे बर्फ़ीले पहाड़ों का घर भी कहा जाता है.

3. *पंजाब*
शब्द पंजाब भारत—इरानी संस्कृति से बना शब्द है. ध्यान देने वाली बात है कि इस क्षेत्र से पांच नदिया बहती है. अतः शब्द ‘पंजाब’ में पंज यानि पांच और आब यानि पानी होता है. इसे पांच नदियों की भूमि भी कहा जाता है.

4. *उत्तराखंड*
वर्ष 2000 में उत्तरप्रदेश से अलग हो कर एक नया राज्य उत्तरांचल का आविर्भाव हुआ. आरम्भ में इसे उत्तरांचल ही कहा जाता था, जिसका शाब्दिक अर्थ था उत्तरी पहाड़ी. इसके उपरान्त इस स्थान को उत्तरांचल की जगह उत्तराखंड के नाम से पुकारा जाने लगा. इसका अर्थ होता है, किसी क्षेत्र का उत्तरी हिस्सा.

5. *हरियाणा*
इस स्थान के नाम को महाभारत काल से जोड़ा जाता है. हरियाणा शब्द का अर्थ हरी यानि श्री कृष्ण के यहाँ आने से जुड़ा हुआ है. महाभारत के समय भगवान श्रीकृष्ण स्वयं यहाँ आये थे, जिस वजह से यह स्थान हरियाणा के नाम से प्रसिद्द हुआ.

6. *उत्तर_प्रदेश*
उत्तर प्रदेश के नाम का अर्थ इसके नाम से ही झलक जाता है. इसका अर्थ है उत्तरी दिशा में स्थापित राज्य. अतः भारत का जो हिस्सा उत्तर दिशा की तरफ फैला हुआ है, उसे उत्तर प्रदेश के नाम से जाना जाता है.

7. *राजस्थान*
यह शब्द स्वयं में ‘राजा’ शब्द को निहित रखता है. ध्यान देने वाली बात है कि इस क्षेत्र में एक से एक प्रतापी राजा हुए थे. इन राजाओं के महलों का अवशेष अभी भी इस राज्य में पाया जाता है. राजपूत राजाओं का गढ़ होने की वजह से इस स्थान का नाम राजस्थान पड़ा. प्राचीनकाल में इसका नाम राजपुताना भी रहा है.

8. *बिहार*
बिहार शब्द का आविर्भाव पाली शब्द विहार से हुआ है. विहार शब्द का अर्थ है किसी स्थान पर भ्रमण के लिये डेरा डालना. धीरे धीरे यह शब्द विकृत होकर बिहार हो गया. यह राज्य एक लम्बे समय तक बौद्ध मठधारियों का विहार स्थल यानि भ्रमण स्थल भी रहा है.

9 *पश्चिम_बंगाल*
पश्चिम बंगाल को प्राचीन समय में बंगाल अथवा बंग्लाह कहा जाता था. यह शब्द संस्कृत के ‘वांग’ शब्द से बना है. वर्ष 1905 के दौरान बंगाल विभाजन के साथ ही इस स्थान के नाम के साथ पश्चिम जुड़ गया और यह स्थान पश्चिम बंगाल कहलाने लगा. वर्ष 1947 में भारत विभाजन के बाद इस राज्य का नाम पश्चिम बंगाल रखा गया. बंगाल के पूर्वी हिस्से को बंगलादेश कहा जाता है.

10. *झारखंड*
शब्द झारखंड ‘झर’ और ‘खंड’ दो शब्दों से मिलकर बना है. झर का अर्थ है जंगल और खंड का अर्थ है भूमि. इस वजह से झारखंड का अर्थ हुआ जंगल की भूमि. यहाँ पर वन पाए भी जाते हैं. झारखण्ड को ‘वनांचल’ भी कहा जाता है.

11. *ओड़िसा*
ओड़िसा नाम की उत्पति ‘ओडरा’ नामक शब्द से उत्पन्न हुई है. इसका अर्थ है वे ओडरा लोग जो भारत के मध्य में निवास करते है.

12. *छत्तीसगढ़*
इस स्थान को पहले दक्षिण कोसला के नाम से जाना जाता था. हालाँकि इस नाम से इस स्थान का संबंध नहीं मिल पाता. ग़ौरतलब है कि इस राज्य में कुल 36 किले पाए गये हैं. इन 36 किलों के होने की वजह से इस स्थान को छत्तीसगढ़ कहा जाता है.

13. *_मध्यप्रदेश*
मध्य प्रदेश का शाब्दिक अर्थ किसी देश के मध्य में स्थित राज्य से होता है. स्वतंत्रता के पहले यह एक बहुत बड़ा राज्य था. इसमें बरार,  छत्तीसगढ़ आदि स्थान शामिल थे. भारत के मध्य में स्थित होने की वजह से इसे मध्य प्रदेश कहा जाता है. इसे हिंदुस्तान का दिल भी कहते है.

14. *गुजरात*
गुजरात शब्द की उत्पति शब्द ‘गुजरा’ से हुई. इस स्थान पर लगभग गुज्जरों द्वारा शासन किया गया था. इन गुज्जरों द्वारा शासन होने की वजह से इसे गुज्जरों की भूमि अथवा गुजरात कहा जाता है.

15. *महाराष्ट्र*
महाराष्ट्र शब्द की उत्पति के साथ कई मत जुड़े हुए हैं. नाम के अनुसार इसका अर्थ है महान देश. इसके पहले इसे राष्ट्रिका भी कहा जाता था. महाराष्ट्र में शब्द राष्ट्र का आविर्भाव राष्ट्रकूट वंश के शासन की वजह से भी माना जाता है.

16. *गोवा*
 इस राज्य के नाम का सही विश्लेषण नहीं मिल पाता. कुछ इतिहासकारों का मानना है कि गोवा यूरोपीय अथवा पुर्तगाली शब्द है. कुछ लोग इसे गाय से भी जोड़ते है, क्योंकि गो का अर्थ गाय भी होता है.

17. *आन्ध्रप्रदेश*
आंध्र का अर्थ ‘दक्षिण’ होता है. इसी के साथ इस क्षेत्र में कुछ ऐसी जनजाति निवास करती है, जिसे आन्ध्र के नाम से जाना जाता है. मौर्य काल में भी प्रशासन में दक्षिण के नौकरशाहों के लिए ‘आन्ध्र भृत्य’ भी कहा जाता था.

18. *कर्नाटक*
कर्नाटक शब्द की उत्पत्ति ‘करू’ से हुई है. इसका अर्थ है गगनचुम्बी. यह दक्कन पठार का क्षेत्र है, जो कि काफ़ी ऊँचा क्षेत्र था. अतः इस वजह से इस स्थान को कर्नाटक का नाम दिया गया.

19. *तमिलनाडु*
तमिलनाडु दो शब्दों से मिलकर बना है तमिल और नाडू. नाडू का अर्थ है जन्मभूमि. इस वजह से यह स्थान तमिलों का घर के रूप से जाना जाता है. इस स्थान में अधिक संख्या में तमिल लोग पाए जाने के कारण इस राज्य का नाम तमिलनाडु पड़ा.

20. *केरल*
इस नाम के साथ भी कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मत जुड़े हुए हैं. केरल शब्द का आविर्भाव चेरा वंश के शासकों द्वारा उत्पन्न माना जाता है. संस्कृत में केरल का अर्थ है एक जुडी हुई भूमि. अतः यह कहा जा सकता है कि केरल समुद्र से निकली अतिरिक्त भूमि है, क्योंकि यह समुद्र के किनारे स्थित है.

21. *तेलंगाना*
इस शब्द की उत्पत्ति शब्द ‘त्रिलिंग’ से हुई है, जिसका अर्थ है भगवन शिव के तीन लिंग. अतः इस स्थान का एक अध्यात्मिक महत्त्व भी है.

22. *सिक्किम*
 इस शब्द की उत्पत्ति लिम्बू से हुई है. प्राचीन समय में इसका अर्थ एक नया विशाल भवन के रूप में भी था. हालाँकि तात्कालिक समय में इसे तिब्बती भाषा में डेजोंग भी कहा जाता है.

23. *अरुणाचल_प्रदेश*
अरुणाचल शब्द दो शब्दों के मेल से बना है. ये दो शब्द हैं अरुण और अचल. अतः यह वह स्थान है, जहाँ से सूर्य निकलता दिखाई देता है. इस वजह से इस स्थान को अरुणाचल प्रदेश कहा जाता है.

24. *असम*
असम शब्द का अर्थ अहम शासकों से है. इस स्थान पर 6 सदियों तक ऐसे शासक का राज्य रहा. इसका एक अन्य मतलब अनियमित से भी है, क्योंकि इंडो- आर्यन संस्कृति में असामा का अर्थ अनियमित होता है.

25. *मेघालय*
इस राज्य को बादलों का घर कहा जाता है. मेघालय शब्द दो शब्द से मिल कर बना है मेघ और आलय. यहाँ पर वृष्टि की संभावनाएं अधिक होने की वजह से इस स्थान का नाम मेघालय पड़ा.

26. *मणिपुर*
.इसका प्राचीन नाम कंलैपाक् है। मणिपुर के नामकरण के संदर्भ में जहाँ पौराणिक कथाओं से उसका संबंध जोड़ा जाता है, वहीं प्राप्त तथ्यों से यह प्रमाणित होता है कि प्राचीन काल में पड़ोसी राज्यों द्वारा मणिपुर को विभिन्न नामों से पुकारा जाता था, जैसे बर्मियों द्वारा कथे,
असमियों द्वारा मोगली, मिक्ली आदि। इतिहास से यह भी पता चलता है कि मणिपुर को मैत्रबाक, कंलैपुं या पोंथोक्लम आदि नामों से भी जाना जाता था।

27 *. मिजोरम*
शब्द मिजोरम में ‘मि’ का अर्थ है लोग और ‘जो’ का अर्थ है पहाड़ी. चूँकि मिजोरम एक पहाड़ी क्षेत्र है अतः इस स्थान को मिजोरम कहा जाता है.

28. *नागालैंड*
नागालैंड शब्द में नागा की उत्पत्ति एक बर्मा शब्द नाका से हुई है. नागा का अर्थ उन लोगों से है, जिनके नाक और कान छिदे हुए होते हैं. यह एक विशेष प्रजाति के लोग होते हैं. इसे कई बार नागाओं की भूमि भी कहा जाता है.

29. *त्रिपुरा*
त्रिपुरा की उत्पत्ति शब्द ‘तुईपारा’ से मानी जाती है. इसमें तुई का अर्थ है पानी और पारा का अर्थ है नजदीक. ऐसा भी माना जाता है की इस स्थान पर एक त्रिपुर नामक राजा के शासन की वजह से इसे त्रिपुरा कहा जाता है
*Veto Power Explanation* *in Hindi – वीटो पावर क्या हैं? (What is VETO Power?),* किन-किन देशों को वीटो पावर प्राप्त हैं (Which countries have the power of veto?), Veto Power कैसे मिलता हैं?, वीटो पॉवर से सम्बन्धित अन्य रोचक तथ्य ( Other Interesting Facts about Veto Power) आदि के बारें में जानने के लिए इस पोस्ट को जरूर पढ़े.

 *What is VETO Power? |* *वीटो पावर क्या हैं? | Veto* Power Full Meaning in Hindi
VETO (वीटो) एक लैटिन शब्द हैं जिसका अर्थ हैं – “मैं निषेध करता हूँ”. संयुक्त राष्ट्र संघ ( United Nations Organization – UNO ) की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य देशो को मिला हुआ विशेषाधिकार ही “VETO Power (वीटो पॉवर)” कहलाता हैं. जिन देशों के पास यह विशेषाधिकार होता हैं वो परिषद् में प्रस्तावित किसी भी प्रस्ताव को रोक सकते हैं या उसे नकार सकते हैं. भले ही उसके पक्ष में कितने भी वोट पड़े हों. किसी प्रस्ताव को पारित करने के लिए परिषद् के सारे स्थायी सदस्यों का वोट और 4 अस्थाई सदस्यों का वोट मिलना जरूरी होता हैं. सुरक्षा परिषद् के पाँच स्थायी सदस्य जिन्हें “Veto Power” प्राप्त हैं वे देश इस प्रकार हैं –

Veto Power Countries – अमेरिका ( America ), रूस ( Russia ), ब्रिटेन ( United Kingdom – UK ), फ्रांस ( France ) और चीन ( China ).

 *वीटो पॉवर कैसे मिलता हैं? |* *Veto Power Kaise Milta Hai*
वीटो पॉवर उन देशों को नही मिलता हैं जो माँगते हैं, यह उन देशों को मिलता हैं जो इसके क़ाबिल हैं. भारत या कोई अन्य देश तभी वीटो पॉवर पा सकता हैं जब सुरक्षा परिषद् के सारे स्थाई सदस्यों का सकारात्मक मतदान प्राप्त हो और अस्थाई सदस्यों का दो-तिहाई (2/3) सकारात्मक मतदान प्राप्त हो.

दुसरे विश्व युद्ध के बाद जब भारत स्वतंत्र हुआ तब भारत की औद्योगिक, राजनितिक, आर्थिक और सैन्य वृद्धि को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट यानि वीटो पॉवर देने की पेशकश की गई लेकिन नेहरू जी ने चीन के लोगों के गणतंत्र का हवाला देते हुए वीटो पॉवर लेंते से इनकार कर दिया.

वीटो पॉवर से सम्बन्धित अन्य तथ्य | Other Interesting Facts about Veto Power
संयुक्त राष्ट्र घोषणा पत्र के अनुसार अन्तराष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा को बनाये रखना सुरक्षा परिषद् की मुख्य ज़िम्मेदारी हैं. इस कारणवश एक मुहावरे के रूप में इस “दुनिया का पुलिसमैन” भी कहा गया हैं.
यह संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्य अंग हैं और एक प्रकार से कार्यपालिका हैं.
सुरक्षा परिषद् में कुछ 15 सदस्य होते हैं जिनमे 5 स्थाई सदस्य और 10 अस्थाई सदस्य होते हैं.
सुरक्षा परिषद के प्रत्येक सदस्य का एक वोट होता हैं. प्रक्रिया सम्बन्धी मामलो में निर्णय के लिए 15 में से 9 सदस्यों द्वारा सकारात्मक मतदान आवश्यक होता हैं, जिनमें पाँचों स्थायी सदस्य देशों का सकारात्मक मतदान आवश्यक होता हैं.
पाँचों स्थायी सदस्य देशों की सहमति महान शक्तियों की आम सहमति और वीटो (निषेधाधिकार) शक्ति के रूप में जाना जाता हैं. यदि कोई स्थायी सदी किसी निर्णय से सहमत नही हैं, तो वह नकारात्मक मतदान करके अपने वीटो के अधिकार का उपयोग कर सकता हैं. इस दशा में 15 में 14 सदस्य देशों के समर्थन के बावजूद प्रस्ताव स्वीकृत नहीं होते हैं.
यदि कोई स्थायी सदस्य किसी निर्णय का समर्थन नही करता और उस निर्णय को रोकना भी नहीं चाहता हैं तो वह मतदान की प्रक्रिया के दौरान अनुपस्थित रह सकता हैं.
अमेरिका ने वीटो का उपयोग सर्वप्रथम मार्च 1971 ई. में रोडेशिया के प्रश्न पर किया था.
चीन ने सर्वप्रथम वीटो का प्रयोग अगस्त 1972 ई. में बांग्लादेश के विश्व संस्था में प्रवेश के प्रश्न पर किया था.
चीन ने वीटो पॉवर का उपयोग लगभग 12 बार किया हैं जिसमें 4-5 बार भारत के विरोध में किया हैं.
भारत को अब तक वीटो पॉवर क्यों नही मिला?
भारत पिछले कई सालो से सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता यानि वीटो पॉवर के लिए प्रयास कर रहा हैं लेकिन अब तक सफ़लता नही मिली हैं. इसके ये कुछ मुख्य कारण हैं.

सुरक्षा परिषद् के पांच स्थायी सदस्य (जिनके पास वीटो पॉवर हैं) अपनी शक्ति को किसी अन्य देश के साथ साझा नही करना चाहते हैं इसलिए भारत को वीटो पॉवर मिलने में दिक्कत हैं.
चीन नही चाहता कि भारत को वीटो पॉवर मिले.
भारत सुरक्षा परिषद् में एक नही  चार सीटों की मांग करता हैं, भारत यह मांग जी-4 सदस्य देशों ( जापान, जर्मनी, भारत और ब्राजील ) के लिए करता हैं. इसकी वजह से भी भारत को वीटो मिलने में देरी हो रही हैं

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✅1. *प्रधानमंत्री मोदी ने दांडी में ‘नमक सत्याग्रह स्मारक’ का उद्घाटन किया*

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 जनवरी 2019 को गुजरात के सूरत और दांडी का दौरा किया. यहां उन्होंने सूरत हवाईअड्डे पर टर्मिनल भवन के विस्तार परियोजना और एक अस्पताल की आधाशिला रखी. इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने दांडी में राष्ट्रीय नमक सत्याग्रह स्मारक राष्ट्र को समर्पित किया.

यहां 14 नमक बनाने वाले पेन रखे गये हैं. साथ ही खारा पानी भी उपलब्ध कराया गया है. पर्यटक जब खारा पानी पेन में डालेंगे, तब पेन के अंदर लगी हुई मशीन पानी का वाष्पीकरण कर देगी और पेन में नमक बन जाएगा. इसके अतिरिक्त 41 सोलर वृक्ष प्रतिदिन 144 किलोवाट बिजली उत्पन्न करेंगे. इनका इस्तेमाल स्मारक में बिजली की आपूर्ति के लिए किया जाएगा.


✅2. *कैद में रखे हाथियों का पहला सर्वेक्षण जारी*

भारत में कैद में रखे हाथियों के पहले सर्वे के अनुसार, देश में कुल 2,454 हाथी कैद में हैं जिनमें से 58% असम (905) और केरल (518) में हैं. देशभर में बंधक बनाकर रखे गए हाथियों में आधे से ज्यादा सिर्फ केरल और असम में हैं.

भारत में हाथियों को बंधक बनाकर रखे जाने के चौंकाने वाले आंकड़े सामने है. बतौर सर्वे, 2454 हाथियों में एक-तिहाई गैर-कानूनी रूप से निजी कैद में हैं. यह जानकारी पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे में सामने आई है.


✅3. *उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने विश्व के सबसे लंबे ‘गंगा एक्सप्रेस-वे’ के निर्माण हेतु मंजूरी दी*

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में 29 जनवरी 2019 को प्रयागराज में चल रहे कुंभ के दौरान कैबिनेट बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत 600 किलोमीटर लंबे ‘गंगा एक्सप्रेस-वे’ बनाने के फैसले पर मुहर लगाई गई है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि यह दुनिया का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे होगा. प्रयागराज को पश्चिमी यूपी से जोड़ने के लिए एक्सप्रेस-वे बनाने का फैसला लिया गया है. इसको बनाने में यूपी सरकार तकरीबन 36 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी.


✅4. *चित्रा मुद्गल सहित 24 लेखक साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित*

हिन्दी की प्रसिद्ध लेखिका चित्रा मुदगल सहित 24 लेखकों को 29 जनवरी 2019 को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया. अकादमी के अध्यक्ष एवं कन्नड़ के प्रख्यात नाटककार चंद्रशेखर क्म्बार ने इन लेखकों को वर्ष 2018 के लिए यह प्रस्कार प्रदान किये.

पुरस्कार में एक लाख रुपये की राशि, प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिह्न एवं शॉल शामिल हैं. अंग्रेजी के लेखक अनीस सलीम और ओडिया लेखक दाशरथी दास की गैर-मौजूदगी में यह पुरस्कार उनके प्रतिनिधियों ने प्राप्त किये.


✅5. *पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फ़र्नांडिस का निधन*

भारत के पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का 29 जनवरी 2019 को नई दिल्ली के मैक्स अस्पताल में निधन हो गया. वे 88 वर्ष के थे. दिल्ली में उन्होंने सुबह 7 बजे आखिरी सांस ली. जॉर्ज फर्नांडिस लंबे समय से बीमार चल रहे थे, वो अल्जाइमर नाम की बीमारी से परेशान थे.

वाजपेयी सरकार के दौरान जॉर्ज फर्नांडिस देश के रक्षामंत्री रहे थे. अंतिम बार वे अगस्त 2009 से जुलाई 2010 के बीच तक राज्यसभा सांसद रहे थे. फर्नांडिस ने भारत सरकार में रक्षा मंत्रालय, उद्योग मंत्रालय जैसे कई अहम विभाग संभाले थे.


✅6. *WHO ने साल 2019 में सेहत के 10 संभावित खतरों की सूची जारी की*

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में 10 उन बीमारियों/खतरों की सूची जारी की है जो 2019 में दुनिया को संभावित स्वास्थ्य संकट में डाल सकती हैं. डब्ल्यूएचओ द्वारा सुझाए गये इन 10 खतरों के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन 2019 में नई पंच वर्षीय रणनीतिक योजना की शुरुआत करने जा रहा है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी 10 स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं डब्ल्यूएचओ तथा अन्य स्वास्थ्य सहयोगियों के लिये चुनौती साबित हो सकती हैं. डब्ल्यूएचओ का कहना है कि यदि इन संभावित खतरों से नहीं निपटा गया तो स्वास्थ्य संबंधित गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं.


✅7. *पद्म पुरस्कार 2019 घोषित: जानें गंभीर, कादर खान समेत पूरी सूची*

देश के दूसरे सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म पुरस्कारों की घोषणा 25 जनवरी 2019 को कर दी गई. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कुल 112 व्यक्तियों को पद्म पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की. इस बार 4 को पद्म विभूषण, 14 को पद्मभूषण और 94 को पद्मश्री सम्‍मान दिया जाएगा.                                                                                                                                                                                                                                         इस पुरस्कार से सम्मानित किये जाने वाले लोग देशभर से और समाज के सभी वर्गों से है. गृह मंत्रालय की ओर से दी गई आधिकारिक सूचना के मुताबिक स्व. अभिनेता कादर खान, स्व. कुलदीप नैय्यर, क्रिकेटर गौतम गंभीर, वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का, वैज्ञानिक नंबी नारायण, पर्वतरोही बछेंद्री पाल और दक्षिण के अभिनेता मोहन लाल सहित 112 हस्तियों को पद्म अवार्ड्स के लिए चुना गया है.


✅8. *ऑस्ट्रेलियन ओपन 2019: जोकोविच ने रिकॉर्ड सातवीं बार ख़िताब जीता*

ऑस्ट्रेलियन ओपन 2019 का 27 जनवरी 2019 को समापन हुआ. ख़िताबी मुकाबले मेलबर्न में खेले गये. यह साल में खेले जाने वाले चार ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिताओं में से एक है. इसमें नोवाक जोकोविच ने इतिहास रचते हुए रिकॉर्ड सातवीं बार ख़िताब जीता है.

विश्व के नंबर एक खिलाड़ी नोवाक जोकोविच ने ऑस्ट्रेलियन ओपन टेनिस चैंपियनशिप में एकतरफा फाइनल मैच के दूसरे क्रम के राफेल नडाल को सीधे सेटों में 6-3, 6-2, 6-3 से हराया. वे इसी के साथ रिकॉर्ड सात बार ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब जीतने वाले *दुनिया के पहले खिलाड़ी* बन गए.


✅9. *प्रणब मुखर्जी, नानजी देशमुख तथा भूपेन हज़ारिका को भारत रत्न*

राष्ट्रपति भवन की ओर से 25 जनवरी 2019 को जारी जानकारी में घोषणा की गई कि वर्ष 2019 में तीन हस्तियों को भारत रत्न सम्मान दिया जायेगा. इस घोषणा में नानाजी देशमुख, भूपेन हज़ारिका और प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा की गई.

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, मशहूर संगीतकार भूपेन हजारिका और आरएसएस से जुड़े नेता एवं समाजसेवी नानाजी देशमुख को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जाएगा. राष्ट्रपति भवन से जारी बयान में कहा गया कि नानाजी देशमुख एवं भूपेन हजारिका को यह सम्मान मरणोपरांत प्रदान किया जाएगा.


✅10. *चेन्नई में सौर ऊर्जा और जल उपचार प्रौद्योगिकी मिशन केन्द्रों का शुभारंभ किया गया*

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्‍वी विज्ञान, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने 25 जनवरी 2019 को चेन्‍नई के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान मद्रास (आईआईटीएम) में स्थित विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र द्वारा स्‍थापित तीन प्रमुख केंद्रों का शुभारंभ किया.

इन तीनों में पहले डीएसटी- आईआईटीएम सोलर एनर्जी हारनेसिंग सेंटर की स्‍थापना की गई है. इस केंद्र में सिलिकॉन सोलर सेल जैसी अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास गतिविधियों की विस्‍तृत श्रृंखला पर ध्‍यान केंद्रित किया जायेगा.


✅11. *वेनेज़ुएला संकट: विश्व में उभरती नई समस्या*

वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो द्वारा हाल ही में अमेरिका के साथ सभी राजनीतिक संबंध समाप्त किये जाने की घोषणा की गई. इस घोषणा के बाद वेनेज़ुएला का राजनीतिक संकट एक बार फिर चर्चा में आ गया है.

वेनेज़ुएला में जनता द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन किये जा रहे हैं. इसमें बहुत से लोगों के मारे जाने और आगजनी की सैंकड़ों घटनाएं सामने आ चुकी हैं. वेनेज़ुएला लंबे समय से आर्थिक संकट झेल रहा था लेकिन अब वह राजनीतिक संकट में भी फंस गया है. वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन से उपजे राजनीतिक संकट में अमेरिका और रूस के अलावा और भी कई देश कूद पड़े हैं जिससे यह एक वैश्विक रूप लेता नज़र आ रहा है.


✅12. *इसरो ने छात्रों द्वारा तैयार ‘कलामसैट’ और इमेजिंग सैटेलाईट ‘माइक्रोसैट आर’ लॉन्च किया*

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 24 जनवरी 2019 को विश्व के सबसे छोटे सैटेलाइट ‘कलामसैट’ को लॉन्च किया. पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल PSLV C-44 के द्वारा कलामसैट और माइक्रो सैट-आर को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया.

कलामसैट की खासियत यह है कि इसे छात्रों ने विकसित किया है. इसके अलावा, माइक्रोसैट-आर की खासियत है कि यह अन्तरिक्ष से पृथ्वी की तस्वीरें लेने में सक्षम है. इसरो की ओर से जारी मिशन की जानकारी के अनुसार, श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से PSLV C-44 के लॉन्चिंग की उल्टी सुचारु रूप से आरंभ की गई. यह इसरो के पीएसएलवी व्हीकल की 46वीं उड़ान है.


✅13. *प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस संग्रहालय का उद्घाटन किया*

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 122वीं जयंती के अवसर पर 23 जनवरी 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी दिल्ली में लालकिले में सुभाष चंद्र बोस संग्रहालय का उद्घाटन किया. इस संग्रहालय में सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज से जुड़ीं चीजों को प्रदर्शित किया गया है. इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सुभाष चंद्र बोस के पोते भी मौजूद थे.                                                                                                        इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने याद-ए-जलियां संग्रहालय (जलियांवाला बाग और प्रथम विश्वयुद्ध पर संग्रहालय) और 1857 (प्रथम स्वतंत्रता संग्राम) पर संग्रहालय और भारतीय कला पर दृश्यकला संग्रहालय का भी उद्घाटन किया.


✅14. *राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ प्रदान किये*

राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 22 जनवरी 2019 को राष्‍ट्रपति भवन में ‘प्रधानमंत्री राष्‍ट्रीय बाल पुरस्‍कार- 2019’ प्रदान किये. ये पुरस्‍कार 26 चयनित विजेताओं को प्रदान किये गये.

इन पुरस्कारों में नवाचार, शैक्षिक, खेल, कला और संस्‍कृति, समाज सेवा और बहादुरी श्रेणी के तहत राष्‍ट्रीय बाल पुरस्‍कार (जिसे अब‍ बाल शक्ति पुरस्‍कार का नाम दिया गया है) के लिए एक संयुक्‍त पुरस्‍कार भी शामिल है. दो व्‍यक्तियों और तीन संस्‍थानों को भी राष्‍ट्रीय बाल कल्‍याण पुरस्‍कार श्रेणी (अब बाल कल्‍याण पुरस्‍कार का नाम दिया गया है) के तहत पुरस्‍कार दिये गए.


✅15. *विराट कोहली ICC अवार्ड्स में सर्वश्रेष्ठ वनडे और टेस्ट खिलाड़ी के साथ वर्ष 2018 के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर घोषित*

क्रिकेट की शीर्ष संस्था इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने 22 जनवरी 2019 को वर्ष 2018 के पुरस्कारों की घोषणा करते हुए भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली को तीन सर्वश्रेष्ठ पुरस्कारों से नवाजा है. इसके अतिरिक्त आईसीसी ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर टीम ऑफ़ द इयर भी घोषित की है.

विराट कोहली को आईसीसी अवॉर्ड्स में क्रिकेटर ऑफ द ईयर (सर गारफील्ड सोबर्स ट्रॉफी), आईसीसी टेस्ट क्रिकेटर ऑफ द ईयर और आईसीसी वनडे क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना गया. विराट कोहली इसके अलावा आईसीसी टेस्ट टीम ऑफ द ईयर और आईसीसी वनडे टीम ऑफ द ईयर में चुने गए और दोनों टीमों के कप्तान नियुक्त किए गए हैं.


✅16. *विश्व आर्थिक मंच 2019 दावोस में आयोजित*

इस आयोजन में दुनिया के बड़े-बड़े कारोबरियों अर्थशास्त्र, अंतरराष्ट्रीय संगठनों से लेकर दुनिया के दिग्गज नेता शामिल हुए हैं. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ पहली बार इस सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं, वैसे वो पिछले 17 साल से लगातार दावोस विश्व आर्थिक सम्मेलन में शामिल होते रहे हैं.

दावोस में मुख्य सत्र के बाहर ओपन फोरम में जेन गुडॉल भी हिस्सा लेंगी. जेन गुडॉल मशहूर जंतु वैज्ञानिक हैं. चिम्पांजी को लेकर उनका शोधकार्य बहुत महत्वपूर्ण रहा है.


✅17. *भारत के 1% लोगों के पास 50% आबादी के बराबर संपत्ति: ऑक्सफैम रिपोर्ट*

ऑक्सफैम (Oxfam Report) द्वारा 21 जनवरी 2019 को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अरबपतियों की संपत्ति में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है. ऑक्सफैम रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अरबपतियों की संपत्ति में  वर्ष 2018 में प्रतिदिन 2,200 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है. इस दौरान, देश के शीर्ष एक प्रतिशत अमीरों की संपत्ति में 39 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि 50 प्रतिशत गरीब आबादी की संपत्ति में महज तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

ऑक्सफैम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि विश्व भर के अरबपतियों की संपत्ति में पिछले वर्ष 12 प्रतिशत (2.5 अरब डॉलर प्रतिदिन) की वृद्धि दर्ज की गई. इसके विपरीत दुनिया की आधी आबादी, जिन्हें गरीब माना जाता है, की दौलत 11% घट गई है.


✅18. *वाराणसी में प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन*

वासी भारतीय दिवस का 15 वां संस्करण 21 जनवरी 2019 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में शुरू हो गया है. प्रवासी भारतीय दिवस (Pravasi Bhartiya Divas 2019) के लिए इस बार वाराणसी में बेहद खास आयोजन किया गया है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज समेत अन्य बड़े नेताओं की मौजूदगी में प्रवासी भारतीय दिवस समारोह की शुरुआत हुई. प्रवासी भारतीय दिवस समारोह वाराणसी में 21 से 23 जनवरी तक चलेगा.


✅19. *इसरो ने सीमा सुरक्षा के लिए विशेष उपग्रह लॉन्च करने की घोषणा की*

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा हाल ही में यह घोषणा की गई कि वह गृह मंत्रालय के लिए एक विशिष्ट उपग्रह प्रक्षेपित करेगा. उपग्रह का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं अन्य देशों से सटी भारत की सीमा को और मजबूत बनाना है. गृह मंत्रालय द्वारा एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है.

गृह मंत्रालय द्वारा बताया गया कि यह कदम सीमा प्रबंधन के सुधार में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग को लेकर एक कार्य बल द्वारा की गई सिफारिशों का हिस्सा है. गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है.


✅20. *विश्व का पहला मानवाधिकार को समर्पित टीवी चैनल लंदन में आरंभ*
                                                                                                             इंटरनेशनल ऑब्जर्वेटरी ऑफ़ ह्यूमन राइट्स (IOHR) द्वारा विश्व में पहली बार मानवाधिकार को समर्पित टीवी चैनल आरंभ किया गया है. यह चैनल लंदन स्थित ऑफिस से आरंभ किया गया है. मानवाधिकार को समर्पित यह टीवी चैनल वेब आधारित होगा लेकिन यह यूरोप, लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व समेत 20 देशों के लोगों के लिए मानवाधिकार से सम्बंधित मुद्दों पर कार्यक्रम का प्रसारण करेगा.

IOHR द्वारा आरंभ किये गये इस चैनल के ब्रॉडकास्ट को netgem.tv प्लेटफार्म पर द्वारा देखा जा सकता है. फिलहाल इस चैनल पर अंग्रेजी में कार्यक्रम प्रसारित किये जा रहे हैं. लेकिन, आगे चलकर फारसी, तुर्की, अरबी तथा रूसी भाषा में भी कार्यक्रम प्रसारित किये जा सकते हैं.


✅21. *सरकार ने 2015-18 के गांधी शांति पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की*

केंद्र सरकार ने 16 जनवरी 2019 को पिछले चार वर्षों के लिए गांधी शांति पुरस्कारों की घोषणा की है. केंद्र सरकार द्वारा 2015 से 2018 तक के गांधी शांति पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा की गई.

इस पुरस्कार से अंतिम बार वर्ष 2014 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को सम्मानित किया गया था. हालांकि, सरकार ने 2014 के बाद से इस पुरस्कार से किसी को सम्मानित नहीं किया था. इन पुरस्कारों के विजेताओं का फैसला एक ज्यूरी ने किया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत के चीफ जस्टिस, जस्टिस रंजन गोगोई, लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, विपक्ष नेता मल्लिकार्जुन खडग़े तथा लालकृष्ण आडवाणी शामिल थे.


✅22. *चीन ने चांद पर कपास उगाने में सफलता हासिल की*

चीन द्वारा चांद पर भेजे गये रोवर चांग ई-4 द्वारा कपास के बीज अंकुरित करने में सफलता हासिल की गई है. चीन का दावा है कि उसने रोवर चांग ई-4 पर लगाए प्रयोगात्मक बॉक्स में यह सफल प्रयोग किया है. गौरतलब है कि यह पहला मौका है जब मनुष्य ने चांद पर कोई पौधा उगाया है. चीन के वैज्ञानिकों द्वारा 15 जनवरी 2019 को यह जानकारी सार्वजनिक की गई. चीन को अब चांद पर आलू उपजाने की भी उम्मीद है.

चोंगकिंग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने वायु, जल और मिट्टी युक्त 18 सेंटीमीटर का एक डिब्बा रोवर की सहायता से चांद पर भेजा था. इसके भीतर कपास, आलू और सरसों प्रजाति के एक-एक पौधे के बीज के साथ-साथ फ्रूट फ्लाई के अंडे और यीस्ट भेजे गए थे. प्रयोग की अगुवाई करने वाले चीन के वैज्ञानिक शाइ गेंगशिन ने कहा, “यह पहला मौका है, जब मानव ने चंद्रमा की सतह पर जीवविज्ञान में पौधों के विकास के लिए प्रयोग किए.”


✅23. *प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘फिलिप कोटलर’ पुरस्कार से सम्मानित*

पुरस्कार के प्रशस्तिपत्र में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का चयन ‘‘देश को उत्कृष्ट नेतृत्व’’ प्रदान करने के लिये किया गया है. इसके अनुसार, अथक ऊर्जा के साथ भारत के लिये उनकी निःस्वार्थ सेवा की वजह से देश ने बेहतरीन आर्थिक, सामाजिक और प्रौद्योगिकीय विकास किया है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की पहचान अब नवाचार और मूल्यवर्धित विनिर्माण (मेक इन इंडिया) के साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी, लेखांकन एवं वित्त जैसे पेशेवर सेवाओं के केन्द्र के रूप में उभरी है.


✅24. *सिक्किम के मुख्यमंत्री ने 'एक परिवार, एक नौकरी' योजना का शुभारंभ किया*

सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने 12 जनवरी 2019 को 'एक परिवार, एक नौकरी' योजना का शुभारंभ किया. इस योजना की घोषणा पवन कुमार चामलिंग ने वर्ष 2018 में राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान की थी.

एक परिवार-एक नौकरी योजना के तहत नौकरी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी कार्मिक विभाग को दी गई है. उनका दावा है कि ऐसी योजना लागू करने वाला सिक्किम *देश का पहला राज्य* बन गया है.


✅25. *गुजरात आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10% आरक्षण देने वाला पहला राज्य बना*

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी द्वारा शिक्षा और रोज़गार में गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण को 14 जनवरी से लागू करने का निर्णय लिया गया है. केंद्र सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी है. अधिसूचना जारी होने के एक दिन बाद ही गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने यह घोषणा की.

शैक्षणिक संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से पिछड़ों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा. यह आरक्षण अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग कोटे के अतिरिक्त दिया जाएगा. पहले से घोषित उन भर्तियों में भी यह आरक्षण लागू होगा, जिनकी अभी कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है.


✅26. *मिशन गगनयान दिसम्बर 2021 में लांच किया जायेगा: इसरो*

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मिशन गगनयान को दिसम्बर 2021 में लांच करने की घोषणा की. इसरो प्रमुख के. सिवन ने 11 जनवरी 2019 को बेंगलुरु में प्रेस कॉन्‍फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि भारत दिसंबर 2021 में अंतरिक्ष में मनुष्य को भेजने का लक्ष्य रखा है.इसरो प्रमुख ने बताया कि दो मानवरहित स्पेस मिशन का लक्ष्य दिसंबर 2020 और जुलाई 2021 रखा गया है. कैबिनेट ने भारतीय गगनयान मानव मिशन के लिए 10 हजार करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दे चुकी है. इस अभियान के तहत तीन एस्ट्रोनॉट सात दिन तक अंतरिक्ष में रह सकेंगे.


✅27. *मैरी कॉम दुनिया की नंबर एक महिला मुक्केबाज़ बनीं: एआईबीए*

भारत की प्रसिद्ध महिला मुक्काबाज मैरी कॉम दुनिया की नंबर एक महिला मुक्केबाज़ (48 किलोग्राम वर्ग में) बन गई हैं. अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज़ी संघ (एआईबीए) की ओर से जारी ताज़ा वरीयता सूची में मैरी कॉम को पहले-नबर पर रखा गया है.

एआईएबीए की वरीयता सूची में मैरीकॉम को अपने वर्ग में 1,700 प्वाइंट मिले हैं. छठी बार महिला मुक्केबाज़ी की विश्व चैंपियनशिप में मिली जीत ने उन्हें यह उपलब्धि दिलाई है.


✅28. *आईआईटी मद्रास ने प्रयोगशाला में ‘स्पेस फ्यूल’ तैयार किया*

आईआईटी मद्रास के शोधकर्ताओं द्वारा प्रयोगशाला में स्पेस फ्यूल तैयार किये जाने में सफलता हासिल की है. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह फ्यूल अंतरग्रहीय परिस्थितियों को सिमुलेट करके प्रयोगशाला में बनाया गया है. विज्ञान पत्रिका प्रोसीडिंग्स ऑफ़ नेशनल अकैडमी ऑफ़ साइंसेज (PNAS) द्वारा हाल ही में इस शोध को प्रकाशित किया गया है.

शोधकर्ताओं द्वारा यह ईंधन भारत के लिए जैविक इंधन के एक स्वच्छ तथा सतत विकल्प के रूप में पेश किया गया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस शोध से वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड को अगली पीढ़ी के उर्जा स्त्रोत में परिवर्तित किया जा सकता है. यह भी संभव है कि इससे ग्रीन हाउस गैस तथा ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी.


✅29. *नासा के सैटेलाईट TESS ने पृथ्वी से तीन गुना बड़ा ग्रह खोजा*

नासा के सैटेलाईट ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS) ने सौरमंडल के बाहर एक नए ग्रह की खोज की है. TESS द्वारा खोजा गया यह तीसरा ग्रह है. वैज्ञानिकों का मानना है कि धरती से बाहर जीवन तलाशने की संभावनाओं की दिशा में यह एक बड़ी उपलब्धि है.

वैज्ञानिकों द्वारा जारी जानकारी के अनुसार घने वायुमंडल के चलते इस ग्रह पर जीवन की संभावना हो सकती है. इस नए ग्रह की खोज करने वाली टीम की अगुवाई मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रॉफिजिक्स एंड स्पेस रिसर्च की प्रोफेसर डायना ड्रैगॉमिर ने की है.


✅30. *LPU में ‘टाईम कैप्सूल’ को अगले 100 वर्षों के लिए जमीन में दबाया गया*

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU), जालंधर में आयोजित 106वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस में इज़राइल के नोबल पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिक एवराम हेर्शको और अमेरिका के वैज्ञानिक एफ. डंकन एम. हॉल्डाने द्वारा 04 जनवरी 2019 को वर्तमान टेक्नोलॉजी और भारत के वैज्ञानिक कौशल का प्रतिनिधित्व करने वाली वस्तुओं के साथ एक टाईम कैप्सूल को जमीन में दबाया गया.

इस टाईम कैप्सूल में 100 ऐसी वस्तुओं को शामिल किया गया है, जो भारत में अनुभव की जाने वाली आधुनिक टेक्नोलॉजी का प्रतिनिधित्व करते हैं. यह कैप्सूल धरती में 100 वर्ष तक दबा रहेगा. इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को वर्तमान की तकनीक के बारे में अवगत कराना है.
[25/02, 11:35 AM] ‪+91 94151 51128‬: *देश में अल्पसंख्यक कौन हैं* इसकी परिभाषा और आधार फिर से तय करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 11 फरवरी को सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को निर्देश दिया है कि वह तीन महीने के भीतर अल्पसंख्यक की परिभाषा तय करे।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के TMA पाई मामले में दिये गए संविधान पीठ के फैसले को आधार बनाकर मांग की गई थी कि अल्पसंख्यकों की पहचान राज्य स्तर पर की जाए, न कि राष्ट्रीय स्तर पर क्योंकि कई राज्यों में जो वर्ग बहुसंख्यक हैं उन्हें अल्पसंख्यक का लाभ मिल रहा है।

याचिका में अल्पसंख्यकों को 'अल्पसंख्यक संरक्षण' दिये जाने तथा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम की धारा 2(c) को रद्द किये जाने की मांग की गई है क्योंकि यह धारा मनमानी, अतार्किक और अनुच्छेद 14, 15 तथा 21 का उल्लंघन करती है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि इस धारा में केंद्र सरकार को किसी भी समुदाय को अल्पसंख्यक घोषित करने के असीमित और मनमाने अधिकार दिये गए हैं।

याचिका में कहा गया है कि हिंदू जो राष्ट्रव्यापी आँकड़ों के अनुसार एक बहुसंख्यक समुदाय है, वह पूर्वोत्तर के कई राज्यों और जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यक है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि हिंदू समुदाय उन लाभों से वंचित है जो कि इन राज्यों में अल्पसंख्यक समुदायों के लिये मौजूद हैं।

अल्पसंख्यक पैनल को इस संदर्भ में ‘अल्पसंख्यक' शब्द की परिभाषा पर पुन: विचार करना चाहिये।

1947 में देश के विभाजन के दौरान मुस्लिम समुदाय के लगभग सभी लोग पाकिस्तान चले गए थे और भारत में इनकी संख्या बहुत कम रह गई।

हमारे संविधान निर्माताओं के मस्तिष्क में यह आशंका थी कि ऐसा न हो कि हिन्दुओं की बहुसंख्यक आबादी के कारण यहाँ केवल हिन्दुओं की ही सरकार बने और वह अल्पसंख्यकों के त्योहारों या उनके रीति-रिवाज़ का पालन करने पर कोई रोक लगा दे।

यही वज़ह है कि अनुच्छेद 29 और 30 में कहा गया कि भारत में जो अल्पसंख्यक हैं उनको अपने रीति-रिवाज़ तथा धर्म का पालन करने का अधिकार होगा।

इसके अलावा संविधान में और कुछ नहीं कहा गया।

 *अल्पसंख्यक कौन है?*

संयुक्त राष्ट्र की परिभाषा के अनुसार, ‘Any group of community which is economically, politically non-dominant and inferior in population, अर्थात् ऐसा समुदाय जिसका सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक रूप से कोई प्रभाव न हो और जिसकी आबादी नगण्य हो, उसे अल्पसंख्यक कहा जाएगा।

अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत अल्पसंख्यक ऐसे समूह हैं जिनके पास विशिष्ट और स्थिर जातीय (Stable Ethnic), धार्मिक और भाषायी विशेषताएँ हैं।

 *भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29, 30, 350A तथा 350B में ‘अल्पसंख्यक’ शब्द का प्रयोग किया गया है* लेकिन इसकी परिभाषा कहीं नहीं दी गई है।

अनुच्छेद 29 में ‘अल्पसंख्यक’ शब्द का प्रयोग किया गया है जिसमें कहा गया है कि भारत के राज्य क्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार होगा।

अनुच्छेद 30 में बताया गया है कि धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी रुचि की शिक्षा, संस्थानों की स्थापना और प्रशासन का अधिकार होगा।

 *अनुच्छेद 350 A और 350 B केवल भाषायी अल्पसंख्यकों से संबंधित हैं।*

1992 के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम की धारा 2(c) के तहत 23 अक्तूबर, 1993 को सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में पाँच समुदायों मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, पारसी तथा बौद्ध को अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में मान्यता दी गई।

 *2014 में जैन समुदाय को भी अल्पसंख्यक की श्रेणी में शामिल किया गया।*

 *गुजरात सरकार ने राज्य में जैन समुदाय को अलग से अल्पसंख्यक घोषित किया है।.*

 *TMA पाई फाउंडेशन बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया का मामला*

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के 11 जजों की संवैधानिक बेंच ने कहा है कि राज्य कानून के संबंध में धार्मिक या भाषायी अल्पसंख्यक का निर्धारण करने वाली इकाई केवल राज्य हो सकती है।

यहाँ तक ​​कि अल्पसंख्यक का निर्धारण करने में एक केंद्रीय कानून के लिये भी ईकाई का आधार राज्य होगा न कि संपूर्ण भारत।

इस प्रकार, धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यक, जिन्हें अनुच्छेद 30 में बराबरी का दर्जा दिया गया है, को राज्य स्तर पर निर्धारित किया जाना चाहिये।

 *अल्पसंख्यकों के निर्धारण का एक समान राष्ट्रीय तरीका क्यों नहीं है?*

भारत में समुदायों का असमान वितरण किसी समुदाय को राष्ट्रीय रूप से धार्मिक अल्पसंख्यक घोषित करने में परस्पर विरोधी स्थिति पैदा करता है, जो कुछ राज्यों में बहुसंख्यक हो सकता है।

नागरिकों का लगातार हो रहा प्रवासन जनसांख्यिकी को प्रभावित करता है।

धार्मिक या भाषायी समुदाय की संरचना में बदलाव भी एक बड़ा कारण है। जिसके कारण किसी भी स्थिर नीति का कारगर होना मुश्किल है।

1500 से अधिक क्षेत्रीय भाषाओं वाले इस देश में भाषायी अल्पसंख्यकों का पदनाम (Designation) चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

हमें TMA पाई मामले में बताए गए स्रोत और क्षेत्रीय कानून के संबंध में अल्पसंख्यक का दर्जा निर्धारित करना चाहिये।

 *मापदंड तय किये जाने की ज़रुरत*

किसी समुदाय को राज्य स्तर पर अल्पसंख्यक घोषित करने में जो मुख्य समस्या यह है कि इस शब्द की परिभाषा कहीं नहीं बताई गई है, दूसरा यह कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम में भी इसकी कोई परिभाषा नहीं बताई गई है तथा तीसरा यह है कि सरकार ने जो अधिसूचना जारी की है उसका आधार क्या है यह निर्धारित नहीं है।

अगर हम मान लें कि राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या को आधार माना गया है तो ऐसा राज्य स्तर पर क्यों नहीं हो सकता?

याचिका में धारा 2(c) तथा 23 अक्तूबर,1993 को जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई है तथा इसे संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया गया है।

 *यह सही है कि अल्पसंख्यकों को संरक्षण मिलना चाहिये।*

 यह भी सही है कि देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था, काफी हिंसा हुई थी इसके बावजूद संविधान निर्माताओं ने यह दूरदर्शी फैसला लिया कि हिंदुस्तान एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होगा और सबको बराबर का हक़ दिया जाएगा।

लेकिन अल्पसंख्यक कौन हैं इसकी पहचान करना पहली शर्त होनी चाहिये।

यह विडंबनापूर्ण स्थिति है कि कहीं पर कोई समुदाय जो 96, 98 प्रतिशत है वह अल्पसंख्यक है और वहीँ किसी राज्य में 2 प्रतिशत आबादी वाले लोग बहुसंख्यक हैं और अल्पसंख्यक को मिलने वाले लाभ से वंचित हैं।

यह गैर-बराबरी है। इसे एड्रेस किये जाने की ज़रूरत है।
आने वाले समय में हिंदुस्तान में मुसलमानों की आबादी दुनिया के सभी देशों से अधिक होगी।

 *ऐसी स्थिति में मुसलमान अल्पसंख्यक किस आधार पर होंगे?*

अल्पसंख्यक स्थिति का एक मानदंड तय होना चाहिये जिसमें जनसंख्या के अलावा अन्य कारकों पर भी विचार किया जाना चाहिये।

‘ **अल्पसंख्यक’ शब्द को परिभाषित किये जाने की आवश्यकता क्यों?*
*
संविधान में ‘अल्पसंख्यक’ शब्द की परिभाषा कहीं नहीं दी गई है।

 *अल्पसंख्यक कौन होगा?*

यह राष्ट्रीय स्तर पर तय होगा या राज्य स्तर पर इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है।

1993 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का गठन किया गया उस समय भी ‘अल्पसंख्यक’ शब्द को परिभाषित नहीं किया गया।.

वर्ष 2006 में अल्पसंख्यक मामले मंत्रालय का गठन हुआ तब भी ‘अल्पसंख्यक’ शब्द को परिभाषित नहीं किया गया।

आज़ादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी अल्पसंख्यक कौन हैं, न तो संविधान में परिभाषित किया गया और न ही किसी अन्य कानून में।

मिज़ोरम, मेघालय और नगालैंड ईसाई बहुसंख्यक राज्य हैं और अरुणाचल, गोवा, केरल, मणिपुर, तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल में इनकी आबादी अच्छी खासी है फिर भी उन्हें अल्पसंख्यक माना जाता है।

इसी तरह पंजाब में सिख बहुसंख्यक हैं तथा दिल्ली, चंडीगढ़ और हरियाणा में इनकी पर्याप्त आबादी है फिर भी इन्हें अल्पसंख्यक माना जाता है।

लक्षद्वीप में 96.20% और जम्मू-कश्मीर में 68.30% मुसलमान हैं, जबकि असम (34.20%), पश्चिम बंगाल (27.5%), केरल (26.60%), उत्तर प्रदेश (19.30%) और बिहार (18%) में भी इनकी अच्छी-खासी जनसंख्या है फिर भी इन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा मिला हुआ है और वे इसका लाभ ले रहे हैं।

दूसरी ओर वे समुदाय, जो वास्तविक रूप से अल्पसंख्यक हैं, राज्य स्तर पर अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त न होने के कारण लाभ से वंचित हैं।

लक्षद्वीप में मात्र 2% हिंदू हैं लेकिन वे वहाँ अल्पसंख्यक न होकर बहुसंख्यक हैं और 96% प्रतिशत आबादी वाले मुसलमान अल्पसंख्यक हैं।

उत्तर प्रदेश के अनुसूचित जाति का व्यक्ति राजस्थान में अनुसूचित जाति का नहीं माना जाता। जब प्रदेश बदलने के साथ उस व्यक्ति की SC, ST, OBC स्थिति बदल जाती है तो अल्पसंख्यक की स्थिति को बदलने में क्या समस्या है?

 *निष्कर्ष*

एक लोकतांत्रिक, बहुलवादी राजनीति में अल्पसंख्यक अधिकार आवश्यक हैं।

फ्रैंकलिन रूजवेल्ट ने कहा है कि "कोई भी लोकतंत्र लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकता है जो अल्पसंख्यकों के अधिकारों की मान्यता को अपने अस्तित्व के लिये मौलिक नहीं मानता है"।

संविधान में ‘अल्पसंख्यक’ शब्द को परिभाषित न करने का कारण उस समय की परिस्थितियाँ थीं लेकिन आज की परिस्थिति के अनुसार, इसमें बदलाव आवश्यक है।

भारत लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और लोक कल्याणकारी राज्य है।

अतः सभी वर्गों के लोगों को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार है।

संविधान सभा ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए संविधान में भाषायी और धार्मिक आधार पर अल्पसंख्यकों को संरक्षित करने की बात की लेकिन अल्पसंख्यक को परिभाषित करने से परहेज़ किया।

बदलते परिदृश्य में अब समय आ गया है क़ि राष्ट्रीय स्तर पर नहीं बल्कि प्रादेशिक स्तर पर अल्पसंख्यकों को परिभाषित किया जाए, जिन राज्यों में जिस समुदाय के लोग सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से तथा जनसंख्या के आधार पर अल्पसंख्यक हैं, उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाए।
[25/02, 1*ओ_आई_सी_संयुक्त_राष्ट्र_ *सबसे_बड़ा_संगठन_है
पहली_बार_भारत_कॊ_इनवाइट_किया_गया_है*

मुस्लिम बहुल देशों के शक्तिशाली संगठन
ओआईसी के विदेश मंत्रियों के उद्घाटन पूर्ण सत्र में भारत को आमंत्रित किया गया है।
भारत को ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कॉर्पोरेशन (ओआईसी) की 50वी वर्षगांठ में गेस्ट_ऑफ_ऑनर’ के तौर पर आमंत्रित किया गया है।

ओआईसी के विदेश मंत्रियों की परिषद का 46वां सत्र 1 और 2 मार्च को अबू धाबी में होगा।

गौरतलब है कि ओआईसी आमतौर पर पाकिस्तान का समर्थक है और कश्मीर मुद्दे पर अक्सर ही पाकिस्तान का पक्ष लेता है।

विदेश_मंत्रालय ने बताया है कि संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने सुषमा को गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर आमंत्रित किया है और भारत इस न्योते को स्वीकार कर खुश है।

संयुक्त_राष्ट्र_के_बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा संगठन
‘ ओआईसी ‘ पाकिस्तान और बंगलादेश हैं इसके सदस्य लेकिन भारत नहीं क्यों

इस्लामिक_सहयोग_संस्था – यह एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जिसकी स्थापना 26 सितंबर 1969 में हुई थी।ओआईसी ‘ संयुक्त राष्ट्र ‘ के बाद विश्व की दूसरी सबसे बड़ी संस्था कही जाती है। यह एक धार्मिक संस्था है जो मुस्लिम धर्म से सम्बन्धित है।

 *57 मुस्लिम देश इस संस्था के सदस्य है। जो प्रकार है-*

अफ़्रीकी_देश – अल्जीरिया, बेनिन, बुर्किना फासो, कैमरून, कोमोरोस, चाड, जिबूती(Djibouti), मिस्र, गैबॉन , गाम्बिया , गिनी-बिसाऊ,
गिन्नी, आइवरी कोस्ट , लीबिया, माली ,मॉरिटानिया ,मोरक्को, मोजाम्बिक , नाइजर, नाइजीरिया, सेनेगल, सियार लिओने , सोमालिया ,सूडान , टोगो , ट्यूनीशिया, युगांडा
एशियाई_देश- अफ़ग़ानिस्तान , बहरीन, बांग्लादेश , ब्रूनेई , इंडोनेशिया , ईरान , इराक , जॉर्डन , कजाखस्तान , कुवैट , किर्गिज़स्तान , लेबनान ,मलेशिया , मालदीव , ओमान , पाकिस्तान , फिलिस्तीन , कतर , सऊदी अरब ,, सीरिया तजाकिस्ता , तुर्कमेनिस्तान , संयुक्त अरब अमीरात .
उज़्बेकिस्तान , यमन

यूरोपीय_देश – अल्बानिया , अज़रबाइजान , तुर्की
दक्षिण_अमेरिकी_देश – गुयाना , सूरीनाम

इसके साथ-साथ ‘ रूस ‘ और ‘ थाईलैंड ‘ इस संस्था के पर्यवेक्षक सदस्य है।

 *ओ_आई_सी_का_मूल_उद्देश्य_है*

 इस्लामी सामाजिक और आर्थीक मूल्यों की रक्षा करना।

संस्था के सभी सदस्यो के बीच एकजुटता को बढ़ावा देना

सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक, और राजनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए आपस के सहयोग को बढ़ावा देना।

 अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखना एवं मुस्लिम जगत के हितों की रक्षा करना।

 संयुक्त राष्ट्र की तरह इनकी भी मानवाधिकार की एक मापदंड है और इस संस्था का उद्देश्य है, कि दुनिया में मुसलमानो के मानवाधिकार का हनन न हो।
परन्तु इस संस्था की गौर से समीक्षा की जाए तो इसकी दोहरी मापदंड स्पष्ट छलकती है इसे हम भारत के साथ भी जोर कर देखा सकते है। इंडोनेशिया के बाद विश्व की सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी भारत में रहती है

 जो कि विश्व के किसी भी देश से ज्यादा है इस नजरिये से देखा जाए तो ओआईसी की सदस्यता प्राप्त करने की सबसे मजबूत दावेदारी भारत की है।
लेकिन यह एक बड़ी विडंबना ही की जहाँ विश्व की दूसरी सबसे बरी मुस्लिम आबादी रहती है उस देश के पास इस संस्था की सदस्यता नहीं है

 वही_रूस_एवं_थाईलैंड जहाँ मुस्लिम आबादी न के बराबर है और ये दोनों देश इस संस्था के पर्यवेक्षक सदस्य है।

हालांकि भारत भी इसकी सदस्यता के लिए उत्सुक नहीं है और कोई ख़ास प्रयास भी नहीं करता है।

 2006 में सऊदी शासक ‘ अब्दुल्ला बिन अब्दुल अजीज अल सऊद ‘ ने भारत की तरफ से पर्यवेक्षक सदस्यता की बात ओआईसी में रखने की पेशकश की थी लेकिन पाकिस्तान के विरोध की वजह से यह बात आगे नहीं बढ़ सकी।
अब हालाँकि माहौल ऐसा बन बन गया है कि अगर भारत सदस्यता प्राप्त करने के लिया प्रस्ताव दे तो भारत को समर्थन मिल जाए #_नार्को_टेस्ट_क्या_है_और_कैसे_किया_जाता_है
#_नार्को_टेस्ट_में_व्यक्ति_हमेशा_सच_ही_क्यॊ_बोलता_हे

 नार्को टेस्ट में व्यक्ति को #_ट्रुथ_सीरम_इंजेक्शन के द्वारा दिया जाता है जिससे व्यक्ति स्वाभविक रूप से बोलता है।
नार्को विश्लेषण एक #_फोरेंसिक परीक्षण होता है, जिसे #_जाँच_अधिकारी_मनोवैज्ञानिक_चिकित्सक_और_फोरेंसिक_विशेषज्ञ की उपस्थिति में किया जाता है।

#_भारत में हाल के कुछ वर्षों से ही ये परीक्षण आरंभ हुए हैं, किन्तु बहुत से विकसित देशों में वर्ष 1922 में मुख्यधारा का भाग बन गए थे,

 #_जब_राबर्ट_हाउस_नामक_टेक्सास_के_डॉक्टर ने स्कोपोलामिन नामक ड्रग का दो कैदियों पर प्रयोग किया था।

#_एमोबार्बिटल_नार्को_विशलेषण शब्द नार्क से लिया गया है, जिसका अर्थ है नार्कोटिक।
#_हॉर्सले_ने_पहली बार नार्को शब्द का प्रयोग किया था।

 #_नार्को_परीक्षण_करने_के_लिए सोडियम पेंटोथॉल, सोडियम एमेटल ,
इथेनॉल , बार्बिचेरेट्स ,

 स्कोपोल-अमाइन, टेपाज़ेमैन आदि को आसुत जल में मिलाया जाता है।

 परीक्षण के दौरान व्यक्ति को #_सोडियम_पेंटोथॉल का इंजेक्शन लगाया जाता है।
व्यक्ति को दवा की मात्रा उसकी आयु, लिंग, स्वास्थ्य और शारीरिक परिस्थिति के आधार पर दी जाती है।

यदि परीक्षण के दौरान अधिक मात्रा दे दी जाये तो वह #_कोमा_में भी जा सकता है या उसकी मृत्यु भी हो सकती है।

#_परीक्षण_में_प्रश्नों के उत्तर देते हुए पूरी तरह से व्यक्ति होश में नहीं होता है और इसी कारण से वह प्रश्नों के सही उत्तर देता है

क्योंकि वह उत्तरों को घुमा-फिरा पाने की स्थिति में नहीं होता है। इस ड्रग के प्रभाव में न केवल वह अर्ध बेहोशी की हालत में चला जाता है बल्कि उसकी तर्क बुद्धि (रिजिनिंग) भी कार्यशील नहीं रहती है।

वह व्यक्ति जो एक तरह से सम्मोहन अवस्था में चला गया होता है, वह अपनी तरफ़ से अधिक कुछ बोलने की स्थिति में नहीं होता बल्कि पूछे गए कुछ सवालों के बारे में ही कुछ बता सकता है।

यह भी माना जाता है कि नार्को टेस्ट में व्यक्ति हमेशा सच ही उगलता है, जबकि बहुत कम किन्तु फिर भी उस अवस्था में भी वह झूठ बोल सकता है, एवं विशेषज्ञों को गुमराह कर सकता है।

#_विश्व_में_प्रयोग_नार्को_टेस्ट_का

जहाँ विकसित विश्व के बहुत से देशों ने ऐसे परीक्षणों को अन्वेषण से मुख्य रूप से पृथक कर दिया हो, अधिकतर गणतांत्रिक विश्व जिनमे अमेरिका और ब्रिटेन भी शामिल हैं,

 वहाँ ऐसे परीक्षण कुछ समय से प्राय: लुप्त हो गए हैं। भारत में इसका प्रयोग आरंभ होने के बाद किसी अपराध के संदिग्ध को पकड़ते ही लोग उसके नार्को परीक्षण की मांग करने लगते हैं। उनका ये मानना होता है कि इस परीक्षण के बाद सच्चाई सामने निश्चित ही आ जायेगी, जबकि इसके पूरे प्रतिशत नहीं होते हैं।

#_भारतीय_संविधान का एक प्रमुख तत्त्व है
धारा 20 अनु.3 इसके तहत "किसी व्यक्ति को जिस पर कोई आरोप लगे हैं, उसे अपने विरुद्ध गवाह के रूप में प्रयोग नहीं किया जाएगा।"

यदि नार्को परीक्षण की मूल अंतर्वस्तु को समझाने की कोशिश करेंगे तो इसके द्वारा व्यक्ति को किसी रूप में स्वयं के विरुद्ध ही गवाह के रूप में प्रयोग किए जाने की संभावना बनी रहती है।

लेकिन विगत कुछ निर्णयों में माननीय न्यायालयों के द्वारा परीक्षण के पक्ष में मत दिया गया है।
#_भारत_के_मानसिक_स्वास्थ्य_संस्थान #_नेशनल_इंस्टिटयूट_ऑफ_मेण्टल_हेल्थ_एण्ड_न्यूरो_साइंसेस (निम्हैन्स) के निदेशक की अध्यक्षता में बनी विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों की समिति कमेटी ने ब्रेन मैपिंग आदि परीक्षणों के बरे में कहा है कि ये परीक्षण अवैज्ञानिक हैं और उन्हें जांच के उपकरण के रूप में प्रयोग करने पर तत्काल रोक भी लगानी चाहिए।

 नार्को परीक्षण के अलावा सच उगलवाने के लिए #_पॉलीग्राफ_लाईडिटेक्टर_टेस्ट_और_ब्रेन_मैपिंग_टेस्ट किया जाता है।

#_उच्चतम_न्यायालय_का_निर्णय

5 मई 2010 को दिये अपने एक निर्णय में भारत के उच्चतम न्यायालय ने बिना सहमति के कराये गये नार्को, ब्रेन मैपिंग और पॉलीग्राफ आदि परीक्षणों को अवैधानिक या अवैध करार दिया है।
न्यायालय ने व्याख्या दी है कि ऐसा करना व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है।
[25/02, 11:28 PM] 🚀परमाणु बम के बारे में 10 रोचक तथ्य

🚀🚀परमाणु बम एक प्रकार का विस्फोटक हथियार है जो परमाणु विखंडन या संलयन के माध्यम से परमाणु प्रतिक्रियाओं का उपयोग करता है. इस तरह के हथियार भारी मात्रा मे उर्जा छोड़ते हैं और इसीलिए ये विनाश का कारण भी बनता है. सबसे पहले परमाणु बम का प्रयोग द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुआ था. इन हतियारों को काफी विनाशकारी माना जाता है क्योंकि एक ही बम लाखों लोगों को मारने और पूरे शहर को नष्ट करने की क्षमता रखता है. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं परमाणु बम के बारे में और कब इसको हिरोशिमा और नागासाकी में गिराया गया था और इसके क्या परिणाम हुए थे, इत्यादि.
परमाणु बम के बारे में रोचक तथ्य

🚀1. परमाणु बम में युरेनियम या प्लूटोनियम के परमाणु विखंडन से ऊर्जा उत्पन्न होती है. इसके लिए परमाणु के केंद्रक में न्यूट्रॉन से चोट किया जाता है जिससे बहुत बड़ी मात्रा में उर्जा उत्पन्न होती है. इसी प्रक्रिया को नाभिकीय विखंडन भी कहते हैं. ये हम सब जानते हैं कि परमाणु बम इतना खतरनाक होता है कि अगर कहीं गिरा दिया जाए तो दशकों तक जन-जीवन का निशान नहीं रहेगा और पेड़ पौधे भी उग नहीं पाएंगे. जैसा कि जापान के दो शहर हिरोशिमा और नागासाकी में हुआ जब अमेरिका ने परमाणु बम गिराए थे.

🚀2. 6 अगस्त, 1945 को, संयुक्त राज्य अमेरिका ने जापान (हिरोशिमा) में अपना पहला परमाणु बम गिराया था. तीन दिन बाद, 9 अगस्त, 1945 को, जापान का नागासाकी अमेरिका का अगला लक्ष्य बना था. पहला परमाणु बम का उपनाम था 'लिटिल बॉय' और दूसरे का 'फैट मैन'. जो बम नागासाकी पर गिराया गया था वो पहले जापान के कोकुरा शहर पर गिराया जाना था लेकिन मौसम खराब होने के चलते नागासाकी पर ही गिरा दिया गया. क्योटो शहर पर भी इस बम को गिराने का प्लान था लेकिन युद्ध के सेक्रेटरी हेनरी स्टिमसन ने इस जगह को बदलवा दिया था.

🚀3. संयुक्त राज्य अमेरिका युद्ध में परमाणु हथियारों का उपयोग करने वाला पहला और एकमात्र राष्ट्र बन गया.

🚀4. जिस विमान से हिरोशिमा पर बम गिराया गया था उसका नाम "Enola Gay" और जिस विमान से दूसरा बम गिराया गया था उसका नाम "Bockscar" था. दोनों परमाणु बम जमीन से कुछ 100 फीट की उंचाई पर हवा में फटे थे.

🚀5. पहले परमाणु हथियार जे रॉबर्ट ओपेनहाइमर के नेतृत्व में उनकी एक वैज्ञानिक टीम ने विकसित किए थे. हम आपको बता दें कि परमाणु हथियार दो प्रकार के होते हैं: विखंडन और थर्मोन्यूक्लियर. विखंडन बम में विखंडन प्रतिक्रियाओं का प्रयोग किया जाता है और ऊर्जा निकलती है वहीं थर्मोन्यूक्लियर बम को हाइड्रोजन बम या एच-बॉम्ब भी कहा जाता है.

🚀6. ऐसा कहा जाता है कि जब परमाणु बम को जापान के दो शहरों में गिराया गया था तब परिणामस्वरूप 1,40,000 से ज्यादा लोग हिरोशिमा में और लगभग 74000 नागासाकी में 1945 के अंत तक मारे गए थे. और हज़ारों लोग अभी भी विकिरण बीमारी से पीड़ित हैं.

🚀7. हिरोशिमा में बम के गिरने से 15,000 टन टीएनटी का विस्फोट होने की कारण काफी प्रभाव पड़ा जिसके परिणामस्वरूप 70% इमारतों को नष्ट कर दिया गया था. जब विस्फोट हुआ था तब 500 मीटर के भीतर 90% लोग तीन सप्ताह में गंभीर जलन या विकीरण की उच्च खुराक से मर गए थे.

🚀8. हिरोशिमा विस्फोट के दौरान बम विस्फोट की साइट के पास तापमान 300,000 डिग्री सेल्सियस (540,000 डिग्री फ़ारेनहाइट) और लगभग 4,000 डिग्री सेल्सियस जमीन के नीचे होने का अनुमान लगाया गया था. यानी कि यह तापमान स्टील को पिघलाने के लिए काफी होता है. इस हमले से 1005 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चली थी और 10 वर्ग किलोमीटर में गहरे गढ्ढे बन गए थे और 500 मीटर तक 19 Tons Per Square Inch का प्रेशर Create हुआ था. यह किसी भी विशाल बिल्डिंग को हवा में उड़ाने के लिए काफी था.

🚀9. हिरोशिमा के परमाणु बम विस्फोट के एक महीने बाद, एक चक्रवात भी आया था जिसके कारण शहर में लगभग 2,000 लोगों की मौत हो गई थी. यहीं आपको बता दें कि अमेरिकी में 10% बिजली विघटित परमाणु बम से बनी है.

🚀10. न्यू मैक्सिको में एक परमाणु बम संग्रहालय है, इसका मिशन परमाणु इतिहास और विज्ञान के लिए अमेरिका के संसाधन के रूप में कार्य करना है. संग्रहालय प्रति वर्ष केवल 12 घंटे के लिए ही खुलता है. 1950 के दशक में, लास वेगास को मिस परमाणु बम का ताज पहनाया गया था.
🚀😂जापान के राजा हिरोहित्तो (Hirohito) ने नागासाकी परमाणु हमले के 6 दिन बाद अमेरिकी सेना के सामने आत्म समर्पण कर दिया था. ऐसा कहा जाता है कि अगर जापान सरेंडर नहीं करता तो अमेरिका ने 19 अगस्त को एक और शहर पर परमाणु बम गिराने की योजना बनाई थी. तो अब आपको ज्ञात हो गया होगा कि परमाणु बम क्या होता है और किस प्रकार से हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराया गया था और फिर उसके क्या-क्या परिणाम हुए
 *संविधान के अनुच्छेद 244(1) के अंतर्गत असम, मेघालय, त्रिपुरा एवं मिजोरम से भिन्न राज्यों में अनुसूचित क्षेत्रों कहे जाने वाले* कुछ क्षेत्र (फिर चाहे ये क्षेत्र किसी राज्य में हों अथवा संघ शासित क्षेत्र में) के प्रशासन हेतु कुछ विशेष प्रावधान किए गए हैं।

ऐसा इन क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों के पिचादेप्न को अधर बना कर किया गया है।

किसी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र घोषित करने का अधिकार संविधान द्वारा राष्ट्रपति को प्रदान किया गया है, किंतु ऐसा वह संसद द्वारा पारित विधान के अधीन रहते हुए ही कर सकता है।

इसके अतिरिक्त वह किसी भी समय किसी भी क्षेत्र के अनुसूचित क्षेत्र के स्तर को समाप्त कर सकता है।

अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन से सम्बन्धित विशेष प्रावधान संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत किए गए हैं।

 *अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन*

अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के सम्बन्ध में संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार इन क्षेत्रों से सम्बन्धित राज्यों को प्रशासन सम्बन्धी आवश्यक निर्देश देने तक ही होगा।

अनुसूचित क्षेत्र वाले राज्य का राज्यपाल प्रतिवर्ष अथवा मांगे जाने पर उक्त राज्य के अनुसूचित क्षेत्र के प्रशासन सम्बन्धी अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत करेगा।

वह चाहे तो सम्बन्धित राज्य के राज्यपाल से विचार-विमर्श करके किसी भी अनुसूचित क्षेत्र के क्षेत्रफल में वृद्धि कर सकता है, उनके सीमा क्षेत्र में परिवर्तन कर सकता है तथा उसके पुनर्निर्धारण के आदेश प्रेषित कर सकता है।

 *राज्यपाल की कानून निर्माण संबंधी शक्तियां*

राज्यपाल को यह प्राधिकार है कि वह कभी भी संबद्ध क्षेत्र में कल्याण एवं शांति हेतु निर्देश दे सकता है।

वह अनुसूचित क्षेत्र के लोगों के बीच परस्पर भूमि के आदान-प्रदान या स्थानांतरण पर प्रतिबंध लगा सकता है।

वह भूमि के आबंटन पर नियंत्रण संबंधी निर्देश दे सकता है।

वह उन व्यावसायिकों व ऋणदाताओं को इन क्षेत्रों के अनुसूचित जनजातियों के लोगों को उधार न देने संबंधी कानून बना सकता है।

इसके अतिरिक्त वह राष्ट्रपति की सहमति से संसद या विधान सभा द्वारा आरोपित, कुछ समय के लिए प्रभावी कानून को संशोधित कर सकता है या समाप्त कर सकता है।

वस्तुतः राज्यपाल द्वारा किसी भी प्रकार के कानून निर्माण इत्यादि के लिए राष्ट्रपति की अनुमति अत्यंत आवश्यक है।

 *जनजातीय सलाहकार परिषद्*

संविधानतः अनुसूचित क्षेत्र वाले राज्य की अनुसूचित जनजातियों के कल्याण एवं उन्नति संबंधी ऐसे विषयों पर परामर्श प्रदान करने हेतु, जो उसे राज्यपाल द्वारा निर्दिष्ट किए जाएं, जनजातीय सलाहकार परिषदों का गठन किया जाएगा (अनुसूची-V)।

इस परिषद में 20 से अधिक सदस्य नहीं होंगे तथा जिनमें से तीन-चौथाई राज्य विधान सभा में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधि होंगे।

यदि राज्य विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधियों की संख्या परिषद में भरे जाने वाले पदों की संख्या से कम होगी तो शेष पदों को उन क्षेत्रों के अन्य सदस्यों से भरा जाएगा।

 *इस संबंध में राज्यपाल को निम्नलिखित नियम बनाने का प्राधिकार है-*

परिषद की सदस्य संख्या उनके अध्यक्ष व अन्य अधिकारियों की नियुक्तियों की विधि तथा नियम

परिषद की विभिन्न सभाओं का संचालन तथा सामान्यतः इसकी कार्य-प्रक्रिया, तथा

अन्य आकस्मिक विषयादि।

यह सलाहकारी परिषद राज्य में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण व विकास हेतु अपनी महत्वपूर्ण सलाह प्रदान करती है।

 *पांचवीं अनुसूची में संशोधन*

संसद समय-समय पर इस अनुसूची के किसी भी प्रावधान को विधि द्वारा संशोधित व समाप्त कर सकती है।

जब अनुसूची का इस प्रकार संशोधन किया जाता है तब इस संविधान में इस अनुसूची के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह इस प्रकार संशोधित ऐसी अनुसूची के प्रति निर्देश है।

अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए इसे संविधान का संशोधान नहीं माना जाएगा।

अनुसूचित क्षेत्रों एवं उनके प्रशासन का उल्लेख संविधान की 5वीं अनुसूची में तथा जनजातीय क्षेत्रों एवं उनके प्रशासन का उल्लेख 6वीं अनुसूची के अंतर्गत किया गया है।

अनुसूचित क्षेत्रों के निर्धारण का अधिकार राष्ट्रपति को है।

 *जनजातीय क्षेत्र*

संविधान के अनुच्छेद-244(2) के अंतर्गत असम, मेघालय, त्रिपुरा एवं मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों के सम्बन्ध में व्यवस्था और उनके प्रशासन सम्बन्धी आवश्यक प्रावधानों का उल्लेख संविधान की 6वीं अनुसूची के अंतर्गत की गई है।

 *जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन*

6वीं अनुसूची में वर्णित असम, मेघालय, त्रिपुरा एवं मिजोरम राज्यों के जनजातीय क्षेत्र स्वशासी जिले के रूप में प्रशासित किए जाएंगे।

ये स्वशासी जिले राज्य सरकार के कार्यपालक प्राधिकार के बाहर तो नहीं हैं किंतु कुछ विधायी  एवं न्यायिक कृत्यों के प्रयोग के लिए जिला परिषद एवं प्रादेशिक परिषदों के सृजन का प्रावधान किया गया है।

ये परिषदें प्राथमिक रूप से पृथक् निकाय हैं और उन्हें कुछ विनिर्दिष्ट क्षेत्रों में विधान बनाने की शक्ति है, जैसे- आरक्षित वन से भिन्न वनों का प्रबन्ध, सम्पत्ति की विरासत, विवाह, सामाजिक रीति रिवाज, आदि।

इसके अतिरिक्त इन परिषदों को भू-राजस्व के निर्धारण एवं संग्रहण की तथा कुछ विनिर्दिष्ट कर आरोपित करने की शक्ति भी प्राप्त है।

इन परिषदों द्वारा बनाई गई कोई भी विधि राज्यपाल की अनुमति के बिना प्रभावी नहीं होगी।

जिन विषयों के सम्बन्ध में विधि निर्माण हेतु जिला एवं प्रादेशिक परिषदों को अधिकृत किया गया है, उन विषयों से सम्बन्धित राज्य विधानमण्डल द्वारा बनाए गए अधिनियम तब तक जनजातीय क्षेत्रों पर लागु नहीं होंगे जब तक कि सुसंगत जिला  परिषद् एक लोक अधिसूचना जारी करके तत्सम्बन्धी निदेश जारी न करे।

जिला एवं प्रादेशिक परिषदों को न्यायिक, सिविल एवं दांडिक शक्तियां प्राप्त होंगी और वे उच्च न्यायालय की अधिकारिता के इस प्रकार अधीन होंगी जो राज्यपाल समय-समय पर विनिर्दिष्ट करे।

संविधान के अंतर्गत असम, मेघालय, त्रिपुरा एवं मिजोरम राज्य जनजातीय क्षेत्र घोषित किए गए हैं।

ये जनजातीय क्षेत्र राज्य सरकार के कार्यपालक प्राधिकार के अधीन स्वशासी जिले के रूप में प्रशासित किए जाते हैं।

इन स्वशासी जिलों में जिला परिषद एवं प्रादेशिक परिषदों के गठन का प्रावधान संविधान में किया गया है।

परिषदों को न्यायिक, सिविल एवं दाण्डिक शक्तियां प्राप्त होती हैं।

‬: *Part-3* 

 *मौलिक अधिकार के विकासात्मक चरण*

अंग्रेजो ने सन 1215 मेँ इंग्लैंड के सम्राट जॉर्ज से नागरिकों के मूल अधिकारोँ की सुरक्षा प्राप्त की थी, यह अधिकार-पत्र मूल अधिकार से संबंधित प्रथम लिखित दस्तावेज है।

सन 1215 के मैग्ना कार्टा ,1679 के बंदी प्रत्यक्षीकरण अधिनियम, सन 1689 के बिल ऑफ राइट्स, सन 1776 की अमेरिकी स्वतंत्रता की घोषणा तथा 1789 की मानव अधिकार की फ्रांसीसी घोषणा इत्यादि मानव अधिकारोँ की मूल समस्या के समाधान मेँ मील का पत्थर हैं।

वर्तमान समय मे समाचार-पत्र मेँ छपे लेख एवं पोस्टकार्ड तक को रिट मानकर उच्चतम न्यायालय ने दीन दुखियों की पीड़ा को हरने का बीड़ा लिया है।

राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 359 के अधीन मौलिक अधिकारोँ को निलंबित कर सकता है।

 *स्मरणीय तथ्य*

सर्वप्रथम मौलिक अधिकारोँ की मांग कांग्रेस द्वारा अपने बंबई अधिवेशन मेँ उठाई गयी।

इस अधिवेशन के अध्यक्ष हसन इमाम थे।

कांग्रेस ने कराची अधिवेशन 1931 मेँ प्रस्ताव किया की भारतीय संविधान मेँ मौलिक अधिकारोँ की आवश्यक सूची को शामिल किया जाना चाहिए, इससे पूर्व नेहरु कमेटी ने 19 मौलिक अधिकारोँ का उल्लेख अपनी रिपोर्ट मेँ किया था।

संपत्ति का अधिकार पहले एक मौलिक अधिकार था लेकिन 44 वेँ संविधान संशोधन अधिनियम (1978) द्वारा इसे मौलिक अधिकारोँ की श्रेणी से निकाल कर एक कानूनी अधिकार बना दिया गया।

मैग्ना कार्टा अधिकारों का वह प्रपत्र है जिसे इंग्लैण्ड के किंग जॉर्ज द्वारा 1215 में सामंतों के दबाव में जारी किया गया, यह नागरिकोँ के मूल अधिकारो से संबंधित पहला लिखित प्रपत्र था।

भारत मेँ सभी व्यक्तियोँ (नागरिकोँ एवं विदेशियोँ) को दिए जाने वाले मूल अधिकार अनुच्छेद 14, 21, 23, 25, 27 और 28 मेँ समाहित हैं।

अस्पृश्यता को संविधान मेँ परिभाषित नहीँ किया गया है।

1954 मेँ भारत सरकार ने चार प्रकार के नागरिक सम्मान प्रारंभ किए - भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री।

भारत सरकार द्वारा प्रदान उपाधियां भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण, पद्म श्री आदि को जनता पार्टी सरकार ने 1977 मेँ समाप्त कर दिया गया था, जो कि 1980 मेँ फिर चालू हो गया।

जब अनुच्छेद 352 के अधीन आपात उद्घोषणा की जाती है तो अनुच्छेद 19 निलंबित हो जाता है।

गिरफ्तार अथवा हिरासत मेँ लिए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के स्थान से मजिस्ट्रेट के न्यायालय मेँ आवश्यक समय के अतिरिक्त ऐसी गिरफ़्तारी से 24 घंटे की अवधि मेँ निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा।

इन 24 घंटो मेँ यात्रा मेँ लगा समय शामिल नही होता।

राष्ट्रपति के विशेष अधिकार द्वारा अनुच्छेद 20 व 21 मेँ निहित अधिकारोँ को छोडकर अन्य समस्त मौलिक अधिकारोँ को निलंबित किया जा सकता है।

50वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अनुच्छेद 33 का विस्तार कर इंटेलिजेंस, दूरसंचार तथा पैरा मिलिट्री के सदस्योँ को भी इसमेँ सम्मिलित कर लिया गया।

अनुच्छेद 359 के द्वारा राष्ट्रपति घोषणा कर सकता है, कि जब तक आपातकाल की घोषणा जारी रहैगी तब तक मौलिक अधिकार निलंबित रहेंगे।

मौलिक अधिकारोँ का उल्लंघन होने पर सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय मेँ अपील की जा सकती है।

निवारक निरोध कानून के तहत किसी व्यक्ति को अपराध करने के पूर्व ही गिरफ्तार किया जा सकता है।

संवैधानिक उपचारोँ का अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारोँ के लिए प्रभावी कार्यविधियां प्रतिपादित करता है।

इसलिए इसको संविधान की आत्मा कहा जाता है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 1932 के गोल मेज सम्मेलन मेँ मांग रखी थी की भारत के लिए जो संविधान बनाया जाए उसमेँ भाषाई और धार्मिक स्वतंत्रताएं अवश्य शामिल की जाएं।

1945 में तेज बहादुर सप्रू समिति के प्रस्तावोँ मेँ दो प्रकार के अधिकारोँ की चर्चा थी - न्याय योग्य अधिकार और वाद योग्य अधिकार।

संविधान सभा मेँ मूल अधिकारोँ की उप-समिति ने जो प्रारुप सूची फरवरी 1948 को तैयार की मूल अधिकारोँ का वही प्रारुप संविधान मेँ शामिल किया गया।

संसद मेँ अनुच्छेद 35 के अंतर्गत अस्पृश्यता निवारक अधिनियम, 1955 को 1976 मेँ संशोधित करते हुए अस्पृश्यता बरतने पर कैद और कठोर दंड की व्यवस्था की।

अनुच्छेद 19 को सभी मूल अधिकारोँ मेँ आवश्यक अथवा मूल अधिकार के अध्याय का केंद्र कहा गया है।

पिछड़े वर्गों के लिए 1953 मेँ काका कालेकर आयोग की स्थापना की गई थी, जिसने सन 1955 में अपनी रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत की थी।

इस रिपोर्ट सरकार 2399 जातियों को सामाजिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़ी हुई माना गया था, जिनमे 837 जातियां अत्यधिक पिछड़ी हुई थीं।

 *1 जनवरी, 1979 को मंडल आयोग की स्थापना की गई।*

 वी. पी. मंडल को इस आयोग के अध्यक्ष थे।

मंडल आयोग ने 31 दिसंबर, 1980 को अपनी रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत की थी।

इस रिपोर्ट में 3743 जातियों को पिछड़ा हुआ माना गया था।

मंडल आयोग की रिपोर्ट के आधार पर 13 अगस्त, 1990 को प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह के नेतृत्व मेँ केंद्रीय सरकार ने एक कार्यालय ज्ञापन निकाला तथा सामाजिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्गो के लिए 27 प्रतिशत अतिरिक्त स्थान आरक्षित कर दिए गए।

अनुच्छेद 18 केवल निर्देशात्मक है, आदेशात्मक नहीँ है
* #भारत_का_संविधान *
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1. संविधान क्या होता है ?
►लिखित और मौलिक दस्तावेज जिसके आधार पर किसी भी देश की शासन व्यवस्था संचालित की जाती है ।
2. भारतीय संविधान का निर्माण करने वाली संविधान सभा का गठन कब हुआ ?
►जुलाई 1946 ई.
3. संसार का सबसे बड़ा संविधान किस देश का है ?
►भारत
4. भारत के संविधान को बनने में कितना समय लगा ?
►2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन
5. शुरू में संविधान में कितने अनुच्छेद, भाग और अनुसूचियां थीं ?
►395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां ।
6.संविधान का निर्माण किसके द्वारा किया गया ?
►संविधान सभा ( चुने हुए प्रतिनिधियों की सभा)
7.संविधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या कितनी निर्धारित की गई ?
►389
8. संविधान सभा का प्रथम अधिवेशन कब संपन्न हुआ ?
►9 दिसंबर 1946 ई.
9. संविधान सभा के प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की ?
►डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा
10. संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष किसे नियुक्त किया गया ?
►डॉ. राजेंद्र प्रसाद (11 दिसंबर 1946 को)
11. भारतीय संविधान की नींव किसे माना गया ?
►उद्देश्य प्रस्ताव को ।
12. संविधान सभा के समक्ष उद्देश्य प्रस्ताव को किसने पेश किया ?
►पंडित जवाहरलाल नेहरू (13 दिसंबर 1946 को)
13. संविधान की प्रारूप समिति का अध्यक्ष किसे बनाया गया ?
►डॉ. भीमराव अंबेडकर
14. प्रारूप समिति में कितने सदस्य थे ?
►सात
15. संविधान को कब अंगीकृत किय गया ?
►26 नवंबर 1949
16. संविधान के अंगीकृत करते समय कितने सदस्यों ने हस्ताक्षर किए ?
►284
17. भारतीय संविधान कब लागू किया गया ?
►26 जनवरी 1950
18. भारतीय संविधान का जनक किसे कहा जाता है ?
►डॉ. भीमराव अंबेडकर
19.संविधान सभा की अंतिम बैठक कब हुई थी ?
►24 जनवरी 1950
20. डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत का राष्ट्रपति कब चुना गया ?
►24 जनवरी 1950 ई.
21. ‘पंथनिरपेक्ष’ तथा ‘समाजवादी’ शब्द संविधान में किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया ?
►42वें संशोधन (1976)
22. संविधान की कुंजी किसे कहा जाता है ?
►संविधान की प्रस्तावना
प्रस्तावना- “हम भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी पंथ-निरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजैनिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरीमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर 1949 को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं ।“
23. संविधान में ‘गणतंत्र प्रणाली’ का स्त्रोत क्या है ?
►फ्रांस
24. ‘आपातकालीन उपबंध’ संविधान में कहां से लिए गए हैं ?
►जर्मनी
25. ‘राज्य के नीति-निर्देशक तत्व’ किस देश से लिए गए हैं ?
►आयरलैंड
26. ‘संविधान संशोधन प्रणाली’ को किस देश के संविधान से लिया है ?
►दक्षिण अफ्रीका
27. भारतीय संविधान में ‘मौलिक कर्तव्य और नियोजन प्रणाली’ किस देश से ली गई है ?
►रूस
28. संविधान में शामिल ‘कानून द्वारा स्थापित शब्दावली’ का स्त्रोत कौन-सा देश है ?
►जापान
29. ‘संविधान की प्रस्तावना की भाषा, समवर्ती सूची, केंद्र-राज्य के बीच शक्तियों का विभाजन’ किस देश से लिया गया है ?
►ऑस्ट्रेलिया
30. ‘संघात्मक शासन व्यवस्था एवं अवशिष्ट शक्तियों का केंद्रीकरण’ को किस देश के संविधान से लिया गया है ?
► कनाडा
31. भारतीय संविधान में ‘मौलिक अधिकार, सुप्रीम कोर्ट का गठन और अधिकार’ किस देश के संविधान से लिया गया है ?
►संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए)
32. उपराष्ट्रपति का पद कहां से लिया गया है ?
►यूएसए
33. किस देश संसदीय शासन प्रणाली को भारतीय संविधान में शामिल किया गया है ?
►ब्रिटेन
34. किस देश की कानून निर्माण प्रक्रिया को संविधान में शामिल किया गया है ?
►ब्रिटेन
35. एकल नागरिकता, संसदीय विशेषाधिकार, मंत्रिपरिषद का लोकसभा के प्रति उत्तरदायित्व, राष्ट्रपति का संवैधानिक प्रमुख के रूप में अस्तित्व और अखिल भारतीय सेवा प्रणाली किस देश से प्रभावित है ?
►ब्रिटेन
36. भारतीय संविधान की विशेषताएं क्या हैं ?
►लिखित और लोकनिर्मित संविधान
कई संविधानों का समावेश
नम्य और अनम्य का मिश्रण
विश्व का सबसे बड़ा संविधान
एकात्मक और संघात्मक शासन का समन्वित रुप
मौलिक अधिकारों की न्यायिक प्रकृति
स्वतंत्र व निपष्क्ष न्याय प्रणाली
लोकतांत्रिक व्यवस्था
37. वर्तमान में संविधान में कितनी अनुसूचियां हैं ?

►12