Wednesday, 27 February 2019

*भारत_के_29_राज्यों_के_नाम_कैसे_रखे_गए*

भारत एक ऐसा देश है, जहां पर लगभग हर तरह के धर्म समुदाय और सम्प्रदाय के लोग रहते है. यही वजह है कि यहाँ की सांस्कृतिक इतिहास बहुत ही अधिक समृद्ध है. यहाँ पर विभिन्न स्थानों के नाम के साथ विभिन्न तरह की सांस्कृतिक इतिहास जुड़ा हुआ है

 *भारत_के_29_राज्य*

1. *जम्मू_और_कश्मीर*
जम्मू और कश्मीर राज्य अपने नाम की ही तरह एक सुन्दर राज्य है. जम्मू और कश्मीर के इतिहास की माने तो यह राज्य प्राचीन समय में ऋषि कश्यप की घाटी के नाम से प्रसिद्द था. इन ऋषि के नाम से ही इस शब्द ‘कश्मीर’ का आविर्भाव हुआ. ध्यान देने वाली बात है कि संस्कृत में शब्द ‘क’ से पानी को और ‘शीमिरा’ से ‘सूख जाने’ का अर्थ प्राप्त होता है. इस वजह से इस स्थान को कश्मीर कहा जाने लगा. इस स्थान के शासक का नाम जम्बू की वजह से शब्द जम्बू का आविर्भाव हुआ.

2. *हिमाचल_प्रदेश*
 इस शब्द से यह अर्थ प्राप्त होता है कि कोई प्रदेश हिम से आच्छादित है. हिम का अर्थ बर्फ होता है और अचल का अर्थ स्थापित. इस तरह यह एक ऐसा प्रदेश हैं, जहां पर सदा बर्फ जमा रहता है. इसे बर्फ़ीले पहाड़ों का घर भी कहा जाता है.

3. *पंजाब*
शब्द पंजाब भारत—इरानी संस्कृति से बना शब्द है. ध्यान देने वाली बात है कि इस क्षेत्र से पांच नदिया बहती है. अतः शब्द ‘पंजाब’ में पंज यानि पांच और आब यानि पानी होता है. इसे पांच नदियों की भूमि भी कहा जाता है.

4. *उत्तराखंड*
वर्ष 2000 में उत्तरप्रदेश से अलग हो कर एक नया राज्य उत्तरांचल का आविर्भाव हुआ. आरम्भ में इसे उत्तरांचल ही कहा जाता था, जिसका शाब्दिक अर्थ था उत्तरी पहाड़ी. इसके उपरान्त इस स्थान को उत्तरांचल की जगह उत्तराखंड के नाम से पुकारा जाने लगा. इसका अर्थ होता है, किसी क्षेत्र का उत्तरी हिस्सा.

5. *हरियाणा*
इस स्थान के नाम को महाभारत काल से जोड़ा जाता है. हरियाणा शब्द का अर्थ हरी यानि श्री कृष्ण के यहाँ आने से जुड़ा हुआ है. महाभारत के समय भगवान श्रीकृष्ण स्वयं यहाँ आये थे, जिस वजह से यह स्थान हरियाणा के नाम से प्रसिद्द हुआ.

6. *उत्तर_प्रदेश*
उत्तर प्रदेश के नाम का अर्थ इसके नाम से ही झलक जाता है. इसका अर्थ है उत्तरी दिशा में स्थापित राज्य. अतः भारत का जो हिस्सा उत्तर दिशा की तरफ फैला हुआ है, उसे उत्तर प्रदेश के नाम से जाना जाता है.

7. *राजस्थान*
यह शब्द स्वयं में ‘राजा’ शब्द को निहित रखता है. ध्यान देने वाली बात है कि इस क्षेत्र में एक से एक प्रतापी राजा हुए थे. इन राजाओं के महलों का अवशेष अभी भी इस राज्य में पाया जाता है. राजपूत राजाओं का गढ़ होने की वजह से इस स्थान का नाम राजस्थान पड़ा. प्राचीनकाल में इसका नाम राजपुताना भी रहा है.

8. *बिहार*
बिहार शब्द का आविर्भाव पाली शब्द विहार से हुआ है. विहार शब्द का अर्थ है किसी स्थान पर भ्रमण के लिये डेरा डालना. धीरे धीरे यह शब्द विकृत होकर बिहार हो गया. यह राज्य एक लम्बे समय तक बौद्ध मठधारियों का विहार स्थल यानि भ्रमण स्थल भी रहा है.

9 *पश्चिम_बंगाल*
पश्चिम बंगाल को प्राचीन समय में बंगाल अथवा बंग्लाह कहा जाता था. यह शब्द संस्कृत के ‘वांग’ शब्द से बना है. वर्ष 1905 के दौरान बंगाल विभाजन के साथ ही इस स्थान के नाम के साथ पश्चिम जुड़ गया और यह स्थान पश्चिम बंगाल कहलाने लगा. वर्ष 1947 में भारत विभाजन के बाद इस राज्य का नाम पश्चिम बंगाल रखा गया. बंगाल के पूर्वी हिस्से को बंगलादेश कहा जाता है.

10. *झारखंड*
शब्द झारखंड ‘झर’ और ‘खंड’ दो शब्दों से मिलकर बना है. झर का अर्थ है जंगल और खंड का अर्थ है भूमि. इस वजह से झारखंड का अर्थ हुआ जंगल की भूमि. यहाँ पर वन पाए भी जाते हैं. झारखण्ड को ‘वनांचल’ भी कहा जाता है.

11. *ओड़िसा*
ओड़िसा नाम की उत्पति ‘ओडरा’ नामक शब्द से उत्पन्न हुई है. इसका अर्थ है वे ओडरा लोग जो भारत के मध्य में निवास करते है.

12. *छत्तीसगढ़*
इस स्थान को पहले दक्षिण कोसला के नाम से जाना जाता था. हालाँकि इस नाम से इस स्थान का संबंध नहीं मिल पाता. ग़ौरतलब है कि इस राज्य में कुल 36 किले पाए गये हैं. इन 36 किलों के होने की वजह से इस स्थान को छत्तीसगढ़ कहा जाता है.

13. *_मध्यप्रदेश*
मध्य प्रदेश का शाब्दिक अर्थ किसी देश के मध्य में स्थित राज्य से होता है. स्वतंत्रता के पहले यह एक बहुत बड़ा राज्य था. इसमें बरार,  छत्तीसगढ़ आदि स्थान शामिल थे. भारत के मध्य में स्थित होने की वजह से इसे मध्य प्रदेश कहा जाता है. इसे हिंदुस्तान का दिल भी कहते है.

14. *गुजरात*
गुजरात शब्द की उत्पति शब्द ‘गुजरा’ से हुई. इस स्थान पर लगभग गुज्जरों द्वारा शासन किया गया था. इन गुज्जरों द्वारा शासन होने की वजह से इसे गुज्जरों की भूमि अथवा गुजरात कहा जाता है.

15. *महाराष्ट्र*
महाराष्ट्र शब्द की उत्पति के साथ कई मत जुड़े हुए हैं. नाम के अनुसार इसका अर्थ है महान देश. इसके पहले इसे राष्ट्रिका भी कहा जाता था. महाराष्ट्र में शब्द राष्ट्र का आविर्भाव राष्ट्रकूट वंश के शासन की वजह से भी माना जाता है.

16. *गोवा*
 इस राज्य के नाम का सही विश्लेषण नहीं मिल पाता. कुछ इतिहासकारों का मानना है कि गोवा यूरोपीय अथवा पुर्तगाली शब्द है. कुछ लोग इसे गाय से भी जोड़ते है, क्योंकि गो का अर्थ गाय भी होता है.

17. *आन्ध्रप्रदेश*
आंध्र का अर्थ ‘दक्षिण’ होता है. इसी के साथ इस क्षेत्र में कुछ ऐसी जनजाति निवास करती है, जिसे आन्ध्र के नाम से जाना जाता है. मौर्य काल में भी प्रशासन में दक्षिण के नौकरशाहों के लिए ‘आन्ध्र भृत्य’ भी कहा जाता था.

18. *कर्नाटक*
कर्नाटक शब्द की उत्पत्ति ‘करू’ से हुई है. इसका अर्थ है गगनचुम्बी. यह दक्कन पठार का क्षेत्र है, जो कि काफ़ी ऊँचा क्षेत्र था. अतः इस वजह से इस स्थान को कर्नाटक का नाम दिया गया.

19. *तमिलनाडु*
तमिलनाडु दो शब्दों से मिलकर बना है तमिल और नाडू. नाडू का अर्थ है जन्मभूमि. इस वजह से यह स्थान तमिलों का घर के रूप से जाना जाता है. इस स्थान में अधिक संख्या में तमिल लोग पाए जाने के कारण इस राज्य का नाम तमिलनाडु पड़ा.

20. *केरल*
इस नाम के साथ भी कई ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मत जुड़े हुए हैं. केरल शब्द का आविर्भाव चेरा वंश के शासकों द्वारा उत्पन्न माना जाता है. संस्कृत में केरल का अर्थ है एक जुडी हुई भूमि. अतः यह कहा जा सकता है कि केरल समुद्र से निकली अतिरिक्त भूमि है, क्योंकि यह समुद्र के किनारे स्थित है.

21. *तेलंगाना*
इस शब्द की उत्पत्ति शब्द ‘त्रिलिंग’ से हुई है, जिसका अर्थ है भगवन शिव के तीन लिंग. अतः इस स्थान का एक अध्यात्मिक महत्त्व भी है.

22. *सिक्किम*
 इस शब्द की उत्पत्ति लिम्बू से हुई है. प्राचीन समय में इसका अर्थ एक नया विशाल भवन के रूप में भी था. हालाँकि तात्कालिक समय में इसे तिब्बती भाषा में डेजोंग भी कहा जाता है.

23. *अरुणाचल_प्रदेश*
अरुणाचल शब्द दो शब्दों के मेल से बना है. ये दो शब्द हैं अरुण और अचल. अतः यह वह स्थान है, जहाँ से सूर्य निकलता दिखाई देता है. इस वजह से इस स्थान को अरुणाचल प्रदेश कहा जाता है.

24. *असम*
असम शब्द का अर्थ अहम शासकों से है. इस स्थान पर 6 सदियों तक ऐसे शासक का राज्य रहा. इसका एक अन्य मतलब अनियमित से भी है, क्योंकि इंडो- आर्यन संस्कृति में असामा का अर्थ अनियमित होता है.

25. *मेघालय*
इस राज्य को बादलों का घर कहा जाता है. मेघालय शब्द दो शब्द से मिल कर बना है मेघ और आलय. यहाँ पर वृष्टि की संभावनाएं अधिक होने की वजह से इस स्थान का नाम मेघालय पड़ा.

26. *मणिपुर*
.इसका प्राचीन नाम कंलैपाक् है। मणिपुर के नामकरण के संदर्भ में जहाँ पौराणिक कथाओं से उसका संबंध जोड़ा जाता है, वहीं प्राप्त तथ्यों से यह प्रमाणित होता है कि प्राचीन काल में पड़ोसी राज्यों द्वारा मणिपुर को विभिन्न नामों से पुकारा जाता था, जैसे बर्मियों द्वारा कथे,
असमियों द्वारा मोगली, मिक्ली आदि। इतिहास से यह भी पता चलता है कि मणिपुर को मैत्रबाक, कंलैपुं या पोंथोक्लम आदि नामों से भी जाना जाता था।

27 *. मिजोरम*
शब्द मिजोरम में ‘मि’ का अर्थ है लोग और ‘जो’ का अर्थ है पहाड़ी. चूँकि मिजोरम एक पहाड़ी क्षेत्र है अतः इस स्थान को मिजोरम कहा जाता है.

28. *नागालैंड*
नागालैंड शब्द में नागा की उत्पत्ति एक बर्मा शब्द नाका से हुई है. नागा का अर्थ उन लोगों से है, जिनके नाक और कान छिदे हुए होते हैं. यह एक विशेष प्रजाति के लोग होते हैं. इसे कई बार नागाओं की भूमि भी कहा जाता है.

29. *त्रिपुरा*
त्रिपुरा की उत्पत्ति शब्द ‘तुईपारा’ से मानी जाती है. इसमें तुई का अर्थ है पानी और पारा का अर्थ है नजदीक. ऐसा भी माना जाता है की इस स्थान पर एक त्रिपुर नामक राजा के शासन की वजह से इसे त्रिपुरा कहा जाता है
*Veto Power Explanation* *in Hindi – वीटो पावर क्या हैं? (What is VETO Power?),* किन-किन देशों को वीटो पावर प्राप्त हैं (Which countries have the power of veto?), Veto Power कैसे मिलता हैं?, वीटो पॉवर से सम्बन्धित अन्य रोचक तथ्य ( Other Interesting Facts about Veto Power) आदि के बारें में जानने के लिए इस पोस्ट को जरूर पढ़े.

 *What is VETO Power? |* *वीटो पावर क्या हैं? | Veto* Power Full Meaning in Hindi
VETO (वीटो) एक लैटिन शब्द हैं जिसका अर्थ हैं – “मैं निषेध करता हूँ”. संयुक्त राष्ट्र संघ ( United Nations Organization – UNO ) की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य देशो को मिला हुआ विशेषाधिकार ही “VETO Power (वीटो पॉवर)” कहलाता हैं. जिन देशों के पास यह विशेषाधिकार होता हैं वो परिषद् में प्रस्तावित किसी भी प्रस्ताव को रोक सकते हैं या उसे नकार सकते हैं. भले ही उसके पक्ष में कितने भी वोट पड़े हों. किसी प्रस्ताव को पारित करने के लिए परिषद् के सारे स्थायी सदस्यों का वोट और 4 अस्थाई सदस्यों का वोट मिलना जरूरी होता हैं. सुरक्षा परिषद् के पाँच स्थायी सदस्य जिन्हें “Veto Power” प्राप्त हैं वे देश इस प्रकार हैं –

Veto Power Countries – अमेरिका ( America ), रूस ( Russia ), ब्रिटेन ( United Kingdom – UK ), फ्रांस ( France ) और चीन ( China ).

 *वीटो पॉवर कैसे मिलता हैं? |* *Veto Power Kaise Milta Hai*
वीटो पॉवर उन देशों को नही मिलता हैं जो माँगते हैं, यह उन देशों को मिलता हैं जो इसके क़ाबिल हैं. भारत या कोई अन्य देश तभी वीटो पॉवर पा सकता हैं जब सुरक्षा परिषद् के सारे स्थाई सदस्यों का सकारात्मक मतदान प्राप्त हो और अस्थाई सदस्यों का दो-तिहाई (2/3) सकारात्मक मतदान प्राप्त हो.

दुसरे विश्व युद्ध के बाद जब भारत स्वतंत्र हुआ तब भारत की औद्योगिक, राजनितिक, आर्थिक और सैन्य वृद्धि को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट यानि वीटो पॉवर देने की पेशकश की गई लेकिन नेहरू जी ने चीन के लोगों के गणतंत्र का हवाला देते हुए वीटो पॉवर लेंते से इनकार कर दिया.

वीटो पॉवर से सम्बन्धित अन्य तथ्य | Other Interesting Facts about Veto Power
संयुक्त राष्ट्र घोषणा पत्र के अनुसार अन्तराष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा को बनाये रखना सुरक्षा परिषद् की मुख्य ज़िम्मेदारी हैं. इस कारणवश एक मुहावरे के रूप में इस “दुनिया का पुलिसमैन” भी कहा गया हैं.
यह संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्य अंग हैं और एक प्रकार से कार्यपालिका हैं.
सुरक्षा परिषद् में कुछ 15 सदस्य होते हैं जिनमे 5 स्थाई सदस्य और 10 अस्थाई सदस्य होते हैं.
सुरक्षा परिषद के प्रत्येक सदस्य का एक वोट होता हैं. प्रक्रिया सम्बन्धी मामलो में निर्णय के लिए 15 में से 9 सदस्यों द्वारा सकारात्मक मतदान आवश्यक होता हैं, जिनमें पाँचों स्थायी सदस्य देशों का सकारात्मक मतदान आवश्यक होता हैं.
पाँचों स्थायी सदस्य देशों की सहमति महान शक्तियों की आम सहमति और वीटो (निषेधाधिकार) शक्ति के रूप में जाना जाता हैं. यदि कोई स्थायी सदी किसी निर्णय से सहमत नही हैं, तो वह नकारात्मक मतदान करके अपने वीटो के अधिकार का उपयोग कर सकता हैं. इस दशा में 15 में 14 सदस्य देशों के समर्थन के बावजूद प्रस्ताव स्वीकृत नहीं होते हैं.
यदि कोई स्थायी सदस्य किसी निर्णय का समर्थन नही करता और उस निर्णय को रोकना भी नहीं चाहता हैं तो वह मतदान की प्रक्रिया के दौरान अनुपस्थित रह सकता हैं.
अमेरिका ने वीटो का उपयोग सर्वप्रथम मार्च 1971 ई. में रोडेशिया के प्रश्न पर किया था.
चीन ने सर्वप्रथम वीटो का प्रयोग अगस्त 1972 ई. में बांग्लादेश के विश्व संस्था में प्रवेश के प्रश्न पर किया था.
चीन ने वीटो पॉवर का उपयोग लगभग 12 बार किया हैं जिसमें 4-5 बार भारत के विरोध में किया हैं.
भारत को अब तक वीटो पॉवर क्यों नही मिला?
भारत पिछले कई सालो से सुरक्षा परिषद् में स्थायी सदस्यता यानि वीटो पॉवर के लिए प्रयास कर रहा हैं लेकिन अब तक सफ़लता नही मिली हैं. इसके ये कुछ मुख्य कारण हैं.

सुरक्षा परिषद् के पांच स्थायी सदस्य (जिनके पास वीटो पॉवर हैं) अपनी शक्ति को किसी अन्य देश के साथ साझा नही करना चाहते हैं इसलिए भारत को वीटो पॉवर मिलने में दिक्कत हैं.
चीन नही चाहता कि भारत को वीटो पॉवर मिले.
भारत सुरक्षा परिषद् में एक नही  चार सीटों की मांग करता हैं, भारत यह मांग जी-4 सदस्य देशों ( जापान, जर्मनी, भारत और ब्राजील ) के लिए करता हैं. इसकी वजह से भी भारत को वीटो मिलने में देरी हो रही हैं

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✅1. *प्रधानमंत्री मोदी ने दांडी में ‘नमक सत्याग्रह स्मारक’ का उद्घाटन किया*

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 जनवरी 2019 को गुजरात के सूरत और दांडी का दौरा किया. यहां उन्होंने सूरत हवाईअड्डे पर टर्मिनल भवन के विस्तार परियोजना और एक अस्पताल की आधाशिला रखी. इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने दांडी में राष्ट्रीय नमक सत्याग्रह स्मारक राष्ट्र को समर्पित किया.

यहां 14 नमक बनाने वाले पेन रखे गये हैं. साथ ही खारा पानी भी उपलब्ध कराया गया है. पर्यटक जब खारा पानी पेन में डालेंगे, तब पेन के अंदर लगी हुई मशीन पानी का वाष्पीकरण कर देगी और पेन में नमक बन जाएगा. इसके अतिरिक्त 41 सोलर वृक्ष प्रतिदिन 144 किलोवाट बिजली उत्पन्न करेंगे. इनका इस्तेमाल स्मारक में बिजली की आपूर्ति के लिए किया जाएगा.


✅2. *कैद में रखे हाथियों का पहला सर्वेक्षण जारी*

भारत में कैद में रखे हाथियों के पहले सर्वे के अनुसार, देश में कुल 2,454 हाथी कैद में हैं जिनमें से 58% असम (905) और केरल (518) में हैं. देशभर में बंधक बनाकर रखे गए हाथियों में आधे से ज्यादा सिर्फ केरल और असम में हैं.

भारत में हाथियों को बंधक बनाकर रखे जाने के चौंकाने वाले आंकड़े सामने है. बतौर सर्वे, 2454 हाथियों में एक-तिहाई गैर-कानूनी रूप से निजी कैद में हैं. यह जानकारी पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे में सामने आई है.


✅3. *उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने विश्व के सबसे लंबे ‘गंगा एक्सप्रेस-वे’ के निर्माण हेतु मंजूरी दी*

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में 29 जनवरी 2019 को प्रयागराज में चल रहे कुंभ के दौरान कैबिनेट बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत 600 किलोमीटर लंबे ‘गंगा एक्सप्रेस-वे’ बनाने के फैसले पर मुहर लगाई गई है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि यह दुनिया का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे होगा. प्रयागराज को पश्चिमी यूपी से जोड़ने के लिए एक्सप्रेस-वे बनाने का फैसला लिया गया है. इसको बनाने में यूपी सरकार तकरीबन 36 हजार करोड़ रुपये खर्च करेगी.


✅4. *चित्रा मुद्गल सहित 24 लेखक साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित*

हिन्दी की प्रसिद्ध लेखिका चित्रा मुदगल सहित 24 लेखकों को 29 जनवरी 2019 को साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया. अकादमी के अध्यक्ष एवं कन्नड़ के प्रख्यात नाटककार चंद्रशेखर क्म्बार ने इन लेखकों को वर्ष 2018 के लिए यह प्रस्कार प्रदान किये.

पुरस्कार में एक लाख रुपये की राशि, प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिह्न एवं शॉल शामिल हैं. अंग्रेजी के लेखक अनीस सलीम और ओडिया लेखक दाशरथी दास की गैर-मौजूदगी में यह पुरस्कार उनके प्रतिनिधियों ने प्राप्त किये.


✅5. *पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फ़र्नांडिस का निधन*

भारत के पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस का 29 जनवरी 2019 को नई दिल्ली के मैक्स अस्पताल में निधन हो गया. वे 88 वर्ष के थे. दिल्ली में उन्होंने सुबह 7 बजे आखिरी सांस ली. जॉर्ज फर्नांडिस लंबे समय से बीमार चल रहे थे, वो अल्जाइमर नाम की बीमारी से परेशान थे.

वाजपेयी सरकार के दौरान जॉर्ज फर्नांडिस देश के रक्षामंत्री रहे थे. अंतिम बार वे अगस्त 2009 से जुलाई 2010 के बीच तक राज्यसभा सांसद रहे थे. फर्नांडिस ने भारत सरकार में रक्षा मंत्रालय, उद्योग मंत्रालय जैसे कई अहम विभाग संभाले थे.


✅6. *WHO ने साल 2019 में सेहत के 10 संभावित खतरों की सूची जारी की*

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में 10 उन बीमारियों/खतरों की सूची जारी की है जो 2019 में दुनिया को संभावित स्वास्थ्य संकट में डाल सकती हैं. डब्ल्यूएचओ द्वारा सुझाए गये इन 10 खतरों के कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन 2019 में नई पंच वर्षीय रणनीतिक योजना की शुरुआत करने जा रहा है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी 10 स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं डब्ल्यूएचओ तथा अन्य स्वास्थ्य सहयोगियों के लिये चुनौती साबित हो सकती हैं. डब्ल्यूएचओ का कहना है कि यदि इन संभावित खतरों से नहीं निपटा गया तो स्वास्थ्य संबंधित गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं.


✅7. *पद्म पुरस्कार 2019 घोषित: जानें गंभीर, कादर खान समेत पूरी सूची*

देश के दूसरे सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म पुरस्कारों की घोषणा 25 जनवरी 2019 को कर दी गई. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कुल 112 व्यक्तियों को पद्म पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की. इस बार 4 को पद्म विभूषण, 14 को पद्मभूषण और 94 को पद्मश्री सम्‍मान दिया जाएगा.                                                                                                                                                                                                                                         इस पुरस्कार से सम्मानित किये जाने वाले लोग देशभर से और समाज के सभी वर्गों से है. गृह मंत्रालय की ओर से दी गई आधिकारिक सूचना के मुताबिक स्व. अभिनेता कादर खान, स्व. कुलदीप नैय्यर, क्रिकेटर गौतम गंभीर, वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का, वैज्ञानिक नंबी नारायण, पर्वतरोही बछेंद्री पाल और दक्षिण के अभिनेता मोहन लाल सहित 112 हस्तियों को पद्म अवार्ड्स के लिए चुना गया है.


✅8. *ऑस्ट्रेलियन ओपन 2019: जोकोविच ने रिकॉर्ड सातवीं बार ख़िताब जीता*

ऑस्ट्रेलियन ओपन 2019 का 27 जनवरी 2019 को समापन हुआ. ख़िताबी मुकाबले मेलबर्न में खेले गये. यह साल में खेले जाने वाले चार ग्रैंड स्लैम प्रतियोगिताओं में से एक है. इसमें नोवाक जोकोविच ने इतिहास रचते हुए रिकॉर्ड सातवीं बार ख़िताब जीता है.

विश्व के नंबर एक खिलाड़ी नोवाक जोकोविच ने ऑस्ट्रेलियन ओपन टेनिस चैंपियनशिप में एकतरफा फाइनल मैच के दूसरे क्रम के राफेल नडाल को सीधे सेटों में 6-3, 6-2, 6-3 से हराया. वे इसी के साथ रिकॉर्ड सात बार ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब जीतने वाले *दुनिया के पहले खिलाड़ी* बन गए.


✅9. *प्रणब मुखर्जी, नानजी देशमुख तथा भूपेन हज़ारिका को भारत रत्न*

राष्ट्रपति भवन की ओर से 25 जनवरी 2019 को जारी जानकारी में घोषणा की गई कि वर्ष 2019 में तीन हस्तियों को भारत रत्न सम्मान दिया जायेगा. इस घोषणा में नानाजी देशमुख, भूपेन हज़ारिका और प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा की गई.

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, मशहूर संगीतकार भूपेन हजारिका और आरएसएस से जुड़े नेता एवं समाजसेवी नानाजी देशमुख को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जाएगा. राष्ट्रपति भवन से जारी बयान में कहा गया कि नानाजी देशमुख एवं भूपेन हजारिका को यह सम्मान मरणोपरांत प्रदान किया जाएगा.


✅10. *चेन्नई में सौर ऊर्जा और जल उपचार प्रौद्योगिकी मिशन केन्द्रों का शुभारंभ किया गया*

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्‍वी विज्ञान, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने 25 जनवरी 2019 को चेन्‍नई के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान मद्रास (आईआईटीएम) में स्थित विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र द्वारा स्‍थापित तीन प्रमुख केंद्रों का शुभारंभ किया.

इन तीनों में पहले डीएसटी- आईआईटीएम सोलर एनर्जी हारनेसिंग सेंटर की स्‍थापना की गई है. इस केंद्र में सिलिकॉन सोलर सेल जैसी अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास गतिविधियों की विस्‍तृत श्रृंखला पर ध्‍यान केंद्रित किया जायेगा.


✅11. *वेनेज़ुएला संकट: विश्व में उभरती नई समस्या*

वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो द्वारा हाल ही में अमेरिका के साथ सभी राजनीतिक संबंध समाप्त किये जाने की घोषणा की गई. इस घोषणा के बाद वेनेज़ुएला का राजनीतिक संकट एक बार फिर चर्चा में आ गया है.

वेनेज़ुएला में जनता द्वारा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन किये जा रहे हैं. इसमें बहुत से लोगों के मारे जाने और आगजनी की सैंकड़ों घटनाएं सामने आ चुकी हैं. वेनेज़ुएला लंबे समय से आर्थिक संकट झेल रहा था लेकिन अब वह राजनीतिक संकट में भी फंस गया है. वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन से उपजे राजनीतिक संकट में अमेरिका और रूस के अलावा और भी कई देश कूद पड़े हैं जिससे यह एक वैश्विक रूप लेता नज़र आ रहा है.


✅12. *इसरो ने छात्रों द्वारा तैयार ‘कलामसैट’ और इमेजिंग सैटेलाईट ‘माइक्रोसैट आर’ लॉन्च किया*

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 24 जनवरी 2019 को विश्व के सबसे छोटे सैटेलाइट ‘कलामसैट’ को लॉन्च किया. पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल PSLV C-44 के द्वारा कलामसैट और माइक्रो सैट-आर को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया.

कलामसैट की खासियत यह है कि इसे छात्रों ने विकसित किया है. इसके अलावा, माइक्रोसैट-आर की खासियत है कि यह अन्तरिक्ष से पृथ्वी की तस्वीरें लेने में सक्षम है. इसरो की ओर से जारी मिशन की जानकारी के अनुसार, श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से PSLV C-44 के लॉन्चिंग की उल्टी सुचारु रूप से आरंभ की गई. यह इसरो के पीएसएलवी व्हीकल की 46वीं उड़ान है.


✅13. *प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस संग्रहालय का उद्घाटन किया*

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 122वीं जयंती के अवसर पर 23 जनवरी 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी दिल्ली में लालकिले में सुभाष चंद्र बोस संग्रहालय का उद्घाटन किया. इस संग्रहालय में सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज से जुड़ीं चीजों को प्रदर्शित किया गया है. इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सुभाष चंद्र बोस के पोते भी मौजूद थे.                                                                                                        इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने याद-ए-जलियां संग्रहालय (जलियांवाला बाग और प्रथम विश्वयुद्ध पर संग्रहालय) और 1857 (प्रथम स्वतंत्रता संग्राम) पर संग्रहालय और भारतीय कला पर दृश्यकला संग्रहालय का भी उद्घाटन किया.


✅14. *राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ प्रदान किये*

राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 22 जनवरी 2019 को राष्‍ट्रपति भवन में ‘प्रधानमंत्री राष्‍ट्रीय बाल पुरस्‍कार- 2019’ प्रदान किये. ये पुरस्‍कार 26 चयनित विजेताओं को प्रदान किये गये.

इन पुरस्कारों में नवाचार, शैक्षिक, खेल, कला और संस्‍कृति, समाज सेवा और बहादुरी श्रेणी के तहत राष्‍ट्रीय बाल पुरस्‍कार (जिसे अब‍ बाल शक्ति पुरस्‍कार का नाम दिया गया है) के लिए एक संयुक्‍त पुरस्‍कार भी शामिल है. दो व्‍यक्तियों और तीन संस्‍थानों को भी राष्‍ट्रीय बाल कल्‍याण पुरस्‍कार श्रेणी (अब बाल कल्‍याण पुरस्‍कार का नाम दिया गया है) के तहत पुरस्‍कार दिये गए.


✅15. *विराट कोहली ICC अवार्ड्स में सर्वश्रेष्ठ वनडे और टेस्ट खिलाड़ी के साथ वर्ष 2018 के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर घोषित*

क्रिकेट की शीर्ष संस्था इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) ने 22 जनवरी 2019 को वर्ष 2018 के पुरस्कारों की घोषणा करते हुए भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली को तीन सर्वश्रेष्ठ पुरस्कारों से नवाजा है. इसके अतिरिक्त आईसीसी ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन के आधार पर टीम ऑफ़ द इयर भी घोषित की है.

विराट कोहली को आईसीसी अवॉर्ड्स में क्रिकेटर ऑफ द ईयर (सर गारफील्ड सोबर्स ट्रॉफी), आईसीसी टेस्ट क्रिकेटर ऑफ द ईयर और आईसीसी वनडे क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना गया. विराट कोहली इसके अलावा आईसीसी टेस्ट टीम ऑफ द ईयर और आईसीसी वनडे टीम ऑफ द ईयर में चुने गए और दोनों टीमों के कप्तान नियुक्त किए गए हैं.


✅16. *विश्व आर्थिक मंच 2019 दावोस में आयोजित*

इस आयोजन में दुनिया के बड़े-बड़े कारोबरियों अर्थशास्त्र, अंतरराष्ट्रीय संगठनों से लेकर दुनिया के दिग्गज नेता शामिल हुए हैं. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर कमलनाथ पहली बार इस सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं, वैसे वो पिछले 17 साल से लगातार दावोस विश्व आर्थिक सम्मेलन में शामिल होते रहे हैं.

दावोस में मुख्य सत्र के बाहर ओपन फोरम में जेन गुडॉल भी हिस्सा लेंगी. जेन गुडॉल मशहूर जंतु वैज्ञानिक हैं. चिम्पांजी को लेकर उनका शोधकार्य बहुत महत्वपूर्ण रहा है.


✅17. *भारत के 1% लोगों के पास 50% आबादी के बराबर संपत्ति: ऑक्सफैम रिपोर्ट*

ऑक्सफैम (Oxfam Report) द्वारा 21 जनवरी 2019 को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अरबपतियों की संपत्ति में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है. ऑक्सफैम रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में अरबपतियों की संपत्ति में  वर्ष 2018 में प्रतिदिन 2,200 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है. इस दौरान, देश के शीर्ष एक प्रतिशत अमीरों की संपत्ति में 39 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि 50 प्रतिशत गरीब आबादी की संपत्ति में महज तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

ऑक्सफैम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि विश्व भर के अरबपतियों की संपत्ति में पिछले वर्ष 12 प्रतिशत (2.5 अरब डॉलर प्रतिदिन) की वृद्धि दर्ज की गई. इसके विपरीत दुनिया की आधी आबादी, जिन्हें गरीब माना जाता है, की दौलत 11% घट गई है.


✅18. *वाराणसी में प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन*

वासी भारतीय दिवस का 15 वां संस्करण 21 जनवरी 2019 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में शुरू हो गया है. प्रवासी भारतीय दिवस (Pravasi Bhartiya Divas 2019) के लिए इस बार वाराणसी में बेहद खास आयोजन किया गया है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज समेत अन्य बड़े नेताओं की मौजूदगी में प्रवासी भारतीय दिवस समारोह की शुरुआत हुई. प्रवासी भारतीय दिवस समारोह वाराणसी में 21 से 23 जनवरी तक चलेगा.


✅19. *इसरो ने सीमा सुरक्षा के लिए विशेष उपग्रह लॉन्च करने की घोषणा की*

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा हाल ही में यह घोषणा की गई कि वह गृह मंत्रालय के लिए एक विशिष्ट उपग्रह प्रक्षेपित करेगा. उपग्रह का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं अन्य देशों से सटी भारत की सीमा को और मजबूत बनाना है. गृह मंत्रालय द्वारा एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है.

गृह मंत्रालय द्वारा बताया गया कि यह कदम सीमा प्रबंधन के सुधार में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग को लेकर एक कार्य बल द्वारा की गई सिफारिशों का हिस्सा है. गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है.


✅20. *विश्व का पहला मानवाधिकार को समर्पित टीवी चैनल लंदन में आरंभ*
                                                                                                             इंटरनेशनल ऑब्जर्वेटरी ऑफ़ ह्यूमन राइट्स (IOHR) द्वारा विश्व में पहली बार मानवाधिकार को समर्पित टीवी चैनल आरंभ किया गया है. यह चैनल लंदन स्थित ऑफिस से आरंभ किया गया है. मानवाधिकार को समर्पित यह टीवी चैनल वेब आधारित होगा लेकिन यह यूरोप, लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व समेत 20 देशों के लोगों के लिए मानवाधिकार से सम्बंधित मुद्दों पर कार्यक्रम का प्रसारण करेगा.

IOHR द्वारा आरंभ किये गये इस चैनल के ब्रॉडकास्ट को netgem.tv प्लेटफार्म पर द्वारा देखा जा सकता है. फिलहाल इस चैनल पर अंग्रेजी में कार्यक्रम प्रसारित किये जा रहे हैं. लेकिन, आगे चलकर फारसी, तुर्की, अरबी तथा रूसी भाषा में भी कार्यक्रम प्रसारित किये जा सकते हैं.


✅21. *सरकार ने 2015-18 के गांधी शांति पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की*

केंद्र सरकार ने 16 जनवरी 2019 को पिछले चार वर्षों के लिए गांधी शांति पुरस्कारों की घोषणा की है. केंद्र सरकार द्वारा 2015 से 2018 तक के गांधी शांति पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा की गई.

इस पुरस्कार से अंतिम बार वर्ष 2014 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) को सम्मानित किया गया था. हालांकि, सरकार ने 2014 के बाद से इस पुरस्कार से किसी को सम्मानित नहीं किया था. इन पुरस्कारों के विजेताओं का फैसला एक ज्यूरी ने किया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत के चीफ जस्टिस, जस्टिस रंजन गोगोई, लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, विपक्ष नेता मल्लिकार्जुन खडग़े तथा लालकृष्ण आडवाणी शामिल थे.


✅22. *चीन ने चांद पर कपास उगाने में सफलता हासिल की*

चीन द्वारा चांद पर भेजे गये रोवर चांग ई-4 द्वारा कपास के बीज अंकुरित करने में सफलता हासिल की गई है. चीन का दावा है कि उसने रोवर चांग ई-4 पर लगाए प्रयोगात्मक बॉक्स में यह सफल प्रयोग किया है. गौरतलब है कि यह पहला मौका है जब मनुष्य ने चांद पर कोई पौधा उगाया है. चीन के वैज्ञानिकों द्वारा 15 जनवरी 2019 को यह जानकारी सार्वजनिक की गई. चीन को अब चांद पर आलू उपजाने की भी उम्मीद है.

चोंगकिंग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने वायु, जल और मिट्टी युक्त 18 सेंटीमीटर का एक डिब्बा रोवर की सहायता से चांद पर भेजा था. इसके भीतर कपास, आलू और सरसों प्रजाति के एक-एक पौधे के बीज के साथ-साथ फ्रूट फ्लाई के अंडे और यीस्ट भेजे गए थे. प्रयोग की अगुवाई करने वाले चीन के वैज्ञानिक शाइ गेंगशिन ने कहा, “यह पहला मौका है, जब मानव ने चंद्रमा की सतह पर जीवविज्ञान में पौधों के विकास के लिए प्रयोग किए.”


✅23. *प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘फिलिप कोटलर’ पुरस्कार से सम्मानित*

पुरस्कार के प्रशस्तिपत्र में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का चयन ‘‘देश को उत्कृष्ट नेतृत्व’’ प्रदान करने के लिये किया गया है. इसके अनुसार, अथक ऊर्जा के साथ भारत के लिये उनकी निःस्वार्थ सेवा की वजह से देश ने बेहतरीन आर्थिक, सामाजिक और प्रौद्योगिकीय विकास किया है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की पहचान अब नवाचार और मूल्यवर्धित विनिर्माण (मेक इन इंडिया) के साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी, लेखांकन एवं वित्त जैसे पेशेवर सेवाओं के केन्द्र के रूप में उभरी है.


✅24. *सिक्किम के मुख्यमंत्री ने 'एक परिवार, एक नौकरी' योजना का शुभारंभ किया*

सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने 12 जनवरी 2019 को 'एक परिवार, एक नौकरी' योजना का शुभारंभ किया. इस योजना की घोषणा पवन कुमार चामलिंग ने वर्ष 2018 में राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान की थी.

एक परिवार-एक नौकरी योजना के तहत नौकरी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी कार्मिक विभाग को दी गई है. उनका दावा है कि ऐसी योजना लागू करने वाला सिक्किम *देश का पहला राज्य* बन गया है.


✅25. *गुजरात आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10% आरक्षण देने वाला पहला राज्य बना*

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी द्वारा शिक्षा और रोज़गार में गरीब सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण को 14 जनवरी से लागू करने का निर्णय लिया गया है. केंद्र सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी है. अधिसूचना जारी होने के एक दिन बाद ही गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने यह घोषणा की.

शैक्षणिक संस्थाओं और सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से पिछड़ों को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा. यह आरक्षण अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग कोटे के अतिरिक्त दिया जाएगा. पहले से घोषित उन भर्तियों में भी यह आरक्षण लागू होगा, जिनकी अभी कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है.


✅26. *मिशन गगनयान दिसम्बर 2021 में लांच किया जायेगा: इसरो*

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मिशन गगनयान को दिसम्बर 2021 में लांच करने की घोषणा की. इसरो प्रमुख के. सिवन ने 11 जनवरी 2019 को बेंगलुरु में प्रेस कॉन्‍फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि भारत दिसंबर 2021 में अंतरिक्ष में मनुष्य को भेजने का लक्ष्य रखा है.इसरो प्रमुख ने बताया कि दो मानवरहित स्पेस मिशन का लक्ष्य दिसंबर 2020 और जुलाई 2021 रखा गया है. कैबिनेट ने भारतीय गगनयान मानव मिशन के लिए 10 हजार करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दे चुकी है. इस अभियान के तहत तीन एस्ट्रोनॉट सात दिन तक अंतरिक्ष में रह सकेंगे.


✅27. *मैरी कॉम दुनिया की नंबर एक महिला मुक्केबाज़ बनीं: एआईबीए*

भारत की प्रसिद्ध महिला मुक्काबाज मैरी कॉम दुनिया की नंबर एक महिला मुक्केबाज़ (48 किलोग्राम वर्ग में) बन गई हैं. अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज़ी संघ (एआईबीए) की ओर से जारी ताज़ा वरीयता सूची में मैरी कॉम को पहले-नबर पर रखा गया है.

एआईएबीए की वरीयता सूची में मैरीकॉम को अपने वर्ग में 1,700 प्वाइंट मिले हैं. छठी बार महिला मुक्केबाज़ी की विश्व चैंपियनशिप में मिली जीत ने उन्हें यह उपलब्धि दिलाई है.


✅28. *आईआईटी मद्रास ने प्रयोगशाला में ‘स्पेस फ्यूल’ तैयार किया*

आईआईटी मद्रास के शोधकर्ताओं द्वारा प्रयोगशाला में स्पेस फ्यूल तैयार किये जाने में सफलता हासिल की है. शोधकर्ताओं का कहना है कि यह फ्यूल अंतरग्रहीय परिस्थितियों को सिमुलेट करके प्रयोगशाला में बनाया गया है. विज्ञान पत्रिका प्रोसीडिंग्स ऑफ़ नेशनल अकैडमी ऑफ़ साइंसेज (PNAS) द्वारा हाल ही में इस शोध को प्रकाशित किया गया है.

शोधकर्ताओं द्वारा यह ईंधन भारत के लिए जैविक इंधन के एक स्वच्छ तथा सतत विकल्प के रूप में पेश किया गया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस शोध से वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड को अगली पीढ़ी के उर्जा स्त्रोत में परिवर्तित किया जा सकता है. यह भी संभव है कि इससे ग्रीन हाउस गैस तथा ग्लोबल वार्मिंग को नियंत्रित करने में सहायता मिलेगी.


✅29. *नासा के सैटेलाईट TESS ने पृथ्वी से तीन गुना बड़ा ग्रह खोजा*

नासा के सैटेलाईट ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS) ने सौरमंडल के बाहर एक नए ग्रह की खोज की है. TESS द्वारा खोजा गया यह तीसरा ग्रह है. वैज्ञानिकों का मानना है कि धरती से बाहर जीवन तलाशने की संभावनाओं की दिशा में यह एक बड़ी उपलब्धि है.

वैज्ञानिकों द्वारा जारी जानकारी के अनुसार घने वायुमंडल के चलते इस ग्रह पर जीवन की संभावना हो सकती है. इस नए ग्रह की खोज करने वाली टीम की अगुवाई मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रॉफिजिक्स एंड स्पेस रिसर्च की प्रोफेसर डायना ड्रैगॉमिर ने की है.


✅30. *LPU में ‘टाईम कैप्सूल’ को अगले 100 वर्षों के लिए जमीन में दबाया गया*

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU), जालंधर में आयोजित 106वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस में इज़राइल के नोबल पुरस्कार से सम्मानित वैज्ञानिक एवराम हेर्शको और अमेरिका के वैज्ञानिक एफ. डंकन एम. हॉल्डाने द्वारा 04 जनवरी 2019 को वर्तमान टेक्नोलॉजी और भारत के वैज्ञानिक कौशल का प्रतिनिधित्व करने वाली वस्तुओं के साथ एक टाईम कैप्सूल को जमीन में दबाया गया.

इस टाईम कैप्सूल में 100 ऐसी वस्तुओं को शामिल किया गया है, जो भारत में अनुभव की जाने वाली आधुनिक टेक्नोलॉजी का प्रतिनिधित्व करते हैं. यह कैप्सूल धरती में 100 वर्ष तक दबा रहेगा. इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को वर्तमान की तकनीक के बारे में अवगत कराना है.
[25/02, 11:35 AM] ‪+91 94151 51128‬: *देश में अल्पसंख्यक कौन हैं* इसकी परिभाषा और आधार फिर से तय करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 11 फरवरी को सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को निर्देश दिया है कि वह तीन महीने के भीतर अल्पसंख्यक की परिभाषा तय करे।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के TMA पाई मामले में दिये गए संविधान पीठ के फैसले को आधार बनाकर मांग की गई थी कि अल्पसंख्यकों की पहचान राज्य स्तर पर की जाए, न कि राष्ट्रीय स्तर पर क्योंकि कई राज्यों में जो वर्ग बहुसंख्यक हैं उन्हें अल्पसंख्यक का लाभ मिल रहा है।

याचिका में अल्पसंख्यकों को 'अल्पसंख्यक संरक्षण' दिये जाने तथा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम की धारा 2(c) को रद्द किये जाने की मांग की गई है क्योंकि यह धारा मनमानी, अतार्किक और अनुच्छेद 14, 15 तथा 21 का उल्लंघन करती है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि इस धारा में केंद्र सरकार को किसी भी समुदाय को अल्पसंख्यक घोषित करने के असीमित और मनमाने अधिकार दिये गए हैं।

याचिका में कहा गया है कि हिंदू जो राष्ट्रव्यापी आँकड़ों के अनुसार एक बहुसंख्यक समुदाय है, वह पूर्वोत्तर के कई राज्यों और जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यक है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि हिंदू समुदाय उन लाभों से वंचित है जो कि इन राज्यों में अल्पसंख्यक समुदायों के लिये मौजूद हैं।

अल्पसंख्यक पैनल को इस संदर्भ में ‘अल्पसंख्यक' शब्द की परिभाषा पर पुन: विचार करना चाहिये।

1947 में देश के विभाजन के दौरान मुस्लिम समुदाय के लगभग सभी लोग पाकिस्तान चले गए थे और भारत में इनकी संख्या बहुत कम रह गई।

हमारे संविधान निर्माताओं के मस्तिष्क में यह आशंका थी कि ऐसा न हो कि हिन्दुओं की बहुसंख्यक आबादी के कारण यहाँ केवल हिन्दुओं की ही सरकार बने और वह अल्पसंख्यकों के त्योहारों या उनके रीति-रिवाज़ का पालन करने पर कोई रोक लगा दे।

यही वज़ह है कि अनुच्छेद 29 और 30 में कहा गया कि भारत में जो अल्पसंख्यक हैं उनको अपने रीति-रिवाज़ तथा धर्म का पालन करने का अधिकार होगा।

इसके अलावा संविधान में और कुछ नहीं कहा गया।

 *अल्पसंख्यक कौन है?*

संयुक्त राष्ट्र की परिभाषा के अनुसार, ‘Any group of community which is economically, politically non-dominant and inferior in population, अर्थात् ऐसा समुदाय जिसका सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक रूप से कोई प्रभाव न हो और जिसकी आबादी नगण्य हो, उसे अल्पसंख्यक कहा जाएगा।

अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत अल्पसंख्यक ऐसे समूह हैं जिनके पास विशिष्ट और स्थिर जातीय (Stable Ethnic), धार्मिक और भाषायी विशेषताएँ हैं।

 *भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29, 30, 350A तथा 350B में ‘अल्पसंख्यक’ शब्द का प्रयोग किया गया है* लेकिन इसकी परिभाषा कहीं नहीं दी गई है।

अनुच्छेद 29 में ‘अल्पसंख्यक’ शब्द का प्रयोग किया गया है जिसमें कहा गया है कि भारत के राज्य क्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार होगा।

अनुच्छेद 30 में बताया गया है कि धर्म या भाषा पर आधारित सभी अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी रुचि की शिक्षा, संस्थानों की स्थापना और प्रशासन का अधिकार होगा।

 *अनुच्छेद 350 A और 350 B केवल भाषायी अल्पसंख्यकों से संबंधित हैं।*

1992 के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम की धारा 2(c) के तहत 23 अक्तूबर, 1993 को सरकार द्वारा जारी अधिसूचना में पाँच समुदायों मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, पारसी तथा बौद्ध को अल्पसंख्यक समुदाय के रूप में मान्यता दी गई।

 *2014 में जैन समुदाय को भी अल्पसंख्यक की श्रेणी में शामिल किया गया।*

 *गुजरात सरकार ने राज्य में जैन समुदाय को अलग से अल्पसंख्यक घोषित किया है।.*

 *TMA पाई फाउंडेशन बनाम यूनियन ऑफ़ इंडिया का मामला*

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के 11 जजों की संवैधानिक बेंच ने कहा है कि राज्य कानून के संबंध में धार्मिक या भाषायी अल्पसंख्यक का निर्धारण करने वाली इकाई केवल राज्य हो सकती है।

यहाँ तक ​​कि अल्पसंख्यक का निर्धारण करने में एक केंद्रीय कानून के लिये भी ईकाई का आधार राज्य होगा न कि संपूर्ण भारत।

इस प्रकार, धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यक, जिन्हें अनुच्छेद 30 में बराबरी का दर्जा दिया गया है, को राज्य स्तर पर निर्धारित किया जाना चाहिये।

 *अल्पसंख्यकों के निर्धारण का एक समान राष्ट्रीय तरीका क्यों नहीं है?*

भारत में समुदायों का असमान वितरण किसी समुदाय को राष्ट्रीय रूप से धार्मिक अल्पसंख्यक घोषित करने में परस्पर विरोधी स्थिति पैदा करता है, जो कुछ राज्यों में बहुसंख्यक हो सकता है।

नागरिकों का लगातार हो रहा प्रवासन जनसांख्यिकी को प्रभावित करता है।

धार्मिक या भाषायी समुदाय की संरचना में बदलाव भी एक बड़ा कारण है। जिसके कारण किसी भी स्थिर नीति का कारगर होना मुश्किल है।

1500 से अधिक क्षेत्रीय भाषाओं वाले इस देश में भाषायी अल्पसंख्यकों का पदनाम (Designation) चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

हमें TMA पाई मामले में बताए गए स्रोत और क्षेत्रीय कानून के संबंध में अल्पसंख्यक का दर्जा निर्धारित करना चाहिये।

 *मापदंड तय किये जाने की ज़रुरत*

किसी समुदाय को राज्य स्तर पर अल्पसंख्यक घोषित करने में जो मुख्य समस्या यह है कि इस शब्द की परिभाषा कहीं नहीं बताई गई है, दूसरा यह कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम में भी इसकी कोई परिभाषा नहीं बताई गई है तथा तीसरा यह है कि सरकार ने जो अधिसूचना जारी की है उसका आधार क्या है यह निर्धारित नहीं है।

अगर हम मान लें कि राष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या को आधार माना गया है तो ऐसा राज्य स्तर पर क्यों नहीं हो सकता?

याचिका में धारा 2(c) तथा 23 अक्तूबर,1993 को जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई है तथा इसे संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन बताया गया है।

 *यह सही है कि अल्पसंख्यकों को संरक्षण मिलना चाहिये।*

 यह भी सही है कि देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था, काफी हिंसा हुई थी इसके बावजूद संविधान निर्माताओं ने यह दूरदर्शी फैसला लिया कि हिंदुस्तान एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होगा और सबको बराबर का हक़ दिया जाएगा।

लेकिन अल्पसंख्यक कौन हैं इसकी पहचान करना पहली शर्त होनी चाहिये।

यह विडंबनापूर्ण स्थिति है कि कहीं पर कोई समुदाय जो 96, 98 प्रतिशत है वह अल्पसंख्यक है और वहीँ किसी राज्य में 2 प्रतिशत आबादी वाले लोग बहुसंख्यक हैं और अल्पसंख्यक को मिलने वाले लाभ से वंचित हैं।

यह गैर-बराबरी है। इसे एड्रेस किये जाने की ज़रूरत है।
आने वाले समय में हिंदुस्तान में मुसलमानों की आबादी दुनिया के सभी देशों से अधिक होगी।

 *ऐसी स्थिति में मुसलमान अल्पसंख्यक किस आधार पर होंगे?*

अल्पसंख्यक स्थिति का एक मानदंड तय होना चाहिये जिसमें जनसंख्या के अलावा अन्य कारकों पर भी विचार किया जाना चाहिये।

‘ **अल्पसंख्यक’ शब्द को परिभाषित किये जाने की आवश्यकता क्यों?*
*
संविधान में ‘अल्पसंख्यक’ शब्द की परिभाषा कहीं नहीं दी गई है।

 *अल्पसंख्यक कौन होगा?*

यह राष्ट्रीय स्तर पर तय होगा या राज्य स्तर पर इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है।

1993 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का गठन किया गया उस समय भी ‘अल्पसंख्यक’ शब्द को परिभाषित नहीं किया गया।.

वर्ष 2006 में अल्पसंख्यक मामले मंत्रालय का गठन हुआ तब भी ‘अल्पसंख्यक’ शब्द को परिभाषित नहीं किया गया।

आज़ादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी अल्पसंख्यक कौन हैं, न तो संविधान में परिभाषित किया गया और न ही किसी अन्य कानून में।

मिज़ोरम, मेघालय और नगालैंड ईसाई बहुसंख्यक राज्य हैं और अरुणाचल, गोवा, केरल, मणिपुर, तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल में इनकी आबादी अच्छी खासी है फिर भी उन्हें अल्पसंख्यक माना जाता है।

इसी तरह पंजाब में सिख बहुसंख्यक हैं तथा दिल्ली, चंडीगढ़ और हरियाणा में इनकी पर्याप्त आबादी है फिर भी इन्हें अल्पसंख्यक माना जाता है।

लक्षद्वीप में 96.20% और जम्मू-कश्मीर में 68.30% मुसलमान हैं, जबकि असम (34.20%), पश्चिम बंगाल (27.5%), केरल (26.60%), उत्तर प्रदेश (19.30%) और बिहार (18%) में भी इनकी अच्छी-खासी जनसंख्या है फिर भी इन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा मिला हुआ है और वे इसका लाभ ले रहे हैं।

दूसरी ओर वे समुदाय, जो वास्तविक रूप से अल्पसंख्यक हैं, राज्य स्तर पर अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त न होने के कारण लाभ से वंचित हैं।

लक्षद्वीप में मात्र 2% हिंदू हैं लेकिन वे वहाँ अल्पसंख्यक न होकर बहुसंख्यक हैं और 96% प्रतिशत आबादी वाले मुसलमान अल्पसंख्यक हैं।

उत्तर प्रदेश के अनुसूचित जाति का व्यक्ति राजस्थान में अनुसूचित जाति का नहीं माना जाता। जब प्रदेश बदलने के साथ उस व्यक्ति की SC, ST, OBC स्थिति बदल जाती है तो अल्पसंख्यक की स्थिति को बदलने में क्या समस्या है?

 *निष्कर्ष*

एक लोकतांत्रिक, बहुलवादी राजनीति में अल्पसंख्यक अधिकार आवश्यक हैं।

फ्रैंकलिन रूजवेल्ट ने कहा है कि "कोई भी लोकतंत्र लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकता है जो अल्पसंख्यकों के अधिकारों की मान्यता को अपने अस्तित्व के लिये मौलिक नहीं मानता है"।

संविधान में ‘अल्पसंख्यक’ शब्द को परिभाषित न करने का कारण उस समय की परिस्थितियाँ थीं लेकिन आज की परिस्थिति के अनुसार, इसमें बदलाव आवश्यक है।

भारत लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और लोक कल्याणकारी राज्य है।

अतः सभी वर्गों के लोगों को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार है।

संविधान सभा ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए संविधान में भाषायी और धार्मिक आधार पर अल्पसंख्यकों को संरक्षित करने की बात की लेकिन अल्पसंख्यक को परिभाषित करने से परहेज़ किया।

बदलते परिदृश्य में अब समय आ गया है क़ि राष्ट्रीय स्तर पर नहीं बल्कि प्रादेशिक स्तर पर अल्पसंख्यकों को परिभाषित किया जाए, जिन राज्यों में जिस समुदाय के लोग सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से तथा जनसंख्या के आधार पर अल्पसंख्यक हैं, उन्हें अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाए।
[25/02, 1*ओ_आई_सी_संयुक्त_राष्ट्र_ *सबसे_बड़ा_संगठन_है
पहली_बार_भारत_कॊ_इनवाइट_किया_गया_है*

मुस्लिम बहुल देशों के शक्तिशाली संगठन
ओआईसी के विदेश मंत्रियों के उद्घाटन पूर्ण सत्र में भारत को आमंत्रित किया गया है।
भारत को ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कॉर्पोरेशन (ओआईसी) की 50वी वर्षगांठ में गेस्ट_ऑफ_ऑनर’ के तौर पर आमंत्रित किया गया है।

ओआईसी के विदेश मंत्रियों की परिषद का 46वां सत्र 1 और 2 मार्च को अबू धाबी में होगा।

गौरतलब है कि ओआईसी आमतौर पर पाकिस्तान का समर्थक है और कश्मीर मुद्दे पर अक्सर ही पाकिस्तान का पक्ष लेता है।

विदेश_मंत्रालय ने बताया है कि संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने सुषमा को गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर आमंत्रित किया है और भारत इस न्योते को स्वीकार कर खुश है।

संयुक्त_राष्ट्र_के_बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा संगठन
‘ ओआईसी ‘ पाकिस्तान और बंगलादेश हैं इसके सदस्य लेकिन भारत नहीं क्यों

इस्लामिक_सहयोग_संस्था – यह एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जिसकी स्थापना 26 सितंबर 1969 में हुई थी।ओआईसी ‘ संयुक्त राष्ट्र ‘ के बाद विश्व की दूसरी सबसे बड़ी संस्था कही जाती है। यह एक धार्मिक संस्था है जो मुस्लिम धर्म से सम्बन्धित है।

 *57 मुस्लिम देश इस संस्था के सदस्य है। जो प्रकार है-*

अफ़्रीकी_देश – अल्जीरिया, बेनिन, बुर्किना फासो, कैमरून, कोमोरोस, चाड, जिबूती(Djibouti), मिस्र, गैबॉन , गाम्बिया , गिनी-बिसाऊ,
गिन्नी, आइवरी कोस्ट , लीबिया, माली ,मॉरिटानिया ,मोरक्को, मोजाम्बिक , नाइजर, नाइजीरिया, सेनेगल, सियार लिओने , सोमालिया ,सूडान , टोगो , ट्यूनीशिया, युगांडा
एशियाई_देश- अफ़ग़ानिस्तान , बहरीन, बांग्लादेश , ब्रूनेई , इंडोनेशिया , ईरान , इराक , जॉर्डन , कजाखस्तान , कुवैट , किर्गिज़स्तान , लेबनान ,मलेशिया , मालदीव , ओमान , पाकिस्तान , फिलिस्तीन , कतर , सऊदी अरब ,, सीरिया तजाकिस्ता , तुर्कमेनिस्तान , संयुक्त अरब अमीरात .
उज़्बेकिस्तान , यमन

यूरोपीय_देश – अल्बानिया , अज़रबाइजान , तुर्की
दक्षिण_अमेरिकी_देश – गुयाना , सूरीनाम

इसके साथ-साथ ‘ रूस ‘ और ‘ थाईलैंड ‘ इस संस्था के पर्यवेक्षक सदस्य है।

 *ओ_आई_सी_का_मूल_उद्देश्य_है*

 इस्लामी सामाजिक और आर्थीक मूल्यों की रक्षा करना।

संस्था के सभी सदस्यो के बीच एकजुटता को बढ़ावा देना

सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक, और राजनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए आपस के सहयोग को बढ़ावा देना।

 अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखना एवं मुस्लिम जगत के हितों की रक्षा करना।

 संयुक्त राष्ट्र की तरह इनकी भी मानवाधिकार की एक मापदंड है और इस संस्था का उद्देश्य है, कि दुनिया में मुसलमानो के मानवाधिकार का हनन न हो।
परन्तु इस संस्था की गौर से समीक्षा की जाए तो इसकी दोहरी मापदंड स्पष्ट छलकती है इसे हम भारत के साथ भी जोर कर देखा सकते है। इंडोनेशिया के बाद विश्व की सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी भारत में रहती है

 जो कि विश्व के किसी भी देश से ज्यादा है इस नजरिये से देखा जाए तो ओआईसी की सदस्यता प्राप्त करने की सबसे मजबूत दावेदारी भारत की है।
लेकिन यह एक बड़ी विडंबना ही की जहाँ विश्व की दूसरी सबसे बरी मुस्लिम आबादी रहती है उस देश के पास इस संस्था की सदस्यता नहीं है

 वही_रूस_एवं_थाईलैंड जहाँ मुस्लिम आबादी न के बराबर है और ये दोनों देश इस संस्था के पर्यवेक्षक सदस्य है।

हालांकि भारत भी इसकी सदस्यता के लिए उत्सुक नहीं है और कोई ख़ास प्रयास भी नहीं करता है।

 2006 में सऊदी शासक ‘ अब्दुल्ला बिन अब्दुल अजीज अल सऊद ‘ ने भारत की तरफ से पर्यवेक्षक सदस्यता की बात ओआईसी में रखने की पेशकश की थी लेकिन पाकिस्तान के विरोध की वजह से यह बात आगे नहीं बढ़ सकी।
अब हालाँकि माहौल ऐसा बन बन गया है कि अगर भारत सदस्यता प्राप्त करने के लिया प्रस्ताव दे तो भारत को समर्थन मिल जाए #_नार्को_टेस्ट_क्या_है_और_कैसे_किया_जाता_है
#_नार्को_टेस्ट_में_व्यक्ति_हमेशा_सच_ही_क्यॊ_बोलता_हे

 नार्को टेस्ट में व्यक्ति को #_ट्रुथ_सीरम_इंजेक्शन के द्वारा दिया जाता है जिससे व्यक्ति स्वाभविक रूप से बोलता है।
नार्को विश्लेषण एक #_फोरेंसिक परीक्षण होता है, जिसे #_जाँच_अधिकारी_मनोवैज्ञानिक_चिकित्सक_और_फोरेंसिक_विशेषज्ञ की उपस्थिति में किया जाता है।

#_भारत में हाल के कुछ वर्षों से ही ये परीक्षण आरंभ हुए हैं, किन्तु बहुत से विकसित देशों में वर्ष 1922 में मुख्यधारा का भाग बन गए थे,

 #_जब_राबर्ट_हाउस_नामक_टेक्सास_के_डॉक्टर ने स्कोपोलामिन नामक ड्रग का दो कैदियों पर प्रयोग किया था।

#_एमोबार्बिटल_नार्को_विशलेषण शब्द नार्क से लिया गया है, जिसका अर्थ है नार्कोटिक।
#_हॉर्सले_ने_पहली बार नार्को शब्द का प्रयोग किया था।

 #_नार्को_परीक्षण_करने_के_लिए सोडियम पेंटोथॉल, सोडियम एमेटल ,
इथेनॉल , बार्बिचेरेट्स ,

 स्कोपोल-अमाइन, टेपाज़ेमैन आदि को आसुत जल में मिलाया जाता है।

 परीक्षण के दौरान व्यक्ति को #_सोडियम_पेंटोथॉल का इंजेक्शन लगाया जाता है।
व्यक्ति को दवा की मात्रा उसकी आयु, लिंग, स्वास्थ्य और शारीरिक परिस्थिति के आधार पर दी जाती है।

यदि परीक्षण के दौरान अधिक मात्रा दे दी जाये तो वह #_कोमा_में भी जा सकता है या उसकी मृत्यु भी हो सकती है।

#_परीक्षण_में_प्रश्नों के उत्तर देते हुए पूरी तरह से व्यक्ति होश में नहीं होता है और इसी कारण से वह प्रश्नों के सही उत्तर देता है

क्योंकि वह उत्तरों को घुमा-फिरा पाने की स्थिति में नहीं होता है। इस ड्रग के प्रभाव में न केवल वह अर्ध बेहोशी की हालत में चला जाता है बल्कि उसकी तर्क बुद्धि (रिजिनिंग) भी कार्यशील नहीं रहती है।

वह व्यक्ति जो एक तरह से सम्मोहन अवस्था में चला गया होता है, वह अपनी तरफ़ से अधिक कुछ बोलने की स्थिति में नहीं होता बल्कि पूछे गए कुछ सवालों के बारे में ही कुछ बता सकता है।

यह भी माना जाता है कि नार्को टेस्ट में व्यक्ति हमेशा सच ही उगलता है, जबकि बहुत कम किन्तु फिर भी उस अवस्था में भी वह झूठ बोल सकता है, एवं विशेषज्ञों को गुमराह कर सकता है।

#_विश्व_में_प्रयोग_नार्को_टेस्ट_का

जहाँ विकसित विश्व के बहुत से देशों ने ऐसे परीक्षणों को अन्वेषण से मुख्य रूप से पृथक कर दिया हो, अधिकतर गणतांत्रिक विश्व जिनमे अमेरिका और ब्रिटेन भी शामिल हैं,

 वहाँ ऐसे परीक्षण कुछ समय से प्राय: लुप्त हो गए हैं। भारत में इसका प्रयोग आरंभ होने के बाद किसी अपराध के संदिग्ध को पकड़ते ही लोग उसके नार्को परीक्षण की मांग करने लगते हैं। उनका ये मानना होता है कि इस परीक्षण के बाद सच्चाई सामने निश्चित ही आ जायेगी, जबकि इसके पूरे प्रतिशत नहीं होते हैं।

#_भारतीय_संविधान का एक प्रमुख तत्त्व है
धारा 20 अनु.3 इसके तहत "किसी व्यक्ति को जिस पर कोई आरोप लगे हैं, उसे अपने विरुद्ध गवाह के रूप में प्रयोग नहीं किया जाएगा।"

यदि नार्को परीक्षण की मूल अंतर्वस्तु को समझाने की कोशिश करेंगे तो इसके द्वारा व्यक्ति को किसी रूप में स्वयं के विरुद्ध ही गवाह के रूप में प्रयोग किए जाने की संभावना बनी रहती है।

लेकिन विगत कुछ निर्णयों में माननीय न्यायालयों के द्वारा परीक्षण के पक्ष में मत दिया गया है।
#_भारत_के_मानसिक_स्वास्थ्य_संस्थान #_नेशनल_इंस्टिटयूट_ऑफ_मेण्टल_हेल्थ_एण्ड_न्यूरो_साइंसेस (निम्हैन्स) के निदेशक की अध्यक्षता में बनी विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों की समिति कमेटी ने ब्रेन मैपिंग आदि परीक्षणों के बरे में कहा है कि ये परीक्षण अवैज्ञानिक हैं और उन्हें जांच के उपकरण के रूप में प्रयोग करने पर तत्काल रोक भी लगानी चाहिए।

 नार्को परीक्षण के अलावा सच उगलवाने के लिए #_पॉलीग्राफ_लाईडिटेक्टर_टेस्ट_और_ब्रेन_मैपिंग_टेस्ट किया जाता है।

#_उच्चतम_न्यायालय_का_निर्णय

5 मई 2010 को दिये अपने एक निर्णय में भारत के उच्चतम न्यायालय ने बिना सहमति के कराये गये नार्को, ब्रेन मैपिंग और पॉलीग्राफ आदि परीक्षणों को अवैधानिक या अवैध करार दिया है।
न्यायालय ने व्याख्या दी है कि ऐसा करना व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है।
[25/02, 11:28 PM] 🚀परमाणु बम के बारे में 10 रोचक तथ्य

🚀🚀परमाणु बम एक प्रकार का विस्फोटक हथियार है जो परमाणु विखंडन या संलयन के माध्यम से परमाणु प्रतिक्रियाओं का उपयोग करता है. इस तरह के हथियार भारी मात्रा मे उर्जा छोड़ते हैं और इसीलिए ये विनाश का कारण भी बनता है. सबसे पहले परमाणु बम का प्रयोग द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुआ था. इन हतियारों को काफी विनाशकारी माना जाता है क्योंकि एक ही बम लाखों लोगों को मारने और पूरे शहर को नष्ट करने की क्षमता रखता है. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं परमाणु बम के बारे में और कब इसको हिरोशिमा और नागासाकी में गिराया गया था और इसके क्या परिणाम हुए थे, इत्यादि.
परमाणु बम के बारे में रोचक तथ्य

🚀1. परमाणु बम में युरेनियम या प्लूटोनियम के परमाणु विखंडन से ऊर्जा उत्पन्न होती है. इसके लिए परमाणु के केंद्रक में न्यूट्रॉन से चोट किया जाता है जिससे बहुत बड़ी मात्रा में उर्जा उत्पन्न होती है. इसी प्रक्रिया को नाभिकीय विखंडन भी कहते हैं. ये हम सब जानते हैं कि परमाणु बम इतना खतरनाक होता है कि अगर कहीं गिरा दिया जाए तो दशकों तक जन-जीवन का निशान नहीं रहेगा और पेड़ पौधे भी उग नहीं पाएंगे. जैसा कि जापान के दो शहर हिरोशिमा और नागासाकी में हुआ जब अमेरिका ने परमाणु बम गिराए थे.

🚀2. 6 अगस्त, 1945 को, संयुक्त राज्य अमेरिका ने जापान (हिरोशिमा) में अपना पहला परमाणु बम गिराया था. तीन दिन बाद, 9 अगस्त, 1945 को, जापान का नागासाकी अमेरिका का अगला लक्ष्य बना था. पहला परमाणु बम का उपनाम था 'लिटिल बॉय' और दूसरे का 'फैट मैन'. जो बम नागासाकी पर गिराया गया था वो पहले जापान के कोकुरा शहर पर गिराया जाना था लेकिन मौसम खराब होने के चलते नागासाकी पर ही गिरा दिया गया. क्योटो शहर पर भी इस बम को गिराने का प्लान था लेकिन युद्ध के सेक्रेटरी हेनरी स्टिमसन ने इस जगह को बदलवा दिया था.

🚀3. संयुक्त राज्य अमेरिका युद्ध में परमाणु हथियारों का उपयोग करने वाला पहला और एकमात्र राष्ट्र बन गया.

🚀4. जिस विमान से हिरोशिमा पर बम गिराया गया था उसका नाम "Enola Gay" और जिस विमान से दूसरा बम गिराया गया था उसका नाम "Bockscar" था. दोनों परमाणु बम जमीन से कुछ 100 फीट की उंचाई पर हवा में फटे थे.

🚀5. पहले परमाणु हथियार जे रॉबर्ट ओपेनहाइमर के नेतृत्व में उनकी एक वैज्ञानिक टीम ने विकसित किए थे. हम आपको बता दें कि परमाणु हथियार दो प्रकार के होते हैं: विखंडन और थर्मोन्यूक्लियर. विखंडन बम में विखंडन प्रतिक्रियाओं का प्रयोग किया जाता है और ऊर्जा निकलती है वहीं थर्मोन्यूक्लियर बम को हाइड्रोजन बम या एच-बॉम्ब भी कहा जाता है.

🚀6. ऐसा कहा जाता है कि जब परमाणु बम को जापान के दो शहरों में गिराया गया था तब परिणामस्वरूप 1,40,000 से ज्यादा लोग हिरोशिमा में और लगभग 74000 नागासाकी में 1945 के अंत तक मारे गए थे. और हज़ारों लोग अभी भी विकिरण बीमारी से पीड़ित हैं.

🚀7. हिरोशिमा में बम के गिरने से 15,000 टन टीएनटी का विस्फोट होने की कारण काफी प्रभाव पड़ा जिसके परिणामस्वरूप 70% इमारतों को नष्ट कर दिया गया था. जब विस्फोट हुआ था तब 500 मीटर के भीतर 90% लोग तीन सप्ताह में गंभीर जलन या विकीरण की उच्च खुराक से मर गए थे.

🚀8. हिरोशिमा विस्फोट के दौरान बम विस्फोट की साइट के पास तापमान 300,000 डिग्री सेल्सियस (540,000 डिग्री फ़ारेनहाइट) और लगभग 4,000 डिग्री सेल्सियस जमीन के नीचे होने का अनुमान लगाया गया था. यानी कि यह तापमान स्टील को पिघलाने के लिए काफी होता है. इस हमले से 1005 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चली थी और 10 वर्ग किलोमीटर में गहरे गढ्ढे बन गए थे और 500 मीटर तक 19 Tons Per Square Inch का प्रेशर Create हुआ था. यह किसी भी विशाल बिल्डिंग को हवा में उड़ाने के लिए काफी था.

🚀9. हिरोशिमा के परमाणु बम विस्फोट के एक महीने बाद, एक चक्रवात भी आया था जिसके कारण शहर में लगभग 2,000 लोगों की मौत हो गई थी. यहीं आपको बता दें कि अमेरिकी में 10% बिजली विघटित परमाणु बम से बनी है.

🚀10. न्यू मैक्सिको में एक परमाणु बम संग्रहालय है, इसका मिशन परमाणु इतिहास और विज्ञान के लिए अमेरिका के संसाधन के रूप में कार्य करना है. संग्रहालय प्रति वर्ष केवल 12 घंटे के लिए ही खुलता है. 1950 के दशक में, लास वेगास को मिस परमाणु बम का ताज पहनाया गया था.
🚀😂जापान के राजा हिरोहित्तो (Hirohito) ने नागासाकी परमाणु हमले के 6 दिन बाद अमेरिकी सेना के सामने आत्म समर्पण कर दिया था. ऐसा कहा जाता है कि अगर जापान सरेंडर नहीं करता तो अमेरिका ने 19 अगस्त को एक और शहर पर परमाणु बम गिराने की योजना बनाई थी. तो अब आपको ज्ञात हो गया होगा कि परमाणु बम क्या होता है और किस प्रकार से हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराया गया था और फिर उसके क्या-क्या परिणाम हुए
 *संविधान के अनुच्छेद 244(1) के अंतर्गत असम, मेघालय, त्रिपुरा एवं मिजोरम से भिन्न राज्यों में अनुसूचित क्षेत्रों कहे जाने वाले* कुछ क्षेत्र (फिर चाहे ये क्षेत्र किसी राज्य में हों अथवा संघ शासित क्षेत्र में) के प्रशासन हेतु कुछ विशेष प्रावधान किए गए हैं।

ऐसा इन क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों के पिचादेप्न को अधर बना कर किया गया है।

किसी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र घोषित करने का अधिकार संविधान द्वारा राष्ट्रपति को प्रदान किया गया है, किंतु ऐसा वह संसद द्वारा पारित विधान के अधीन रहते हुए ही कर सकता है।

इसके अतिरिक्त वह किसी भी समय किसी भी क्षेत्र के अनुसूचित क्षेत्र के स्तर को समाप्त कर सकता है।

अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन से सम्बन्धित विशेष प्रावधान संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत किए गए हैं।

 *अनुसूचित क्षेत्रों का प्रशासन*

अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के सम्बन्ध में संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार इन क्षेत्रों से सम्बन्धित राज्यों को प्रशासन सम्बन्धी आवश्यक निर्देश देने तक ही होगा।

अनुसूचित क्षेत्र वाले राज्य का राज्यपाल प्रतिवर्ष अथवा मांगे जाने पर उक्त राज्य के अनुसूचित क्षेत्र के प्रशासन सम्बन्धी अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत करेगा।

वह चाहे तो सम्बन्धित राज्य के राज्यपाल से विचार-विमर्श करके किसी भी अनुसूचित क्षेत्र के क्षेत्रफल में वृद्धि कर सकता है, उनके सीमा क्षेत्र में परिवर्तन कर सकता है तथा उसके पुनर्निर्धारण के आदेश प्रेषित कर सकता है।

 *राज्यपाल की कानून निर्माण संबंधी शक्तियां*

राज्यपाल को यह प्राधिकार है कि वह कभी भी संबद्ध क्षेत्र में कल्याण एवं शांति हेतु निर्देश दे सकता है।

वह अनुसूचित क्षेत्र के लोगों के बीच परस्पर भूमि के आदान-प्रदान या स्थानांतरण पर प्रतिबंध लगा सकता है।

वह भूमि के आबंटन पर नियंत्रण संबंधी निर्देश दे सकता है।

वह उन व्यावसायिकों व ऋणदाताओं को इन क्षेत्रों के अनुसूचित जनजातियों के लोगों को उधार न देने संबंधी कानून बना सकता है।

इसके अतिरिक्त वह राष्ट्रपति की सहमति से संसद या विधान सभा द्वारा आरोपित, कुछ समय के लिए प्रभावी कानून को संशोधित कर सकता है या समाप्त कर सकता है।

वस्तुतः राज्यपाल द्वारा किसी भी प्रकार के कानून निर्माण इत्यादि के लिए राष्ट्रपति की अनुमति अत्यंत आवश्यक है।

 *जनजातीय सलाहकार परिषद्*

संविधानतः अनुसूचित क्षेत्र वाले राज्य की अनुसूचित जनजातियों के कल्याण एवं उन्नति संबंधी ऐसे विषयों पर परामर्श प्रदान करने हेतु, जो उसे राज्यपाल द्वारा निर्दिष्ट किए जाएं, जनजातीय सलाहकार परिषदों का गठन किया जाएगा (अनुसूची-V)।

इस परिषद में 20 से अधिक सदस्य नहीं होंगे तथा जिनमें से तीन-चौथाई राज्य विधान सभा में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधि होंगे।

यदि राज्य विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधियों की संख्या परिषद में भरे जाने वाले पदों की संख्या से कम होगी तो शेष पदों को उन क्षेत्रों के अन्य सदस्यों से भरा जाएगा।

 *इस संबंध में राज्यपाल को निम्नलिखित नियम बनाने का प्राधिकार है-*

परिषद की सदस्य संख्या उनके अध्यक्ष व अन्य अधिकारियों की नियुक्तियों की विधि तथा नियम

परिषद की विभिन्न सभाओं का संचालन तथा सामान्यतः इसकी कार्य-प्रक्रिया, तथा

अन्य आकस्मिक विषयादि।

यह सलाहकारी परिषद राज्य में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण व विकास हेतु अपनी महत्वपूर्ण सलाह प्रदान करती है।

 *पांचवीं अनुसूची में संशोधन*

संसद समय-समय पर इस अनुसूची के किसी भी प्रावधान को विधि द्वारा संशोधित व समाप्त कर सकती है।

जब अनुसूची का इस प्रकार संशोधन किया जाता है तब इस संविधान में इस अनुसूची के प्रति किसी निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह इस प्रकार संशोधित ऐसी अनुसूची के प्रति निर्देश है।

अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए इसे संविधान का संशोधान नहीं माना जाएगा।

अनुसूचित क्षेत्रों एवं उनके प्रशासन का उल्लेख संविधान की 5वीं अनुसूची में तथा जनजातीय क्षेत्रों एवं उनके प्रशासन का उल्लेख 6वीं अनुसूची के अंतर्गत किया गया है।

अनुसूचित क्षेत्रों के निर्धारण का अधिकार राष्ट्रपति को है।

 *जनजातीय क्षेत्र*

संविधान के अनुच्छेद-244(2) के अंतर्गत असम, मेघालय, त्रिपुरा एवं मिजोरम के जनजातीय क्षेत्रों के सम्बन्ध में व्यवस्था और उनके प्रशासन सम्बन्धी आवश्यक प्रावधानों का उल्लेख संविधान की 6वीं अनुसूची के अंतर्गत की गई है।

 *जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन*

6वीं अनुसूची में वर्णित असम, मेघालय, त्रिपुरा एवं मिजोरम राज्यों के जनजातीय क्षेत्र स्वशासी जिले के रूप में प्रशासित किए जाएंगे।

ये स्वशासी जिले राज्य सरकार के कार्यपालक प्राधिकार के बाहर तो नहीं हैं किंतु कुछ विधायी  एवं न्यायिक कृत्यों के प्रयोग के लिए जिला परिषद एवं प्रादेशिक परिषदों के सृजन का प्रावधान किया गया है।

ये परिषदें प्राथमिक रूप से पृथक् निकाय हैं और उन्हें कुछ विनिर्दिष्ट क्षेत्रों में विधान बनाने की शक्ति है, जैसे- आरक्षित वन से भिन्न वनों का प्रबन्ध, सम्पत्ति की विरासत, विवाह, सामाजिक रीति रिवाज, आदि।

इसके अतिरिक्त इन परिषदों को भू-राजस्व के निर्धारण एवं संग्रहण की तथा कुछ विनिर्दिष्ट कर आरोपित करने की शक्ति भी प्राप्त है।

इन परिषदों द्वारा बनाई गई कोई भी विधि राज्यपाल की अनुमति के बिना प्रभावी नहीं होगी।

जिन विषयों के सम्बन्ध में विधि निर्माण हेतु जिला एवं प्रादेशिक परिषदों को अधिकृत किया गया है, उन विषयों से सम्बन्धित राज्य विधानमण्डल द्वारा बनाए गए अधिनियम तब तक जनजातीय क्षेत्रों पर लागु नहीं होंगे जब तक कि सुसंगत जिला  परिषद् एक लोक अधिसूचना जारी करके तत्सम्बन्धी निदेश जारी न करे।

जिला एवं प्रादेशिक परिषदों को न्यायिक, सिविल एवं दांडिक शक्तियां प्राप्त होंगी और वे उच्च न्यायालय की अधिकारिता के इस प्रकार अधीन होंगी जो राज्यपाल समय-समय पर विनिर्दिष्ट करे।

संविधान के अंतर्गत असम, मेघालय, त्रिपुरा एवं मिजोरम राज्य जनजातीय क्षेत्र घोषित किए गए हैं।

ये जनजातीय क्षेत्र राज्य सरकार के कार्यपालक प्राधिकार के अधीन स्वशासी जिले के रूप में प्रशासित किए जाते हैं।

इन स्वशासी जिलों में जिला परिषद एवं प्रादेशिक परिषदों के गठन का प्रावधान संविधान में किया गया है।

परिषदों को न्यायिक, सिविल एवं दाण्डिक शक्तियां प्राप्त होती हैं।

‬: *Part-3* 

 *मौलिक अधिकार के विकासात्मक चरण*

अंग्रेजो ने सन 1215 मेँ इंग्लैंड के सम्राट जॉर्ज से नागरिकों के मूल अधिकारोँ की सुरक्षा प्राप्त की थी, यह अधिकार-पत्र मूल अधिकार से संबंधित प्रथम लिखित दस्तावेज है।

सन 1215 के मैग्ना कार्टा ,1679 के बंदी प्रत्यक्षीकरण अधिनियम, सन 1689 के बिल ऑफ राइट्स, सन 1776 की अमेरिकी स्वतंत्रता की घोषणा तथा 1789 की मानव अधिकार की फ्रांसीसी घोषणा इत्यादि मानव अधिकारोँ की मूल समस्या के समाधान मेँ मील का पत्थर हैं।

वर्तमान समय मे समाचार-पत्र मेँ छपे लेख एवं पोस्टकार्ड तक को रिट मानकर उच्चतम न्यायालय ने दीन दुखियों की पीड़ा को हरने का बीड़ा लिया है।

राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 359 के अधीन मौलिक अधिकारोँ को निलंबित कर सकता है।

 *स्मरणीय तथ्य*

सर्वप्रथम मौलिक अधिकारोँ की मांग कांग्रेस द्वारा अपने बंबई अधिवेशन मेँ उठाई गयी।

इस अधिवेशन के अध्यक्ष हसन इमाम थे।

कांग्रेस ने कराची अधिवेशन 1931 मेँ प्रस्ताव किया की भारतीय संविधान मेँ मौलिक अधिकारोँ की आवश्यक सूची को शामिल किया जाना चाहिए, इससे पूर्व नेहरु कमेटी ने 19 मौलिक अधिकारोँ का उल्लेख अपनी रिपोर्ट मेँ किया था।

संपत्ति का अधिकार पहले एक मौलिक अधिकार था लेकिन 44 वेँ संविधान संशोधन अधिनियम (1978) द्वारा इसे मौलिक अधिकारोँ की श्रेणी से निकाल कर एक कानूनी अधिकार बना दिया गया।

मैग्ना कार्टा अधिकारों का वह प्रपत्र है जिसे इंग्लैण्ड के किंग जॉर्ज द्वारा 1215 में सामंतों के दबाव में जारी किया गया, यह नागरिकोँ के मूल अधिकारो से संबंधित पहला लिखित प्रपत्र था।

भारत मेँ सभी व्यक्तियोँ (नागरिकोँ एवं विदेशियोँ) को दिए जाने वाले मूल अधिकार अनुच्छेद 14, 21, 23, 25, 27 और 28 मेँ समाहित हैं।

अस्पृश्यता को संविधान मेँ परिभाषित नहीँ किया गया है।

1954 मेँ भारत सरकार ने चार प्रकार के नागरिक सम्मान प्रारंभ किए - भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री।

भारत सरकार द्वारा प्रदान उपाधियां भारत रत्न, पद्म विभूषण, पद्म भूषण, पद्म श्री आदि को जनता पार्टी सरकार ने 1977 मेँ समाप्त कर दिया गया था, जो कि 1980 मेँ फिर चालू हो गया।

जब अनुच्छेद 352 के अधीन आपात उद्घोषणा की जाती है तो अनुच्छेद 19 निलंबित हो जाता है।

गिरफ्तार अथवा हिरासत मेँ लिए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के स्थान से मजिस्ट्रेट के न्यायालय मेँ आवश्यक समय के अतिरिक्त ऐसी गिरफ़्तारी से 24 घंटे की अवधि मेँ निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा।

इन 24 घंटो मेँ यात्रा मेँ लगा समय शामिल नही होता।

राष्ट्रपति के विशेष अधिकार द्वारा अनुच्छेद 20 व 21 मेँ निहित अधिकारोँ को छोडकर अन्य समस्त मौलिक अधिकारोँ को निलंबित किया जा सकता है।

50वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अनुच्छेद 33 का विस्तार कर इंटेलिजेंस, दूरसंचार तथा पैरा मिलिट्री के सदस्योँ को भी इसमेँ सम्मिलित कर लिया गया।

अनुच्छेद 359 के द्वारा राष्ट्रपति घोषणा कर सकता है, कि जब तक आपातकाल की घोषणा जारी रहैगी तब तक मौलिक अधिकार निलंबित रहेंगे।

मौलिक अधिकारोँ का उल्लंघन होने पर सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय मेँ अपील की जा सकती है।

निवारक निरोध कानून के तहत किसी व्यक्ति को अपराध करने के पूर्व ही गिरफ्तार किया जा सकता है।

संवैधानिक उपचारोँ का अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारोँ के लिए प्रभावी कार्यविधियां प्रतिपादित करता है।

इसलिए इसको संविधान की आत्मा कहा जाता है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 1932 के गोल मेज सम्मेलन मेँ मांग रखी थी की भारत के लिए जो संविधान बनाया जाए उसमेँ भाषाई और धार्मिक स्वतंत्रताएं अवश्य शामिल की जाएं।

1945 में तेज बहादुर सप्रू समिति के प्रस्तावोँ मेँ दो प्रकार के अधिकारोँ की चर्चा थी - न्याय योग्य अधिकार और वाद योग्य अधिकार।

संविधान सभा मेँ मूल अधिकारोँ की उप-समिति ने जो प्रारुप सूची फरवरी 1948 को तैयार की मूल अधिकारोँ का वही प्रारुप संविधान मेँ शामिल किया गया।

संसद मेँ अनुच्छेद 35 के अंतर्गत अस्पृश्यता निवारक अधिनियम, 1955 को 1976 मेँ संशोधित करते हुए अस्पृश्यता बरतने पर कैद और कठोर दंड की व्यवस्था की।

अनुच्छेद 19 को सभी मूल अधिकारोँ मेँ आवश्यक अथवा मूल अधिकार के अध्याय का केंद्र कहा गया है।

पिछड़े वर्गों के लिए 1953 मेँ काका कालेकर आयोग की स्थापना की गई थी, जिसने सन 1955 में अपनी रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत की थी।

इस रिपोर्ट सरकार 2399 जातियों को सामाजिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़ी हुई माना गया था, जिनमे 837 जातियां अत्यधिक पिछड़ी हुई थीं।

 *1 जनवरी, 1979 को मंडल आयोग की स्थापना की गई।*

 वी. पी. मंडल को इस आयोग के अध्यक्ष थे।

मंडल आयोग ने 31 दिसंबर, 1980 को अपनी रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत की थी।

इस रिपोर्ट में 3743 जातियों को पिछड़ा हुआ माना गया था।

मंडल आयोग की रिपोर्ट के आधार पर 13 अगस्त, 1990 को प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह के नेतृत्व मेँ केंद्रीय सरकार ने एक कार्यालय ज्ञापन निकाला तथा सामाजिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्गो के लिए 27 प्रतिशत अतिरिक्त स्थान आरक्षित कर दिए गए।

अनुच्छेद 18 केवल निर्देशात्मक है, आदेशात्मक नहीँ है
* #भारत_का_संविधान *
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1. संविधान क्या होता है ?
►लिखित और मौलिक दस्तावेज जिसके आधार पर किसी भी देश की शासन व्यवस्था संचालित की जाती है ।
2. भारतीय संविधान का निर्माण करने वाली संविधान सभा का गठन कब हुआ ?
►जुलाई 1946 ई.
3. संसार का सबसे बड़ा संविधान किस देश का है ?
►भारत
4. भारत के संविधान को बनने में कितना समय लगा ?
►2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन
5. शुरू में संविधान में कितने अनुच्छेद, भाग और अनुसूचियां थीं ?
►395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां ।
6.संविधान का निर्माण किसके द्वारा किया गया ?
►संविधान सभा ( चुने हुए प्रतिनिधियों की सभा)
7.संविधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या कितनी निर्धारित की गई ?
►389
8. संविधान सभा का प्रथम अधिवेशन कब संपन्न हुआ ?
►9 दिसंबर 1946 ई.
9. संविधान सभा के प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की ?
►डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा
10. संविधान सभा का स्थायी अध्यक्ष किसे नियुक्त किया गया ?
►डॉ. राजेंद्र प्रसाद (11 दिसंबर 1946 को)
11. भारतीय संविधान की नींव किसे माना गया ?
►उद्देश्य प्रस्ताव को ।
12. संविधान सभा के समक्ष उद्देश्य प्रस्ताव को किसने पेश किया ?
►पंडित जवाहरलाल नेहरू (13 दिसंबर 1946 को)
13. संविधान की प्रारूप समिति का अध्यक्ष किसे बनाया गया ?
►डॉ. भीमराव अंबेडकर
14. प्रारूप समिति में कितने सदस्य थे ?
►सात
15. संविधान को कब अंगीकृत किय गया ?
►26 नवंबर 1949
16. संविधान के अंगीकृत करते समय कितने सदस्यों ने हस्ताक्षर किए ?
►284
17. भारतीय संविधान कब लागू किया गया ?
►26 जनवरी 1950
18. भारतीय संविधान का जनक किसे कहा जाता है ?
►डॉ. भीमराव अंबेडकर
19.संविधान सभा की अंतिम बैठक कब हुई थी ?
►24 जनवरी 1950
20. डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत का राष्ट्रपति कब चुना गया ?
►24 जनवरी 1950 ई.
21. ‘पंथनिरपेक्ष’ तथा ‘समाजवादी’ शब्द संविधान में किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया ?
►42वें संशोधन (1976)
22. संविधान की कुंजी किसे कहा जाता है ?
►संविधान की प्रस्तावना
प्रस्तावना- “हम भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी पंथ-निरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजैनिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरीमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर 1949 को एतद् द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं ।“
23. संविधान में ‘गणतंत्र प्रणाली’ का स्त्रोत क्या है ?
►फ्रांस
24. ‘आपातकालीन उपबंध’ संविधान में कहां से लिए गए हैं ?
►जर्मनी
25. ‘राज्य के नीति-निर्देशक तत्व’ किस देश से लिए गए हैं ?
►आयरलैंड
26. ‘संविधान संशोधन प्रणाली’ को किस देश के संविधान से लिया है ?
►दक्षिण अफ्रीका
27. भारतीय संविधान में ‘मौलिक कर्तव्य और नियोजन प्रणाली’ किस देश से ली गई है ?
►रूस
28. संविधान में शामिल ‘कानून द्वारा स्थापित शब्दावली’ का स्त्रोत कौन-सा देश है ?
►जापान
29. ‘संविधान की प्रस्तावना की भाषा, समवर्ती सूची, केंद्र-राज्य के बीच शक्तियों का विभाजन’ किस देश से लिया गया है ?
►ऑस्ट्रेलिया
30. ‘संघात्मक शासन व्यवस्था एवं अवशिष्ट शक्तियों का केंद्रीकरण’ को किस देश के संविधान से लिया गया है ?
► कनाडा
31. भारतीय संविधान में ‘मौलिक अधिकार, सुप्रीम कोर्ट का गठन और अधिकार’ किस देश के संविधान से लिया गया है ?
►संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए)
32. उपराष्ट्रपति का पद कहां से लिया गया है ?
►यूएसए
33. किस देश संसदीय शासन प्रणाली को भारतीय संविधान में शामिल किया गया है ?
►ब्रिटेन
34. किस देश की कानून निर्माण प्रक्रिया को संविधान में शामिल किया गया है ?
►ब्रिटेन
35. एकल नागरिकता, संसदीय विशेषाधिकार, मंत्रिपरिषद का लोकसभा के प्रति उत्तरदायित्व, राष्ट्रपति का संवैधानिक प्रमुख के रूप में अस्तित्व और अखिल भारतीय सेवा प्रणाली किस देश से प्रभावित है ?
►ब्रिटेन
36. भारतीय संविधान की विशेषताएं क्या हैं ?
►लिखित और लोकनिर्मित संविधान
कई संविधानों का समावेश
नम्य और अनम्य का मिश्रण
विश्व का सबसे बड़ा संविधान
एकात्मक और संघात्मक शासन का समन्वित रुप
मौलिक अधिकारों की न्यायिक प्रकृति
स्वतंत्र व निपष्क्ष न्याय प्रणाली
लोकतांत्रिक व्यवस्था
37. वर्तमान में संविधान में कितनी अनुसूचियां हैं ?

►12

Sunday, 24 February 2019

*
 *संविधान, किसी देश का उच्चतम कानून होता है।*
इनमेँ उन मूलभूत सिद्धांत का वर्णन होता है जिन पर किसी देश की सरकार और प्रशासन की प्रणाली टिकी होती है।

भारतीय प्रशासन के संवैधानिक संदर्भ का आश्रय भारतीय प्रशासन के उनके अधिकार और राजनीतिक ढांचों से है, जिनका निर्धारण भारतीय संविधान द्वारा किया गया है।

दूसरे शब्दोँ मेँ, हम कह सकते है कि भारतीय प्रशासन की प्रकृति, संरचना, शक्ति और भूमिका भारतीय संविधान के सिद्धांतों और प्रावधानोँ द्वारा निर्धारित एवं प्रभावित है।

भारतीय संविधान की रचना कैबिनेट मिशन योजना के तहत् वर्ष 1946 मेँ गठित संविधान सभा द्वारा की गई थी।

इस संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे- डॉ. बी. आर. अंबेडकर उस सात सदस्यीय प्रारुप समिति के अध्यक्ष थे जिसने संविधान का प्रारुप तैयार किया था।

 संविधान सभा ने संविधान के निर्माण मेँ *दो वर्ष, 11 माह और 18 दिन* का समय लिया।

 *भारतीय संविधान 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया तथा 26 जनवरी 1950 से प्रभावी हुआ।*

इसी दिन से भारत एक गणतंत्र बन गया।

भारतीय संविधान विश्व के लिखित एवं विस्तृत संविधानों मेँ से एक है।

 *मूलतः इस संविधान मेँ 22 अध्याय, 395 अनुच्छेद और 8 अनुसूचियां थीं।*

वर्तमान मेँ इसमेँ 24 अध्याय, लगभग 450 अनुच्छेद और 12 अनुसूचियाँ शामिल हैँ।

संविधान की प्रस्तावना द्वारा भारत को संप्रभुता संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और प्रजातांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया है।

इसके अतिरिक्त संविधान के उद्देश्यों के रुप में न्याय, स्वतंत्रता समानता और भाईचारे की भावना को प्रमुखता प्रदान की गई है।

संविधान की प्रस्तावना मेँ समाजवादी और पंथ निरपेक्ष शब्दोँ को 42 वेँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के द्वारा जोड़ा गया है।

 *भारतीय प्रशासन के संवैधानिक संदर्भ के विभिन्न पहलुओं की व्याख्या निम्नलिखित शीर्षकों के तहत् की गई है-*

*मौलिक अधिकार

*राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत

*मौलिक कर्तव्य

 *संघीय प्रणाली*

केंद्र और राज्य के बीच विधायी संबंध

केंद्र और राज्य के बीच प्रशासनिक संबंध

केंद्र राज्य के मध्य वित्तीय संबंध

 *संसदीय प्राणाली*

संविधान-एक झलक

10. संविधान की अनुसूचियाँ

 *मौलिक अधिकार Fundamental Rights*

मौलिक अधिकारोँ का उल्लेख संविधान के भाग तीन में अनुच्छेद 12 से 35 मेँ है।

संविधान निर्माताओं को इस संदर्भ में संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान (बिल ऑफ राइट्स) से प्रेरणा मिली थी।

संविधान मेँ भारतीय नागरिकोँ के मौलिक अधिकारोँ की गारंटी दी गई है। इसका आशय 2 चीजो से है- पहला संसद इन अधिकारोँ को निरस्त या कम केवल संविधान संशोधन करके ही कर सकती है और यह संशोधन संविधान की धारा 368 में उल्लिखित क्रियाविधि के अनुसार ही किया जा सकता है।

इन अधिकारोँ के संरक्षण का उत्तरदायित्व उच्चतम नन्यायालय पर है।

अर्थात मौलिक अधिकारोँ को लागू करने के लिए पीड़ित व्यक्ति सीधे उत्तम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।

 *मौलिक अधिकार औचित्यपूर्ण हैं, परंतु निरपेक्ष नहीँ।*

सरकार इन पर न्यायोचित प्रतिबंध लगा सकती है, परंतु इन प्रतिबंधोँ के औचित्य या अनौचित्य का निर्धारण उच्चतम न्यायालय द्वारा किया जाता है।

ये अधिकार राज्य द्वारा अतिक्रमण किए जाने के विरुद्ध नागरिकोँ की स्वतंत्रताओं और अधिकारोँ की सुरक्षा करते हैँ।

संविधान के अनुच्छेद 12 के अनुसार राज्य के अंतर्गत भारत सरकार, संसद तथा राज्योँ की सरकारें, विधान सभाएँ तथा भारत के राज्य क्षेत्र के भीतर या भारत सरकार के नियंत्रण के अधीन सभी स्थानीय और अन्य प्राधिकरण शामिल हैँ।

सभी न्यायालय किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन करने वाले विधायिका के कानूनों और कार्यपालिका के आदेशो को असंवैधानिक और गैर कानूनी घोषित कर सकते हैं (अनुच्छेद 13)।

मौलिक अधिकार राजनीतिक प्रजातंत्र के आदर्शोँ को बढ़ावा देने और देश मेँ अधिनायकवादी शासन की प्रवृत्ति को रोकने के लिए हैं।

संविधान मेँ मूलतया 7 मौलिक अधिकारोँ का प्रावधान था।

संविधान के 44 वेँ संशोधन अधिनियम 1978 के माध्यम से मौलिक अधिकारोँ की सूची से संपत्ति के अधिकार को हटा दिया गया है।

 *इसलिए अब केवल 6 मौलिक अधिकार हैं यथा –*
समता का अधिकार

कानून (विधि) के समक्ष समानता अथवा समान कानूनी संरक्षण (अनुच्छेद 14)

धर्म, मूल, जाति, लिंग और जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध (अनुच्छेद 15)

लोक नियोजन मामलोँ मेँ अवसर की समानता (अनुच्छेद 16)

अस्पृश्यता (छुआछूत) का अंत तथा इस प्रकार के किसी भी आचरण पर रोक (अनुच्छेद 17)

पदवियों का अंत (सैन्य और शैक्षिक उपाधियों) को छोड़कर (अनुच्छेद 18)

 *स्वतंत्रता का अधिकार*

 *सभी नागरिकोँ को अनुच्छेद 19-*

वाक् स्वतंत्रता (बोलने की आजादी) और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

शांतिपूर्ण और निःशस्त्र सम्मेलन की स्वतंत्रता

 *संगठन या संघ बनाने की स्वतंत्रता*

भारत के राज्य क्षेत्र मेँ सर्वत्र स्वतंत्र रुप से घूमने फिरने की स्वतंत्रता

भारत के राज्य क्षेत्र के किसी भाग मेँ बसने और रहने की स्वतंत्रता

कोई व्यवसाय, उपजीविका, व्यापार व कारोबार करने की स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त होगा

अपराधो के लिए दोष सिद्धि के संबंध मेँ संरक्षण
(अनुच्छेद 20)

जीवन और स्वतंत्रता (व्यक्तिगत) का संरक्षण (अनुच्छेद 21)

आरंभिक शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21 क), जिसे 86वें मेँ संविधान संशोधन 2002 द्वारा जोड़ा गया है।

कुछ स्थितियों मेँ गिरफ्तारी और नजरबंदी से संरक्षण (अनुच्छेद 22)

 *शोषण के विरुद्ध अधिकार*

मानव दुर्व्यापार और बलात श्रम पर प्रतिबंध (अनुच्छेद 23)

कारखानो मेँ 14 वर्ष से कम आयु के बालकोँ के नियोजन पर निषेधात्मक प्रतिबंध (अनुच्छेद 24)

 *धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार*

अंतकरण और धर्म को मनाने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25)

धार्मिक आयोजनोँ की आजादी (अनुच्छेद 26)

किसी धर्म विशेष की अभिवृद्धि के लिए करोँ का भुगतान संबंधी स्वतंत्रता (अनुच्छेद 27)

शिखन संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा प्राप्ति या धार्मिक उपासना की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 28)

Friday, 22 February 2019

*सिंधु जल समझौता*
1960 में भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब ख़ान ने सिंधु जल संधि की थी. इस संधि के मुताबिक़ सिंधु नदी की सहायक नदियों को पूर्वी और पश्चिमी नदियों में बांटा गया था ।

समझौते में सिंधु, झेलम और चेनाब का पानी पाकिस्तान को दिया गया और रावी, ब्यास, सतलज का पानी भारत को दिया गया ।

इसमें ये भी था कि भारत अपनी वाली नदियों के पानी का, कुछ अपवादों को छोड़कर,बेरोकटोक इस्तेमाल कर सकता है । वहीं पाकिस्तान वाली नदियों के पानी के इस्तेमाल का कुछ सीमित अधिकार भारत को भी दिया गया था,जैसे बिजली बनाना, कृषि के लिए सीमित पानी ।

पाकिस्तान भारत की बिजली से पैदा की जाने वाली बिजली की बड़ी परियोजनाओं पर आपत्ति उठाता रहा है ।

वहीं भारत के कश्मीर और पंजाब में वहां के जल संसाधनों का इन राज्यो को लाभ नहीं मिलने की बात अक्सर कही जाती रही है. बल्कि अबकी बार जब बीजेपी के समर्थन से महबूबा मुफ़्ती जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री थीं तो उन्होंने खुद कहा था कि सिंधु जल संधि से राज्य को 20 हज़ार करोड़ का नुकसान हो रहा है और केंद्र उसकी भरपाई के लिए क़दम उठाए ।

पाकिस्तान के पंजाब और सिंध इलाके को कृषि के लिए यहीं से पानी मिलता है. पाकिस्तान के ज़्यादातर इलाके के लिए सिंचाई का यही ज़रिया है. पाकिस्तान की इंडस्ट्री और शहरों की बिजली के लिए भी ये समझौता बहुत मायने रखता है ।

• समझौते के मुताबिक कोई भी एकतरफ़ा तौर पर इस संधि को नहीं तोड़ सकता है या बदल सकता है.

• लेकिन जानकार कहते हैं कि भारत वियना समझौते के लॉ ऑफ़ ट्रीटीज़ की के अंतर्गत यह कह कर पीछे हट सकता है कि पाकिस्तान आतंकवाद और आतंकी गुटों का उसके ख़िलाफ़ इस्तेमाल कर रहा है ।

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने भी कहा है कि अगर मूल स्थितियों में परिवर्तन हो तो किसी संधि को रद्द किया जा सकता है. लेकिन ये सब कहने जितना आसान नहीं ।

• बंटवारे के बाद सिंधु घाटी से गुजरने वाली नदियों पर हुए विवाद की मध्यस्थता वर्ल्ड बैंक ने की थी. लिहाजा यदि भारत यह समझौता तोड़ता है तो पाकिस्तान सबसे पहले विश्व बैंक के पास जाएगा. और विश्व बैंक भारत पर ऐसा नहीं करने के लिए दबाव बना सकता है ।

फिर जिस तरह से चीन का खुला समर्थन पाकिस्तान के साथ है तो चीन अवश्य ही इसके जवाब में ब्रह्मपुत्र नदी का भारत की तरफ उसका बहाव रोक कर बदला ले सकता है !

सिंधु जल समझौता अथवा सिंधु जल संधि पर काफी लंबे समय से भारत-पाकिस्तान के बीच विवाद जारी है ये कोई आज का या अभी का मसला नही है ।

सिंधु जल समझौता पाकिस्तान के लिए काफी अहम है. इस समझौते के तहत भारत पाकिस्तान को करीब 80 फीसदी पानी देता है ।

पाकिस्तान में इमरान खान के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद भी इसके लिए कई बैठकों का दौर चल चुका है. और भारत और पाकिस्तान के बीच पहली द्विपक्षीय वार्ता के रूप में सिंधु जल संधि को ही चुना गया था . हालांकि, अब पाकिस्तान का आतंकवाद को लेकर जिस तरह का रवैया है, उससे लग नहीं रहा है कि इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच फिलहाल कोई आम सहमति बन पाएगी. भारतीय जल आयोग का एक प्रतिनिधिमंडल सिंधु जल संधि के विभिन्न पहलुओं पर अपने समकक्षों से महत्वपूर्ण बातचीत करने के लिए पाकिस्तान पहुंचा था । इमरान खान के 18 अगस्त को प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच यह पहली अधिकारिक वार्ता थी. पाकिस्तान के 22वें प्रधानमंत्री बनने पर इमरान खान को लिखे पत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दोनों देशों के बीच अच्छे पड़ोसियों के संबंध बनाने का भारत का संकल्प व्यक्त किया था ।

दरअसल, पाकिस्तान की इमरान सरकार भी समझ रही है कि उसके मुल्क के लिए सिंधु समझौता कश्मीर समझौते से भी काफी अहम है. क्योंकि कश्मीर के तो त्वरित दुष्परिणाम सामने नहीं आएंगे, मगर सिंधु समझौते पर अगर भारत सरकार का रुख कड़ा हुआ और भारत वैश्विक दबावों को दरकिनार कर सिंधु के पानी को रोक देता है, तो पाकिस्तान को इसके त्वरित दुष्मारिणामो से गुजरना पड़ेगा और यह उसकी अर्थव्यवस्था के लिए भी खतरे की घंटी साबित होगी. भारत अगर इस समझौते को तोड़ देता है तो पाकिस्तान का हलक सूख जाएगा हालांकि, विशेषज्ञ इस बात पर एकमत नहीं हैं कि सिंधु नदी समझौते को तोड़ा जा सकता है या नहीं. मगर इतना तय है कि अगर भारत यह फैसला लेता है तो पाकिस्तान के लिए बड़ी मुसीबत हो जाएगी. मगर वर्तमान हालातों को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि भारत सरकार कोई ऐसा फैसला अब लेगी. गडकरी जी इस बाबत ट्वीट भी कर चुके है पर अपनी तरफ के पानी को रोकने के लिए कुछ बांधों और नहरों की जरूरत होगी जिसमें कुछ साल लग सकते है , फिर भी इस घोषणा से पाकिस्तान की जान सांसत में तो आ ही गयी है ।

*धारा 370*
*जरूर जानिए*


जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है ।
-------------- -------------------- -
जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग होता है
-----------------
जम्मू - कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है

जबकी भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5
वर्ष का होता है ।
-----------------
जम्मू-कश्मीर के अन्दर भारत के राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान अपराध नहीं होता है ।
----------------
भारत के उच्चतम न्यायलय के आदेश जम्मू - कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते हैं
----------------------
भारत की संसद को जम्मू - कश्मीर के सम्बन्ध में अत्यंत सीमित
क्षेत्र में कानून बना सकती है ।
----------------------
जम्मू कश्मीर की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के
व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जायेगी ।
इसके विपरीत यदि वह पकिस्तान के
किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसे भी जम्मू - कश्मीर की नागरिकता मिल जायेगी ।
-------------
और
----------------------
धारा 370 की वजह से कश्मीर में RTI लागु नहीं है ।
RTE लागू नहीं है ।
CAG लागू नहीं होता ।
भारत का कोई भी कानून लागु नहीं होता ।
---------------------
कश्मीर में महिलाओ पर शरियत कानून लागु है ।
कश्मीर में पंचायत के अधिकार नहीं ।
कश्मीर में चपरासी को 2500 ही मिलते है.

कश्मीर में अल्पसंख्यको [ हिन्दू- सिख ] को 16 % आरक्षण नहीं मिलता ।
----------------------
धारा 370 की वजह से कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते है ।
----------------------
धारा 370 की वजह से ही पाकिस्तानियो को भी भारतीय
नागरीकता मिल जाता है ।

इसके लिए पाकिस्तानियो को केवल किसी कश्मीरी लड़की से
शादी करनी होती है ।
----------------------
अच्छी शुरुवात है कम से कम 370 हटाने की दिशा में एक कदम आगे की ओर मोदी जी को धन्यवाद जो उन्होनें धारा 370
का मुद्दा उठाया ।

अब यदि कोई सेकुलर इन तथ्यों के विषय में कुछ कहना चाहे
तो स्वागत हैं...!!!
370 धारा हटाना ही है.... इसलिए मेसेज को ज्यादा से ज्यादा फैलाओ
कश्मीर में आप
तिरंगा नहीं फहरा सकते,

कन्याकुमारी में रिक्शे के पीछे आप जय श्री राम नहीं लिख सकते,

हैदराबाद में मन्दिर की आप
घंटी नहीं बजा सकते,

कलकत्ता में आप अपने घर के दरवाजे पर
बजरंगबली की मूर्ति नहीं लगा सकते.

फिर कैसे कहूं की कश्मीर से
कन्याकुमारी तक भारत एक है ??

65 सालो के इतिहास में :-
पहली बार जिसने खुल के 370 का विरोध किया हे । तो उसका साथ दीजिये ।

आपको सिर्फ 3 लोगो को मेसेज जरुर करना है , जनहित का ये मेसेज सिर्फ आप सब के पढने के लिए नहीं है.... आगे क्या करना है इस मेसेज का, आप खुद समझदार है

भारत माता की जय

जर्नलिस्ट मनोज रुहेला
*अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख* *न्यायिक अंग है।*

 *इसका मुख्यालय दि हेग (नीदरलैंड) में स्थित है।*

इसकी स्थापना 26 जून 1945 को सैन फ्रांसिस्को में हस्ताक्षरित विधेयक के अनुरूप हुई थी, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर का ही एक अभिन्न भाग है।

सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य इसके अनुमोदक हैं। स्विट्जरलैंड द्वारा भी इसे स्वीकार किया गया है।

इस न्यायालय का उद्देश्य सदस्य राष्ट्रों द्वारा सामने रखे गये विवादों की सुनवाई एवं निपटारा करना तथा महासभा, सुरक्षा परिषद या महासभा द्वारा अधिकृत अन्य सहयोगी संगठन के अनुरोध करने पर किसी वैधानिक प्रश्न से संबंधित परामर्श उपलब्ध कराना है।

कोई भी सदस्य देश किसी मामले को न्यायालय की सुनवाई हेतु प्रस्तुत कर सकता है।

फिर भी किसी भी देश को अपने विवाद को न्यायालय के सामने रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

अन्य देश अपने मामलों को सुरक्षा परिषद द्वारा तय की गयी शर्तों के अधीन न्यायालय के समक्ष ला सकते हैं।

निजी व्यक्ति को विवाद का पक्ष नहीं बनाया जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में 15 न्यायाधीश होते हैं, जिनका चुनाव 9 वर्षीय कार्यकाल के लिए महासभा एवं सुरक्षा परिषद द्वारा स्वतंत्र रूप से किया जाता है।

एक-तिहाई स्थानों के लिए प्रति तीन वर्षों के बाद चुनाव होते हैं।

न्यायाधीश विभिन्न राष्ट्रीयताओं से संबद्ध होते हैं तथा स्थायी विवाचन न्यायालय (1899 व 1907 के हेग सम्मेलनों द्वारा स्थापित) में मौजूद राष्ट्रीय समूहों द्वारा नामांकित किये जाते हैं।

अंर्तराष्ट्रीय न्यायालय में विश्व की प्रमुख वैधानिक व्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व होता है तथा किसी भी राष्ट्र के दो न्यायाधीशों को नहीं चुना जाता है।

किसी भी न्यायाधीश को राजनीतिक या प्रशासनिक गतिविधियों में भाग लेने की स्वीकृति नहीं दी जाती।

न्यायाधीशों को अपेक्षित सेवा शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में ही पदच्युत किया जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय तीन वर्षीय कार्यकाल हेतु अपने अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव करता है।

न्यायालय का अधिकार क्षेत्र निम्नलिखित चार पद्धतियों द्वारा सुनिश्चित होता है-

दो या अधिक राज्य विशेष समझौतों के माध्यम से अपने पारस्परिक विवादों को न्यायालय के सामने ला सकते हैं।

किसी बहुपक्षीय संधि में यह प्रावधान किया जा सकता है कि संधि की व्याख्या से जुड़े मामालों पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ही विचार-विमर्श किया जा सकेगा।

किसी द्वि-पक्षीय संधि द्वारा किसी विशिष्ट मामले की सुनवाई अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में कराये जाने की व्यवस्था की जा सकती है।

न्यायालय में प्रक्रिया शुरू होने के बाद अनौपचारिक रूप से किसी मामले में न्यायालय का अधिकार क्षेत्र विस्तृत हो सकता है।

अपने अधिकार क्षेत्र से जुड़े विवाद को न्यायालय स्वयं ही सुलझाता है।

न्यायालय द्वारा सामान्य सिद्धांतों, पूर्व न्यायिक फैसलों तथा प्रख्यात विधिशास्त्रियों के विचारों के प्रकाश में मामलों का न्याय-निर्णयन किया जाता है।

यदि किसी पक्ष की राष्ट्रीयता से संबद्ध न्यायाधीश पीठ में शामिल नहीं होता, तो प्रत्येक पक्ष एक तदर्थ न्यायधीश का पदनाम सुझा सकता है।

ऐसे तदर्थ न्यायाधीश के लिए संबद्ध पक्ष की राष्ट्रीयता होना जरूरी नहीं होता तथा उसे अन्य न्यायधीशों के साथ पूर्ण समानता प्राप्त होती है।

सभी प्रश्नों का निर्णय उपस्थित न्यायाधीशों के बहुमत द्वारा होता है।

इनकी कोरम संख्या 9 होती है।

सम मतों की स्थिति में अध्यक्ष द्वारा दुबारा निर्णायक मत डाला जा सकता है।

न्यायालय का निर्णय अंतिम होता है, यद्यपि नये निर्णायक कारकों के आधार पर निर्णय की तारीख से 10 वर्षों के भीतर पुनर्विचार का अनुरोध किया जा सकता है।

न्यायालय द्वारा विशेष मामलों की सुनवाई हेतु तीन या अधिक न्यायधीशों वाले समूहों का गठन किया जा सकता है।

1993 में पर्यावरण मामलों पर सात सदस्यीय दल का गठन किया गया था।

न्यायालय का पंजीयन विभाग पंजीयक के नेतृत्व में न्यायालय के समक्ष लाये गये मामलों की सूची तैयार करता है।

अंग्रेजी तथा फ्रांसीसी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की आधिकारिक भाषाएं हैं।

Thursday, 21 February 2019

[18/02, 1*_प्रसिद्ध_भारतीय_वैज्ञानिक_और_उनके_आविष्कार*

 *डॉ_सी_वी_रमन*
चंद्र्शेखार वेंकटरमन का जन्म 7 नवंबर 1888 में हुआ, तथा उनका निधन 21 नवंबर 1970 में हुआ था। ये भारतीय भौतिकशास्त्री थे। उनका अविष्कार उनके ही नाम पर रमन प्रभाव के नाम से जाना जाता है। इन्होने इस खोज की घोषणा 29 फरवरी 1928 ई को की। प्रकाश के प्रकीर्णन पर उत्कृष्ट कार्य के लिए वर्ष 1930 में उन्हें भौतिकी पर प्रतिष्ठित _नोबेल_पुरस्कार दिया गया।

1954 ई में उन्हें भारत सरकार द्वारा _भारत_रत्न की उपाधि से विभूषित किया गया तथा 1957 में #_लेनिन_शांति_पुरस्कार प्रदान किया गया था।

 *_डॉ_ए_पी_जे_अब्दुलकलाम*

भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं भारत रत्न डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम #_मिसाइल_मैंन ' के नाम से जाने जाते है।
1962 में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में शामिल हुए।

डॉ. कलाम को प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह ( एस. एल. वी. -3 )प्रक्षेपात्र बनाने का श्रेय प्राप्त है।

 1980 में कलाम ने रोहणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया था और इन्ही के प्रयासों की वजह से भारत भी अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन सका।
इसरो लांच व्हीकल प्रयोग को परवान चढ़ाने का श्रेय भी इन्हे ही प्रदान किया जाता है।
डॉ. कलाम ने स्वदेशी लक्ष्य भेदी (गाइडेड मिसाइल )को डिजाइन किया। ख़ास बात यह है की इन्होने अग्नि एवं पृथ्वी जैसी मिसाइलों को स्वदेशी तकनीक से बनाया।
1997 मे भारत रत्न दिया गया

 *_विक्रम_साराभाई*

विक्रम अम्बालाल साराभाई भारत के अंतरिक्ष इतिहास के जनक
इन्होने भारत के अंतरिक्ष प्रोग्राम की नीव रखी। उन्होंने देश में 40 अंतरिक्ष और शोध से जुड़े संस्थानों को खोला। उन्होंने आणविक ऊर्जा ,इलेक्ट्रॉनिक और अन्य अनेक क्षेत्रों में भी बराबर का योगदान किया।
गुजरात के अहमदाबाद से आने वाले साराभाई पर तिरुवनंतपुरम में स्थापित थुम्बा इक्वटोरियल रॉकेट लांचिंग स्टेशन और संबध अंतरिक्ष संस्थानो का नाम बदलकर विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र रख दिया गया। यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक प्रमुख अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र के रूप में उभरा।

 *_डॉ_जगदीश_चंद्र_बोस*

डॉ. जगदीश चंद्र बोस को सर बोस भी कहा जाता था। उन्हें भौतिकी ,जीव विज्ञान ,वनस्पति विज्ञान तथा पुरातत्व का गहन ज्ञान था।
वे दुनिया के पहले ऐसे वैज्ञानिक थे जिन्होंने रेडिओ और सूक्ष्म तरंगो की प्रकाशिकी का कार्य किया। वे भारत के पहले वैज्ञानिक थे जिन्हे अमेरिकी पेटेंट मिला। पूरी दुनिया में उन्हें रेडिओ विज्ञान का पिता कहा जाता है। इन्होने बेतार के संकेत भेजने में असाधारण प्रगति की और सबसे पहले रेडिओ संदेशो के आदान -प्रदान के लिए अर्द्ध चालकों का प्रयोग प्रारम्भ किया। इन्होने वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में क्रेस्कोग्राफ का अविष्कार किया और इससे विभिन्न उत्तेजको के प्रति पौधो की प्रतिक्रिया का अध्ययन किया जा सकता है।

 *_डॉ_होमी_जहाँगीर_भाभा*

डॉ होमी जहाँगीर भाभा के बिना भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्हें आर्किटेक्ट ऑफ़ इंडियन एटॉमिक एनर्जी प्रोग्राम भी कहा जाता है। डॉ होमी जहाँगीर भाभा 1947 में भारत सरकार द्वारा गठित परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रथम अध्यक्ष नियुक्त हुए तथा 1953 में जेनेवा में संपन्न विश्व परमाण्विक वैज्ञानिक महासम्मेलन की अध्यक्षता की। उन्ही के कारण 1974 में देश पहला परमाणु परीक्षण करने में सफल रहा। उन्होंने एक तरह से देश को परमाणु शक्ति सम्पन्न बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चौकाने वाली बात यह थी की उन्होंने नाभिकीय विज्ञान में तब कार्य आरम्भ किया , जब इसके बारे में ज्ञान न के बराबर था जबकि उनकी नाभिकीय ऊर्जा से विद्द्युत उतपादन की कल्पना को तो कोई मानने को तैयार नहीं था।

_सत्येन्द्रनाथ_बोस

इस महान भारतीय वैज्ञानिक की महानता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है की भौतिकशास्त्र में _बोसान_और_फर्मियान नाम के दो अणुओ में से से बोसान सत्येन्द्रनाथ बोस के नाम पर ही है। उन्होंने अपने समय के महान वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टीन के साथ मिलकर बोस -आइंस्टीन स्टैटिस्टिक्स की खोज की। हिग्स - बोसॉन ,
जिसे गॉड पाटिकल की संज्ञा दी जाती है ,का विचार इन्होने पीटर हिग्स के साथ दिया।

 *_डॉ_शांतिस्वरूप_भटनागर*

डॉ. शांति स्वरुप भटनागर का जन्म 1894 में शाहपुर पकिस्तान में हुआ था। 1941 में ब्रिटिश सरकार ने इन्हे नाइट हुड की उपाधि दी। इनके शोध विषय में एमल्ज़न कोलाइड्स एवं ओद्योगिक रसायनशास्त्र थे किन्तु प्रमुख योगदान चुंबकीय रसायनकी के क्षेत्र में था। 1947 में भारतीय स्वतंत्रता के उपरान्त वैज्ञानिक एवं अनुसंधान परिषद (सी. एस. आई. आर. )की स्थापना डॉ. शांति स्वरुप भटनागर की अध्यक्षता में की की गई। इन्हे शोध प्रयोगशाला का जनक भी कहा जाता है। इनकी मृत्यु के पश्चात् सी.एस.आई.आर. ने राष्ट्रीय पुरस्कार की शुरुआत की।

 *_बीरबल_साहनी*

बीरबल साहनी का जन्म नवंबर 1891 में शाहपुर पकिस्तान में हुआ था। इनके पिता रुचिराम साहनी ने कैम्ब्रिज के प्रोफ़ेसर अर्नेस रदरफोर्ड एवं कोपेनहेगन के नाइल्स बोर के साथ रेडिओ सक्रियता पर शोध कार्य किया। इसी से प्रेरणा लेकर बीरबल लन्दन एवं कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से डीएससी की उपाधि प्राप्त की। इनके अनुसंधान में जीव विज्ञान तथा जीवाश्म की अधिकता है।

 *_बेंकटरमन_रामकृष्णन*

तमिलनाडु के चिदंबरम जिले से आने वाले भारतीय मूल के वेंकटरमन रामकृष्ण को 2009 में रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार दिया गया। रामन को यह पुरस्कार कोशिका के अंदर प्रोटीन का निर्माण करने वाले
राइबोसोम की कार्य प्रणाली व संरचना के उत्कृष्ट अध्ययन के लिए दिया गया।

 *_सुब्रह्ण्यम_चंद्रशेखर*

सुब्रह्ण्यम चंद्रशेखर को 1983 में भौतिकशास्त्र के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया। डॉ. सुब्रहण्यम चंद्रशेखर ने तारे की अवस्थाओं का अध्ययन करके यह बताया की कौन - सा तारा श्वेत वामन परिवर्तित होगा। इसके लिए उन्होंने 2.8 सौर्यिक दृव्यमान की अवधारणा दी। उनके द्वारा दी गई इस सीमा को चंद्रशेखर सीमा कहा जाता है। इस भारतीय वैज्ञानिक की इस खोज ने दुनिया की उतपत्ति के रहस्यों को सुलझाने में बहुत योगदान दिया। वे महान भारतीय वैज्ञानिक सी. वी. रमन के भतीजे थे।
उनका नाम 20 वी शताव्दी के महान वैज्ञानिको की सूची में शुमार किया जाता है। उन्होंने खगोल , भौतिकशास्त्र तथा सौरमंडल से सम्बंधित विषयो पर अनेक पुस्तके लिखी।

 *_हरगोविंद_खुराना*

भारतीय मूल के इस अमेरिकी नागरिक और वैज्ञानिक डॉ. हरगोविंद खुराना को 1968 में चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया। उन्होंने आनुवांशिक कोड ( डीएनए ) की व्याख्या की और उसका अनुसंधान किया।
 खुराना ने मार्शल ,निरेनबग और रॉबर्ट होल्ले के साथ मिलकर चिकित्सा के क्षेत्र में काम किया। खुराना के इस अनुसंधान से चिकित्सा क्षेत्र को यह पता लगाने में मदद मिली की कोशिका के अनुवांशिक कूट (कोट ) को ले जाने वाले न्यूक्लिक अम्ल (एसिड ) न्यूक्लिओटाइटस कैसे कोशिका के प्रोटीन संश्लेषण को नियंत्रित करते है।

 *_मेघनाद_साहा*

मेघनाद साहा का जन्म 1893 को ढाका के निकट हुआ था। यह सुप्रसिद्ध भारतीय खगोलीय वैज्ञानिक थे ,जो साहा समीकरण के लिए प्रसिद्द है। यह समीकरण तारो में भौतिक एवं रासायनिक स्थिति की व्याख्या करता है। विद्यार्थी जीवन में उन्होंने जगदीशचंद्र बासु एवं प्रफुलचन्द्र राय से शिक्षा प्राप्त की। वे 1934 के भारतीय विज्ञान कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।

 *_चिंतामणि_नागेश_रामचन्द्रराव*

चिंतामणि नागेश रामचन्द्रराव का जन्म 30 जून 1934 में बैंगलुरु में हुआ। इन्होने  संरचनात्मक रसायनशास्त्र के क्षेत्र में मुख्य रूप से काम किया है। वह भारत के प्रधानमन्त्री के वैज्ञानिक सलाहकार परिषद् के प्रमुख के रूप में सेवा कि

 डॉ. राव को दुनियाभर के 60 विश्व विद्यालयों से मानद डॉक्टरेट प्राप्त है। इन्होने लगभग 1500 शोधपत्र और 45 वैज्ञानिक पुस्तके लिखी है।

वर्ष 2014 में भारत सरकार ने उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्म्मानित किया

सी. वी. रमन और ऐ.पि.जे. अब्दुल कलाम के बाद इस पुरस्कार से सम्मानित किय जाने वाले वे तीसरे ऐसे वैज्ञानिक है। डॉ. राव अंतर्राष्ट्रीय पदार्थ विज्ञान केंद्र (इंटरनेशनल सेंटर फॉर मटेरियल साइंस )के निदेशक भी थे _
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1. मुद्रा स्फीति की स्थिति में बाजार की वस्तुएं-
(अ) सस्ती हो जाती है (ब) महंगी हो जाती है (स) प्रचुरता से मिलती है (द) बिल्कुल नहीं मिलती है
2. लगातार बढ़ती कीमतों की प्रक्रिया होती है?
(अ)मंदी (ब)अति उत्पादन (स) मुद्रा स्फीति (द) मुद्रा अवस्फीति
3. निम्नलिखित में वह वर्ग कौन है, जिसको मुद्रा स्फीति के कारण सबसे अधिक हानि होती है?
(अ) देनदार (ब) लेनदार (स) व्यापारी वर्ग (द) वास्तविक परिसंपत्तियों के धारक
4. चक्रवात का शांत क्षेत्र क्या कहलाता है?
(अ) चक्षु (ब) गर्त (स) परिक्षेत्र (द) केंद्र
5. टी-मापक पर निम्न में से किसका मापन किया जाता है?
(अ) भूकंपीय तरंग (ब) पवनों की गति (स) चक्रवातों की शक्ति (द) वर्षा की मात्रा
6. फिलीपींस, जापान तथा चीन सागर में जो उष्ण कटिबंधीय चक्रवातीय तूफान आते हैं, उन्हें क्या कहा जाता है?
(अ) हरिकेन (ब) टारनेडो (स) टायफून (द) विलीविली
7. रेशेदार दिखाई देने वाले मेघ को क्या कहते हैं?
(अ) कपासी (ब) स्तरी (स) पक्षाभ (द) स्तरी मध्य मेघ
8. निम्नलिखित में से किस मेघ का शीर्ष गोभी के फूल के समान प्रतीत होता है?
(अ) स्तरी मेघ (ब) पक्षाभ मेघ (स) कपासी मेघ (द) वर्षा स्तरी मेघ
9. तडि़त झंझा एवं मूसलाधार वर्षा किस मेघ की महत्वपूर्ण विशेषता है?
(अ) कपासी वर्षा मेघ (ब) वर्षा स्तरी मेघ (स) कपासी मेघ (द) पक्षाभ कपासी मेघ
10. स्वेज नहर किसको जोड़ती है?
(अ) भूमध्य सागर को लाल सागर से (ब) भूमध्य सागर को कैस्पियन सागर से (स) लाल सागर को हिंद महासागर से (द) भूमध्य सागर को हिंद महासागर से
11. निम्नलिखित देशों में से कौन सा एक प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर को जोडऩे के लिए पनामा नहर के प्रतिद्वंद्वी के निर्माण के लिए योजना बना रहा है?
(अ) कोलंबिया (ब) कोस्टारिका (स) ग्वाटेमाला (द) निकारागुआ
12. निम्न में से किस महासागर की लवणता सबसे अधिक है?
(अ) अटलांटिक महासागर (ब) प्रशांत महासागर (स) हिंद महासागर (द) आर्कटिक महासागर
13. लाल नदी के डेल्टा क्षेत्र में कौन सा नगर स्थित है?
(अ) वियंतियान (ब) सिओल (स) हनोई (द) हैंकाऊ
14.निम्नलिखित में से किस नदी का डेल्टा चिडिय़ा के पर जैसा है?
(अ) नील (ब) ब्रह्मपुत्र (स) अमेजन (द) मिसीसिपी
15. किस द्रव का उसके क्वथनांक से पूर्व उसके वाष्प में बदलने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
(अ) वाष्पीकरण (ब) संघनन (स) हिमीकरण (द) इनमें से कोई नहीं
16. पहाड़ों पर पानी निम्नलिखित तापमान पर उबलने लगता है?
(अ) 100 अंश सेंटीग्रेड से कम (ब) 100अंश सेंटीग्रेड से अधिक (स) 100 अंश सेंटीग्रेड (द) इनमें से कोई नहीं
17. ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम से संरक्षित होता है?
(अ) संवेग (ब) ऊर्जा (स) संवेग और ऊर्जा दोनों (द) इनमें से कोई नहीं
18. आंतरिक ऊर्जा की संकल्पना ऊष्मागतिकी के किस नियम से मिलती है?
(अ) शून्यांक नियम (ब) प्रथम नियम (स) द्वितीय नियम (द) तृतीय
19. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 1905 के बनारस अधिवेशन के अध्यक्ष कौन थे?
(अ) सुरेंद्र नाथ बनर्जी (ब) फिरोजशाह मेहता (स) गोपालकृष्ण गोखले (द) दिनशा वाचा
20. भारत के पहले लोक संघ लैंड होल्डर्स सोसाइटी की स्थापना कब हुई थी?
(अ) 1835 ई. (ब) 1836 ई. (स) 1837 ई. (द) 1838 ई.
21. लैंड होल्डर्स सोसाइटी की स्थापना किसके कल्याण के लिए की गई थी?
(अ) जमींदार (ब) किसान (स) शिल्पकार (द) उपर्युक्त सभी
22. निम्नलिखित में से किसने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्षता दो बार की?
(अ) जार्ज यूले (ब) वेडरबर्न (स) कादंबिनी गांगुली (द) इनमें से कोई नहीं
23. न्यूजीलैंड में उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में उतरने वाली गर्म शुष्क एवं धूल भरी स्थानीय हवा निम्न में से किस नाम से जानी जाती है?
(अ) ब्रिक फील्डर (ब) नारवेस्टर (स) टै्रमोण्टेन (द) साण्टाअना
24. निम्नलिखित में से कौन सी स्थानीय पवन को डॉक्टर वायु भी कहा जाता है?
(अ) फॉन (ब) चिनूक (स) हरमट्टन (द) सिरॉकी
25. निम्नलिखित में से कौन सी गर्म स्थानीय पवन कैलिफोर्निया में फल के बागीचों को काफी नुकसान पहुंचाती है?
(अ) जोण्डा (ब) सांताअना (स) नार्दर (द) चिनूक
26. सौर ऊर्जा का निर्माण किससे होता है?
(अ) हाइड्रोजन अणु के विखंडन से (ब) यूरेनियम अणु के विखंडन से (स)हाइड्रोजन अणु के संगलन से (द) हीलियम अणु के संगलन से
27. जैविक गैस से ग्रामीण क्षेत्रों को कौन सा लाभ मिलता हैं?
(अ) रोजगार उपलब्धक (ब) ग्रामीण उद्योग के लिए ऊर्जा स्रोत (स)ग्राम को साफ रखती है (द)ग्रामीण घरों की ऊर्जा की आवश्यकता की पूर्ति
28. अवध, हैदराबाद, भरतपुर, रुहेलखंड एवं फर्रुखाबाद किस मुगल शासक के समय में स्वतंत्र हुए?
(अ) फर्रुखसियार (ब) मुहम्मदशाह रंगीला (स) अहमदशाह (द) शाह आलम द्वितीय
*_उत्तर_*
-1.(ब)महंगी हो जाती है, 2.(स) मुद्रा स्फीति, 3.(ब) लेनदार, 4.(अ) चक्षु, 5.(स) चक्रवातों की शक्ति, 6.(स) टायफून, 7.(स) पक्षाभ, 8.(स) कपासी मेघ, 9.(अ) कपासी वर्षा मेघ, 10.(अ) भूमध्य सागर को लाल सागर से, 11.(द) निकारागुआ, 12.(अ) अटलांटिक महासागर, 13.(स) हनोई, 14.(द) मिसीसिपी, 15.(अ) वाष्पीकरण, 16.(अ) 100 अंश सेंटीग्रेड से कम, 17.(ब) ऊर्जा, 18.(ब) प्रथम नियम, 19.(स) गोपालकृष्ण गोखले, 20.(स)1837 ई., 21.(अ) जमींदार, 22.(ब) वेडरबर्न, 23.(ब) नारवेस्टर, 24.(स) हरमट्टन, 25.(ब) सांताअना, 26.(स) हाइड्रोजन अणु के संगलन से, 27.(द)ग्रामीण घरों की ऊर्जा की आवश्यकता की पूर्ति, 28.(ब) मुहम्मदशाह रंगीला

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