Wednesday, 6 February 2019

अंतर्राष्ट्रीय_न्यायालय_कैसे_काम_करता_है

ASHISH MISHRA

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय को अपनी मर्जी के हिसाब से नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है. न्यायालय की न्यायिक प्रक्रिया, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय #_नियमावली_1978 के अनुसार चलती है
#_जिसे_29_सितंबर_2005 को संशोधित किया गया था .

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में किसी देश का कोई #_स्थायी_प्रतिनिधि_नहीं होता है.
 देश सामान्यतया अपने #_विदेश_मंत्री के माध्यम से या नीदरलैंड में अपने राजदूत के माध्यम से रजिस्ट्रार से संपर्क करते हैं

जो कि उन्हें कोर्ट में एक एजेंट के माध्यम से #_प्रतिनिधित्व प्रदान करता है.

आवेदक को केस दर्ज करवाने से पहले न्यायालय के अधिकार क्षेत्र और अपने दावे के आधार पर एक लिखित आवेदन देना पड़ता है.

#_प्रतिवादी_न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार करता है और मामले की योग्यता के आधार पर अपना लिखित उत्तर दर्ज करवाता है.

इस न्यायालय में मामलों की सुनवाई #_सार्वजनिक_रूप से तब तक होती है जब तक न्यायालय का आदेश अन्यथा न हो अर्थात यदि न्यायालय चाहे तो किसी मामले की #_सुनवाई_बंद_अदालत में भी कर सकता  है.

सभी प्रश्नों का निर्णय न्यायाधीशों के #_बहुमत से होता है।

सभापति को निर्णायक मत देने का अधिकार है. न्यायालय का निर्णय अंतिम होता है, उसकी अपील नहीं हो सकती किंतु कुछ मामलों में #_पुनर्विचार_हो_सकता है.

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) संयुक्त राष्ट्र (यूएन) का प्रमुख न्यायिक अंग है।

यह संयुक्त राष्ट्र के चार्टर द्वारा जून 1945 में स्थापित किया गया था और इसने अप्रैल 1946 में काम करना शुरू किया था।
 न्यायालय का #_मुख्यालय_हेग (नीदरलैंड) में शांति पैलेस में है।

 #_यह_न्यायालय
संयुक्त राष्ट्र के छः प्रमुख अंगों में से , एकमात्र ऐसा अंग है जो कि न्यूयॉर्क (संयुक्त राज्य अमेरिका) में स्थित नहीं है।
इसका अधिवेशन छट्टियों को छोड़कर हमेशा चालू रहता है। न्यायालय के प्रशासनिक व्यय का भार संयुक्त राष्ट्र संघ उठाता है

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